आज बस स्टॉप पर खड़ा राहुल कुछ परेशान सा दिख रहा था। बार बार अपनी नजरे इधर उधर दौड़ा रहा था बार बार अपनी घड़ी मे टाइम देख रहा था ऐसा लग रहा था जैसे किसी का इंतज़ार कर रहा है। और ऐसा इंतज़ार जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था जिस लड़की का वो इंतज़ार कर रहा था शायद वो कभी नहीं आने वाली थी।

कुछ महीने पहले सफ़ेद शर्त और काली पैंट के साथ कत्थई टाइ पहने राहुल बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार कर रहा था। उसी बस स्टैंड पर पहली बार उसने रिया को देखा था जिसके आगे से कटे हुए बाल बार बार उसकी आंखो के सामने आकर उसे परेशान कर रहे थे। और रिया बालों को पीछे हटाते हटाते परेशान थी शायद वह जल्दी मे बालों मे क्लिप लगाना भूल गयी थी। राहुल बिना पालक झपकाए उसे देख रहा था अचानक रिया की नज़र राहुल पर पड़ी जो काफी देर से उसे देख ही रहा था रिया के मुह से शब्द निकले “बदतमीज़ लड़का” । और वह थोड़ी दूर होकर खड़ी हो गयी। पर राहुल को रिया की आवाज़ इतनी सुरीली और मीठी लगी की रिया के अंदर और डूब गया। उसे रिया के कहे हुए शब्दों से कोई फर्क नहीं पड़ा फिर बस आ गयी और रिया चली गयी।

सिलसिला यूं ही चलता रहा रिया जब बस स्टॉप[ पर पहुँचती तो दो आंखे उसका इंतज़ार कर रही होती थी। और बिना पालक झपकाए जब तक रिया को देखती थी जब तक रिया आँखों से ओझल नहीं हो जाती थी। बिना कुछ कहे यूं ही खामोश देखते रहना ही शायद रिया को पसंद आने लगा था ये कहना ज़रा मुश्किल है की राहुल कुछ कहना ही नहीं चाहता था या फिर कुछ कहने का साहस नहीं जुटा पा रहा था इतने समय के बाद रिया को अच्छा लगने लगा था की कोई तो है जो उसे रोज़ देखता है और वह अब ये चाहने लगी थी की ये दो आँखें अब उसे यूं ही खामोशी से देखती रहें।

एक दिन रिया ने ही हिम्मत जुटा ली और राहुल के करीब होकर खड़ी हो गयी और कह ही दिया “पागलो की तरह देखते ही रहोगे या कुछ कहोगे भी?” यकीन मानिए राहुल का दिल इतनी ज़ोरों से धडक रहा था की पास खड़ा कोई भी उसे आसानी से सुन सकता था राहुल हकलाने की सिवा और कुछ नहीं कर सका और रिया चली गयी। राहुल को रिया से बात करने की हरी झंडी मिल गयी थी अब उसका दिल रिया को देखने के साथ साथ उससे बात करने को भी करने कागा था। अगले दिन राहुल टिप-टॉप होकर बस स्टॉप पर पाहुचा आज रिया पहले से ही राहुल का इंतज़ार कर रही थी राहुल पहले कुछ देर खड़ा रहा फिर रिया के पीछे जाकर खड़ा हो गया और कान मे फुसफुसाया “आपका नाम क्या है” राहुल का ऐसा करना रिया को हसने से रोक नहीं पाया और वह खिलखिलाकर हसने लगी। रिया ने अपना नाम बताया और फिर राहुल ने अपना नाम बताया आज बस इतनी ही बात हुई और फिर दोनों चले गए॥

यूं ही ज़िंदगी को कुछ नयी खुशियों के साथ दोनों ने जीना शुरू कर दिया था अब दोनों कुछ जल्दी आ जाया करते थे और बस स्टॉप पर ही थोड़ा समय साथ बिताया करते थे। राहुल कभी रिया को गोल-गप्पे या आइस- क्रीम का ऑफर करता तो रिया मुसकराकर कल पर ताल जाती थी राहुल भी इतना ज़िद्द नहीं करता था बस किसी तरह रिया को खुश देखना चाहता था।

इस तरह बस स्टॉप पर शुरू हुआ ये दीवानापन बस के अंडर भी घुस आया था अब पहले राहुल रिया को उसकी जगह तक छोडने जाता था उसके बाद अपने काम से जाता था इस तरह दोनों को साथ समय बिताने का मौका मिल जाता था। राहुल प्यार से रिया को परी कहने लगा था और रिया तो बहुत पहले से ही राहुल को देवाना कहकर बुलाती थी।
दोनों कई जगह साथ घूमे, फिल्मे देखने गए। दोनों थिएटर मे एक दूसरे की गौद मे पॉप्कॉर्न भी ढूंढते, और पार्को मे एक दूसरे की गोद मे सिर रखकर लेट भी जाया करते थे। दोनों मे से किसी ने भी अपने प्यार का इज़हार नहीं किया था बस ये एक ऐसा मजबूत रिश्ता बनता जा रहा था जिसमे हर बात इशारो और आंखो से हो जाया करती थी। इस रिश्ते मे कहने से ज्यादा आँखों पर विश्वास होने लगा था।

एक दिन रिया बस स्टॉप पर नहीं आई राहुल ने उसे फोन भी किया लेकिन रिया का फोन बंद था रिया की पिछले 15 दिनों से कोई खबर नहीं थी राहुल रिया का घर, ऑफिस या किसी दोस्त तक को भी नहीं जानता था और शायद अभी तक जानने की नौबत ही नहीं आई होगी। उसका सिर्फ और सिर्फ रिया से रिश्ता था राहुल बहुत ज्यादा परेशान और खामोश हो गया था।
फिर एक शाम राहुल का फोन बजा नंबर किसी एस.टी.डी बूथ का लग रहा था राहुल ने फोन उठाया वो रिया ही थी वह आज शाम को राहुल से मिलने चाहती थी लेकिन रिया की आवाज़ का दर्द राहुल समझ गया था रिया ने समय और जगह बताकर फोन रख दिया।

राहुल पहले ही मिलने के लिए रेस्टरौंट मे जाकर बैठ गया था और कई गिलास पानी पी चुका था रिया आई और उसने बिना इधर उधर की बात किए हुए बैठ गयी और आंखो मे आँसू लिए राहुल से नजरे बचाकर बोलना शुरू कर दिया। ” मेरे पिताजी का 15 दिन पहले निधन हो गया है और अब माँ और मे इस अंजान शहर मे अकेले हैं मेरी माँ ने ये फैसला किया है की अब हम ये शहर छोडकर अपनी मौसी के पास दूसरे शहर जा रहे है। राहुल जो पल हमने साथ बिताए वो पल मेरी ज़िंदगी के सबसे अच्छे पल थे अब मुझे भूल जाओ और हो सके तो मुझे माफ कर देना”।
राहुल की आँख और गला दोनों भर आए थे वो बस इतना ही कह पाया था की मैं तुम्हारा उसी बस स्टॉप पर इंतज़ार करूंगा।
रिया ने अपने बैग से अपना फोन निकाला और राहुल के करीब होकर साथ मे एक सेलफ़ी ली और आँख का कोना साफ़ करते हुए कहने लगी मे इस फोटो को हमेशा अपने साथ रखूंगी। उसके बाद दोनों अलग हो गए………
राहुल आज भी कुछ समय उसी बस स्टॉप पर बिताता है… और शायद रिया भी उस फोटो को रोज़ देखती होगी…….

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