(पिछली कहानी)आमिर मनाली में रहता है, उसे ख्वाब में एक खूबसूरत लड़की दिखती है, सुबह जब वो सैर पर जाता है और एक अंजान लड़की को घर ले आता है लेकिन वो ये देख हैरान रह जाता है कि ये वही ख्वाब वाली लड़की थी,उसे देखकर आमिर बेहोश हो जाता है और रात के किसी वक़्त उसे रोते हुए चुप कराता है, जिससे उसकी आँखों का काजल आमिर के रुमाल पर आ जाता है ।बाद में यह सब सिर्फ एक ख्वाब निकलता है ताबीर घर से जा चुकी होती है, आमिर उदास हो जाता है लेकिन जब वो रुमाल जेब से निकालता है तो देखता है कि रूमाल पर काजल के दाग़ सच में होते है
और अब आगे….

आमिर को परेशान देख कर टाइगर भी परेशान हो गया।’वेसे हुआ क्या है कुछ बताएगा भी?’
जेसे तैसे आमिर ने उसे पूरी बात बताई जिसे सुनकर टाइगर भी डिस्टर्ब हो गया ,आखिर ख्वाब का इंसिडेंट हकीकत में कैसे तब्दील हो सकता है? लेकिन वो आमिर को बचपन से जानता था वो कोई बेवकूफ या वहम में घिरा लड़का नही था बल्कि बहुत intelligent और sensitive था।उसका मिज़ाज और इसकी काबिलियत पर शक की गुंजाइश नही थी।
लेकिन अब इस मसले का सोल्युशन भी क्या हो सकता था।

उसने आमिर से लाख कहा कि इस ख्वाब वाले इंसिडेंट को भूल जाए लेकिन वो था कि अपना ध्यान नही बंटा पा रहा था।2 दिन बाद आमिर की फैमिली आने वाली थी।अम्मी,उसकी बहन निगार और एक छोटा भाई।दोनों ने मिलकर फॅमिली के लिए कुछ ज़रूरी शॉपिंग की और फिर अपनी वर्कशॉप पर बिज़ी हो गएं।

सैटरडे आया और अम्मी की आमद के साथ ही घर में रौनक चहल पहल बढ़ गई।नए नए खाने बनते ,दोनों वर्कशॉप से जल्दी ही घर भी आ जाते थे। वैसे तो ताबीर का कोई ज़िक्र उसने अम्मी से नही किया था मगर फिर भी वो आमिर की ख़ामोशी से समझ रही थी कि ज़रूर कोई ऐसी बात है जो उनसे छुपाई जा रही है।

‘ अच्छा आजकल तुम चुप चुप रहते हो कुछ हुआ है क्या’ अम्मी ने नाश्ते पर पूछा
‘हां जी हुआ है ना, शहज़ादे साहब को मोहब्बत हुई है ।एक हुस्न की मलिका से’ टाइगर सेब काटते हुए बोला।

‘सच भाई!बताओ न कौन है?’
निगार ने जल्दी से आँखें फेला कर पूछा।
‘किसकी बातो में आ रही है, तुझे पता नही क्या टाइगर की नेचर का?’

आमिर ने बात को टाला और आँखों ही आँखों में उसे डराया।लेकिन वो लीचड़ था,पूरी कोशिश में था कि अम्मी इस केस की खोजबीन करें।कुछ न कुछ चढ़ाता उतारता रहा।और बदले में वर्कशॉप के रस्ते में आमिर से पिटता रहा।

‘ भाई देख या तो तू उस dreamgirl को भूल जा या मुझसे रहम की तवक़्क़ो मत रख ।यार !मै तुझे इस तरह उदास नही देख सकता,सब अम्मी और निगार को बता कर समझा कर ही दम लूंगा ।’
‘और मै तेरा गला दबा कर दम लूंगा’ आमिर ने उसे गर्दन से थाम लिया
‘अच्छा छोड़ ना’ वो छटपटा रहा था।
‘तो खा क़सम,अब मुझे नही सताएगा।’ उसने थोडा ज़ोर और डाला।

‘क़सम क़सम क़सम यार …
‘ह्म्म्म्म ….आमिर ने उसे छोड़ दिया
‘यार तूने मुझे छोड़ दिया पूरी बात तो सुन लेता …. वो सीना तान कर खड़ा हो गया और अपने सर पर हाथ रख कर बोला ‘क़सम है मुझे कि अम्मी को तेरे हर राज़ से आगाह करूँगा अगर…..

आमिर ने उसे घूरा ‘ क्या अगर????
‘अगर तूने …ये मायूसी ….ना छोड़ी……..तो
और आमिर एक बार फिर जल कर रह गया।
इसी तरह कई दिन गुज़र गएं।अम्मी, निगार और समीर( आमिर का छोटा भाई) के साथ में दिन अच्छे गुज़र रहे थे।उस दिन दरवाज़े पर दस्तक हुई , दरवाज़ा खोला तो एक फ़क़ीर खड़ा हुआ था,वो पतला दुबला अजीब से बिहेव वाला कोई बूढ़ा था जो खाना मांग रहा था।आमिर ने निगार से खाने की थाली बनाने को कहा।फकीर ने खाना खाया और चला गया।अगले दिन फिर वही फकीर आया और इसी तरह खाना खाकर चला गया।कई दिन ये सिलसिला चलता रहा।उस दिन फकीर आया तो एक खुराक खाना खुद खाया और एक ख़ुराक पैक करने के लिए कहा
“फकीर बाबा !अभी तक तो खुद खाते हो अब घरवालो के लिए भी……

टाइगर ने मुह बिसूर कर उस पर कमेंट किया
‘बेटा! मेरी बेटी बहुत भूखी है, उसके लिए मांग रहा हूँ।
फकीर ने जवाब दिया।
‘क्या नाम है आपकी बेटी का बाबा!उसे हमारे घर भेज दीजिए थोडा काम में हाथ बटा देगी और हमारी तरफ से जो होगा मदद हम करेंगे।’ अम्मी ने उनसे कहा और खाना पैक करके उनके हाथ में दे दिया।
‘ठीक है बेटा!कल मै अपनी बेटी को लाने की कोशिश करूँगा।’कहकर बाबा जाने लगें लेकिन जाते जाते अपना थैला वहीं भूल गएं आमिर ने थैला उठाया और बाबा के पीछे चला लेकिन वो थैला था या बवाल कितना वज़न था उस थैले में
‘बाबा!आपका थैला, आप ये ….

वहीँ भूल आए आमिर ने उनका थैला वापिस किया ,बाबा ने शफ़क़त (लव)से उसे देखा और बड़ी आसानी से उस थैले को उलटे हाथ में थाम लिया।आमिर जो 70 kg का हट्टा कट्टा नोजवान था उसे ये थैला सम्भालना मुश्किल था और ये पतले दुबले बाबा…. आमिर से रहा न गया ,पूछा….’बाबा इस थैले में क्या है?

बाबा मुस्कुराते हुए उसके पास आए और हल्की सी सर घोषी की ‘दुनिया’
‘क्या????’ आमिर ने अजीब सी नज़रो से उन्हें देखा ‘क…क़ैसी दुनिया?’
बाबा फिर मुस्कुराएं और बोले ‘बेटा!वो दुनिया जो होती भी है और नही भी’ फिर बाबा नही रुके तेज़ क़दमो से नज़रो से ओझल हो गएं
‘क्या हुआ यारा!यहां क्या कर रहा है?टाइगर आमिर के पास आ गया था ‘कुछ नही वो बाबा अजीब सी बाते कर रहें थें।’आमिर ने टाइगर से कहा
‘तुझसे भी ज़्यादा???’ टाइगर ने प्यार से उसके गले में हाथ डाला ‘ चल आजा,कल बाबा अपनी बेटी को लेकर आएँगे तब अपने सारे शक दूर कर लेना।’
उसकी बात पर आमिर कल का इंतज़ार करने लगा
To
be continued…

(झरोखा…..……………….
अगली किस्त में क्या होगा??)
((बाबा !ये दीवार पर ख्वाबनगर क्यों लिखा है?’आमिर ने ये नाम देख कर पूछा
‘ये नाम मेरी बेटी ने लिखा है हमारे घर का नाम ख्वाबनगर ही है। कह कर बाबा ने अपनी बेटी को पुकारा ))

( जारी है )

राहिल फातमा
(कहानीकार)

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