मेक-अप पहले के ज़माने में यह सिर्फ कुछ ही लोगों द्वारा और ख़ास समय में किया जाता था यह लिंग भेद के लिए नहीं बल्कि हैसीयत या रुतबा दिखाने के लिये किया जाता था लेकिन आज कल की ज़िंदगी का मानो यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका हैं ख़ास तौर पे महिलाओं के लिए बिना मेक-अप के तो वह दुकान में भी ना जाये और मेक-अप का महत्वपूर्ण अंश हैं~लिपस्टिक।
एक छोटी सी लिपस्टिक एक महिला के चेहरें में अलग चमक ले आता हैं यह आपको हर महिला के बैग में मिलेगी और क्यों ना हो ख़ूबसूरती का यह एक राज़ जो हैं। रोज़ इस्तेमाल में आने वाली लिपस्टिक का थोड़ा इतिहास जान लें यह 5,000 साल पहल प्राचीन अमेरिका में बनाई और इस्तेमाल में लाई गई। मिस्र के लोग रत्नों को तोड़ और पीस कर होंठो पे लगा कर उसे सजाते थे, सिंधु घाटी सभ्यता की माहिलाए हल्के लाल रंग की लिपस्टिक लगाया करती थीं। जैसा पहले था वैसा आज भी हैं लाल रंग आज भी महिलाओं को बहुत पसंद हैं इसलिए तो लाल रंग की लिपस्टिक आज भी ट्रेन्ड में हैं पार्टी हो, शादी हो, या यूँही कहीं घूमने जाना हो लाल लिपस्टिक हमेशा चेहरें की रौनक बढ़ता हैं वैसे इसकी शुरुआत महारानी एलिजाबेथ-I के ज़माने से हैं लेकिन उस समय मेक-अप केवल उच्च श्रेणी की माहिलाए और पुरुष अभिनेताओं द्वारा किया जाता था।
19वीं सदी में लिपस्टिक को असभ्यता की निशानी माना जाने लगा कहते थे कि यह केवल अभिनेत्रियों और वैश्यों द्वारा उपयोग की जाती थी और उस समय युवतीओं ने इस बात का विरोध किया और लिपस्टिक का उपयोग किया और आज लिपस्टिक के सौ से ज्यादा रंग हैं हर मौके के लिए एक जैसा मन वैसा रंग और अपने कपड़ों से मिलता हुआ रंग भी हैं और कई सारे ब्रांड भी जो 40 से लेकर 4000 तक कि लिपस्टिक आपको दे रहें हैं और इसमें भी आपके पास विकल्प हैं जैसे लिप बाम, ग्लॉस, क्रेयॉन्स, पेन्सिलस और लाइनर।
वैसे एक लिपस्टिक में ताक़त बहुत होती हैं इसलिए तो भोजपुरी झुमका,कान की बाली या कर्ण आभूषण ये सब एक ही हैं जो अच्छा लगें उस नाम से बुलाइए। कान की बाली किसी धातु, प्लास्टिक, क़ीमती पत्थर, लकड़ी, हड्डी और भी कई चीज़ों से बनता हैं। खूबसूरती के लिए मेक-अप ही काफ़ी नहीं गेहने भी जरूरी हैं मेक-अप केवल चेहरे की सुंदरता को निखारता हैं लेकिन गेहने पूरे शरीर को सजाता हैं।
(रेनू तिवारी)

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