गणतंत्र दिवस की अग्रिम शुभकानायें।

डीपी पर तिरंगा लगा कर देशभक्त होना जितना आसान है उतना ही आसान असल जिन्दगी में भी देशभक्त होना है! बस कुछ एक बातों का ख्याल रखें संविधान की सिर्फ बात ही ना करें संविधान का सम्मान करने वाले नागरिक भी बन सकें इसकी भी कोशिश करें !

किसी का हक ना मारें क्योंकी ये देशभक्ति की सर्वोच्च परिभाषा है हमारे संविधान का मूल यही है कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को भी उसका हक सामान रूप से मिले !

हर व्यक्ती का उतना ही सम्मान करें जितना आप अपने लिए चाहते हैं,कानून तोड़ने वालों को गालियाँ देकर कानून के हिमायती ना बने कानून को उसके दायरे में रहकर सम्मान देने की कोशिश करें !

“ये बहोत गलत है” सिर्फ इतना कह देने से भर से काम नहीं चलेगा “क्या सही होगा” वो भी ढूंढने की कोशिश करनी होगी !

“इंसाफ नहीं मिलता” में सोच कर इसका रोना नहीं रोंये इंसाफ कैसे मिलेगा वो तलाश करें,और सवाल करना बिलकुल भी बंद ना करें सवाल करें लगातार करें पर सवाल की दिशा जरूर निर्धारित रखें !

शिकायतें लाख रही हैं और हैं आगे भी बनी रहेंगी हर शिकायत करने वाला आपका दुश्मन नहीं इतना याद रखें !

शोर का मकसद हमेशा सिर्फ हंगामा खड़ा नहीं होना होता याद रखें “जब दर्द बढ़ता है तब भी बहोत शोर होता है” ये सुनिश्चित कर लें जिसे शोर समझ कर आज आप नकार रहे हैं कल कहीं वही शोर आपके दर्द की वजह ना बन जाये,क्योंकी जो फैसला आज आप किसी के लिए करेंगे कल वही फैसला आपके लिए भी लागू होगा.

सय्यद असलम अहमद

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