लेकिन क्या सरकार ये बताने को तैयार है कि ये जो सात सौ करोड़ का आँकड़ा बार बार सोशल मीडिया पर घूम रहा है,इसको कब कैसे और कहाँ मुसलमानो की शिक्षा पर या रोजगार पर खर्च होगा??

आँकड़े बाजियों से बाहर निकल कर देखा जाये तो सबसे पहले हज सब्सिडी खत्म करने के साथ ही सिर्फ एयर इंडिया हज करने की बाध्यता भी समाप्त कर देनी चाहिए ,पर लगता है सरकार की नीयत सिर्फ प्रतीकात्मक सब्सिडी को खत्म कर वाह वाही बटोरने भर की है,अगर ऐसा नहीं है तो जब भी सब्सिडी खत्म करने का ऑफीशियल अनाउसमेंट होगा उसके साथ ही सिर्फ एयर इंडिया से हज करने की बाध्यता को भी खत्म करने का ऐलान हो दायेगा और ये होना भी चाहिए,क्योंकी पैसा देकर अच्छी सेवा खरीदने की आजादी हर एक ग्रहाक को होनी ही चाहिए ।

इसमे ये भी ध्यान रहे की पार्लियमेंट हाउस में बोलते हुये “ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहीदुल मुस्लमीन” के सदर असदउद्दीन ओवैसी ये माँग काफी पहले उठा चुके हैं उन्होने हज सब्सिडी खत्म कर इसमें खर्च होने वाले पैसे को (जोकि आच 700 करोड़ बताया जा रहा ) मुसलमानो की शिक्षा पर खर्च करने की सलाह भी सरकार को दी थी जिससे मुसलमान इस देश के विकास में बराबर का योगदान दे सकें ।

अभी हाल ही में मुख्तार अब्बास नकवी भी सब्सिडी के पैसे को मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा पर खर्च करने की बात कह चुके हैं,इनके अलावा भी अलग अलग वक्त पर तमाम मुस्लिम नेताओं से लेकर उलेमा तक हज सब्सिडी को खत्म कर इस पैसे को मुसलमानो की शिक्षा पर खर्च करने की माँग करते रहे हैं ।

सरकार अगर ये फैंसला पूर्णरूप से लागू करती है तो मुस्लिम समुदाय भी इसका दिल खोलकर स्वागत करने को तय्यार है,पर साथ ही वो ये भी माँग कर रहा है कि इस सब्सिडी के पैसे को मुसलमानो को की शिक्षा पर खर्च किया जाये,और सिर्फ एयर इंडिया से हज करने की बाध्यता को भी समाप्त किया जाये ।

सय्यद असलम अहमद

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