“आपके न्यूज स्टूडियो के बाहर अगर कोई पकौडे बेंचता है तो आप उसे रोजगार मानोगे या नहीं ?” एक टीवी न्यूज चैनल पर इंटरव्यू के बीच प्रधानमंत्री द्वारा कहे गये इन वाक्यों को लेकर जहाँ सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की जमकर आलोचना हो रही है,वहीं कल सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई गयी हैं !

किसी भी निर्माण से जुड़े श्रमुकों के कल्याण की सरकार द्वारा अनदेखी किये जाने से नराज सुप्रीम कोर्ट जस्टिस लोकुर ने ASG मनिंदर सिंह से कहा, “आप निर्माण कर्मियों के कल्याण के लिए कानून का पालन नहीं कर रहे हैं,आप खुलकर सामने क्यों नहीं आते और औपचारिक रूप से ये क्यों नहीं कहते कि हमारे द्वारा दिये आदेशों को कचरे के डब्बे में फेंक रहे हैं तो कृपया और आदेश पारित ना करें”!

सुप्रीम कोर्ट नो केंद्र पर सवाल उठाते हुये कहा कि “1996 के अधिनियम के तहत सेस के रूप में 37,000 करोड़ से ज्यादा रूपये एकत्रित किये गये लेकिन उन्हे श्रमिकों के लाभ के लिए इस्तमाल नहीं किया जा रहा”!जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतरिक्त सॉलिस्टर जरनल (ASG) से कहा “ये पूरी तरह असहाय की स्थिती है यह बिलकुल स्पष्ट है सरकार इस मुद्दे पर बिलकुल गंभीर भी नहीं है,जमीन पर ये हो रहा है आप धन इकठ्ठा करते हैं,लेकिन उन लोगों को नहीं देते जिसके लिए एकत्रित किया गया”!

बेंच ने आगे कहा “इस तरह से यह स्पष्ट है कि बिल्डिंग और अन्य निर्माण कर्मचारी (सेवा नियमन और शर्तों का नियमन) बिलकुल लागू नहीं किया जा सकता है”!
गौर तलब है सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही श्रमिकों के कल्याण के कानूनों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए समाज कल्याण से जुड़े नागरिकों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया था,और सरकार को गैर सरकारी संगठनों से सहायता लेने को कहा था !

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गयी इस कड़ी फटकार पर केंद्र सरकार की क्या प्रतिक्रिया रहती है ये देखने वाली बात होगी,क्योंकी सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई मामलों में केंद्र सरकार के खिलाफ सख्त टिप्पणियाँ करता रहा है,अभी हाल ही में चार जजों की द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CJI पर गंभीर आरोप भी लगाये थे जिस पर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी !

सय्यद असलम अहमद

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