तीन तलाक के बाद मोदी जी ने नया मुद्दा महरम को बनाया औऱ यहां तक कह दिया की मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा था लेकिन कोई चर्चा ही नहीं थी.’

अब 26 नवंबर से लेकर 31 दिसम्बर 2017 तक के प्रकरण को समझिए…….

मोदी जी ने 26 नवंबर के ‘मन की बात’ में कहा, ‘हमारी जानकारी में बात आयी कि यदि कोई मुस्लिम महिला, हज यात्रा के लिए जाना चाहती है तो वह महरम या मेल गार्जियन के बिना नहीं जा सकती है. ये भेदभाव क्यों? मैं जब उसकी गहराई में गया तो मैं हैरान हो गया कि आजादी के 70 साल बाद भी ये शर्तें लगाने वाले हम ही लोग थे. दशकों से मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा था लेकिन कोई चर्चा ही नहीं थी.’

और उसके बाद साल के आखरी दिन मोदी जी ने एक और कार्ड खेला

मोदी ने 31 दिसम्बर 2017 को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि उनकी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को हज पर जाने के लिए साथ में महरम (एक पुरुष संरक्षक) होने के कानून को खत्म कर दिया है।

पीएम मोदी ने ये सूचना तो सही दी लेकिन झूठ के साथ। ये नियम भारतीय सरकार का नहीं बल्कि सऊदी अरब का है। सऊदी अरब ने 2014 में ही इस नियम को बदल दिया था और 45 वर्ष से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को महरम के बिना आने की इजाज़त दे दी थी।

ये तो मोदी सरकार की गलती है कि सरकार को अपने यहाँ ये कानून बदलने में तीन साल लग गए। सऊदी अरब में इस कानून में बदलाव होने के बावजूद भी भारतीय मुस्लिम महिलाओं को ये कानून मानना पड़ा क्योंकि केंद्र सरकार ने इसे नहीं बदला था

इसके अलावा पीएम मोदी ने कहा कि ये महरम कानून भारत में ही था और किसी अन्य देश में नहीं है। जबकि सच ये है कि ये कानून सऊदी अरब का था जिसे उसने 2014 में बदला और उससे पहले अमेरिका-ब्रिटेन देश समेत इस कानून को विश्व के सभी देश मानते थे।

 

Khushboo akhtar

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