अक्सर ये अफ़वाह सुनने को मिलती है कि मुस्लिमों की जनसंख्या हिन्दुओं की जनसंख्या को अगले कुछ सालों में पार कर जाएगी, हिन्दू अल्पसंख्यक बन जायेंगे, मुस्लिम मिशन के तहत जनसंख्या बढ़ा रहे हैं इत्यादि! संघियों-बजरंगियों-भक्तों की इस अफ़वाह को करोड़ों आम हिन्दू भी सच मान बैठते हैं और मुस्लिमों से नफ़रत करना शुरू कर देते हैं! आओ इस अफ़वाह के पीछे की हक़ीक़त समझें:

भारत की 2011 जनगणना के अनुसार देश में हिन्दुओं की कुल जनसंख्या 96.62 करोड़ और मुस्लिमों की 17.22 करोड़ है! हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि दर पिछले दशक (2001 से 2011) में 16.76% रहा और मुस्लिमों में यह 24.6% रहा! खैर अगर मौजूदा वृद्धिदर को आधार बनाकर गणना करें तो 40 साल बाद जहाँ हिन्दुओं की कुल जनसंख्या क़रीब 172 करोड़ होगी वही मुस्लिमों की कुल जनसंख्या अधिकतम 38 करोड़ होगी! कहाँ 172 करोड़ और कहाँ 38 करोड़! ये भी ध्यान रहे मुस्लिमों में इस दशकीय वृद्धिदर में गिरावट हिन्दुओं से ज़्यादा रही! अर्थात आने वाले समय में मुस्लिमों की जनसंख्या धीमी गति से बढ़ेगी! अब ख़ुद ही दिमाग़ लगाओ दोस्तों कि हिन्दुओं के मुस्लिमों द्वारा अल्पसंख्यक बना दिये जाने तक भारत की कुल आबादी कितनी होनी पड़ेगी? उत्तर है कि कम से कम 6-7 अरब! अब सोचकर देखो कि उस स्थिति में मुस्लिम हिन्दुओं को क्या दबायेंगे या मारेंगे, हम सब भूखों मर जायेंगे क्योंकि इतनी जनसंख्या के लिए खाना भारत में इस प्लेनेट पर तो पैदा होने से रहा!

जनसंख्या वृद्धि सबसे अधिक ग़रीबी से तय होती है! जो समुदाय जितना ग़रीब, उसमें जनसंख्या वृद्धि दर उतनी ही तेज़! न यकीन हो तो एकसमान ग़रीब मुस्लिमों और हिन्दुओं में से भी उतना ही ग़रीब तबका लेकर सर्वे कर लो! इसलिए व्हाट्सऐप और फेसबुक अफ़वाहों को सच मानने से पहले अपना दिमाग़ लगा लें!

  तारा शंकर की फ़ेसबुक वाल से…..

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