आज सरकार भारत को डिजिटल इंडिया के रूप में व्यक्त करती है । देश मे उद्योग ओर कंप्यूटर प्रणाली के विकास से केवल देश को ऊपरी तौर पर तो विकसित माना जा सकता है लेकिन जब तक अंदरूनी कमियां दूर नही होगी। तब तक देश को पूर्ण रूप से विकसित नही कहा जा सकता है । आज भी भारत मे कई लाख लोग ऐसे है जिनके पास रहने के लिए घर नही है और एक जुमले के अनुसार इंसान की मूलभूत आवश्यकताए अर्थात रोटी ,कपड़ा और मकान भी उसे मुहय्या नही हो पा रही है |

ये सभी जानते है की अगर इन्ही में से एक चीज भी न हो तो जिंदगी की कल्पना करना बहुत मुश्किल हो जाता है । वर्तमान समय में बड़ी तादाद में लोग फूटपाथ पर सोते है ओर अपनी पूरी उम्र फुटपाथ पर सोते सोते ही काट देते है। ये आज का एक ऐसा कड़वा सच है कि जिससे अनदेखा नही किया जा सकता है सरकार ने अपनी तरफ से लोगो को मकान उपलब्ध कराने के आवास -निवास योजना भी चलाई ओर काफी लोगो को इसका फायदा मिला लेकिन तब भी फूटपाथ पर जिंदगी बिताने वाले लोगो की संख्या ना के बराबर ही कम हो पाई है ।

इसका कारण है कि बड़े अफसरों द्वारा इसका गलत फायदा उठाना। बीच में पैसे खाने के कारण ओर अधिक लाभ के उद्देश्य से कुछ अधिकारियो द्वारा ये फ्लैट अपने रिश्तेदारों और बड़े बड़े लोगो को बेच दिए जाते है । जिसके कारण ऐसी योजनाए भी असफल हो जाती है और सारा दोष फिर सरकार के ऊपर आ जाता है इसलिए हमारी सरकार को ऐसी योजनाओ को सफल बनाना है तो इस मामले की पूरी तरह से जांच करनी होगी और तब पता चलेगा कि कितने गरीबो को फ्लैट मिला ओर इस योजना का फायदा हुआ इसके प्रति लोगो की जागरूकता भी अति आवयशक है।

क्योकि सरकार जो फ्लैट गरीबो के लिए उपलध कराती है वे लोग चंद रुपयों के लिए अपने फ्लैट बेच देते है और फिर से वे लोग फूटपाथ पर जिंदगी बिताने लगते है इसलिए लोगो का यह फर्ज बनता है कि जिन्हें फ्लैट मिला है वो इन्हें न बेचे ओर उनमे रहे ताकि फूटपाथ पर जिंदगी बिताने वाले लोगो की संख्या कम हो और भारत मे घर मे रहने वाले लोगो की संख्या के आकड़ो में भी सुधार हो सकें, और ये सुधार ही किसी देश को विकसिता की ओर प्रेरित करते है । हमारा भारत तभी विकसित हो पाएगा जब गरीबो की संख्या कम होगी आम आदमी भी अपनी जिंदगी सुखद तरह से जी पाएगा,और सडक पर सोने वालें रहने वाले भारतीयों के बारें में भी हमें सोचना चाहिए और सरकार को सोचना चाहिए |

अखिल सिंघल
दिल्ली विश्विद्यालय

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