पहले में यही सोचता था की लोग यहाँ क्यों लिखते हैं किसलिए लिखते हैं फिर थोडा समझ आने लगा और सोचा की ओह्ह लाइक और कमेंट के लिए लिखते हैं फिर में इससे भी आगे बढ़ गया सोशल मीडिया को एक सीखने के माध्यम की तरह देखने लगा.. मैंने कितने पोस्ट लिखे मुझे खुद को याद नही, लेकिन हर पोस्ट लिखने के बाद कुछ न कुछ सीखने को नयी बात मिल जाती है काफी बड़े बड़े लेखक यहाँ लिख रहे हैं जिनको सिर्फ यहाँ लिखकर अपनी पहचान बनाने की ज़रूरत नही है उनको दुनिया पहले से ही जानती है और में उनको छोटे छोटे मुद्दों पर लिखता देखकर प्रेरित होता हूँ उनको गालियां खाते देखकर सोचता था की ये लोग लिखना बंद क्यों नही कर देते जब लोग इतना गालियां देते हीं हैं.. कई बार मैंने अपने लिखे को सही किया और अपनी गलतियां सुधारी और कई बार में अपने मत पर सही साबित हुआ…
फेसबुक पर लगभग मुझे 4 साल हो गए हैं और में लगभग ढाई साल से लिख रहा हूँ और उन्ही सालो के अनुभव से आज एक बात आपसे शेयर करना चाहता हूँ…
में देख रहा हूँ राजनीती जैसे जैसे गर्म हो रही है लेखकों के तेवर भी गर्म हो रहे हैं कोई किसी को गरिया रहा है तो कोई किसी को सराह रहा है लेकिन तारीफ सब सुनना चाहते हैं बुराई सुनना हर किसी के बूते की बात नही है मैंने कई ऐसे मुस्लिम लेखकों की प्रोफाइल देखी है जिसमे केवल मुस्लिम ही भरे हुए हैं उनके पोस्ट पर आये लाइक्स को खोलकर देखो तो लगभग 95% से ज्यादा लाइक्स मुस्लिम के ही होते हैं और कमेंट में भी “शानदार, गजब, वाह, जवाब नहीं, उम्दा पोस्ट” के अलावा कीच होता ही नही…. और यही हाल हिंदुओं का भी है उनके लाइक्स का भी यही हाल है और कमेंट में भी “जय श्री राम” से ज्यादा कुछ दिखाई नही देता… अपनी अपनी सेना बनाये हुए हैं…
इससे किस तरह से तुम अपना मानसिक विकास कर रहे हो ऐसी पोस्ट और स्टेटस का क्या फायदा जब तुम्हारे खिलाफ ही कोई बोलने वाला न हो?? ऐसे लिखने का क्या फायदा जिससे तुम्हारे अपने सहमत होकर वाह वाही करें और जो बाकी विरोध करने वालो को तुम अपने लिखे से दूर रखो..?? यकीन करो ऐसे लिखने का कोई फायदा नहीं है जिसमे विरोधियों की भूमिका न हो.. कुँए के मेंढक की तरह ही दुनिया लगेगी इससे सोचने का दायरा कुँए की तरह हो जाएगा.. मल्टी डायमेंशन सोचने की क्षमता ख़त्म होती चली जायेगी और एक वक़्त ऐसा आयेगा जब तुमको अपनी लिखी गाली भी अच्छी लगेगी क्योंकि उसका विरोध करने वाला ही कोई नहीं बचेगा…
अपनी फ्रेंड लिस्ट में सबको जगह दीजिये, सबको जोड़िये, सबको मौका दीजिये फिर देखिये विरोध झेलने के बाद तुममे कितने सकारात्मक बदलाव आएंगे.. ऐसा करके देखिये इससे आपसी मोहब्बत और इंसानियत बाकी रहेगी, सब एक दूसरे के करीब रहेंगे, एक दूसरे के विचारो को समझेंगे जिससे हमारा मानसिक विकास होगा….

इमरान

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