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पेट्रोल,डीजल,सी.एन.जी,आदि यह कुछ मात्र ऐसी चीज़े है,जिससे हमारी गाड़िया तो चलती ही है साथ ही महँगाई की गाड़ी भी इनसे चलती है जिससे देश का हर तबका,हर वर्ग तथा हर व्यक्ति अपने-अपने स्तर पर प्रभावित होता है कही न कही हम सब इससे जुड़े हुए है परन्तु हम इसको नज़र अंदाज़ करते रहते हैं पेट्रोल महँगाई बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह कहना के “हम पर तो बाइक,कार, गाड़ी आदि नही है तो हमे क्या फर्क पड़ता है पेट्रोल 1000 रुपये लीटर भी बिके या मुफ्त”। बिल्कुल गलत है क्योंकि पेट्रोल, डीजल आदि के दाम बढ़ने से सब से पहले महँगाई बढ़ती है जिसका सीधा असर मध्य और गरीब वर्ग पर पड़ता है इसके पैसे बढ़ने से ट्रांसपोर्ट महँगा होता है जिसका असर हमारे बाज़ारो पर पड़ता है हमारे बाज़ारो में सारा सामान ट्रैक आदि वाहनों द्वारा ही लाया जाता है जो डीजल,पेट्रोल से ही चलते है जब ट्रांसपोर्ट महँगा होगा तो उसका सीधा असर बाजार की हर एक वस्तु पर पड़ेगा चाहे वो खाने का सामान हो या हमारे दिनचर्या की कोई भी वस्तु हो सब महँगी होगी।

आज पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छू रहे है 72.49 रुपए प्रति लीटर दिल्ली में है जो और राज्यों से सस्ता है वही डीजल 63.53 प्रति लीटर है। इनके दाम इतनी तेजी से बढ़ रहे है और हमे पता भी नही चल पता। क्योंकि ये रोज़-रोज़ पेट्रोल मे 2-4 पैसे बड़ा-बड़ा कर पूरा 1.50 रुपए बड़ा देते है। वही बात अगर डीजल की करे तो उसमें भी 61.88 से 63.53 कर दिये है यह सिर्फ 10 दिन में हुए है उससे पहले भी पेट्रोल के पैसे बड़ाये गए थे। जिसके बाद लगा था कि अब पेट्रोल 70 पर आकर रुक जाएगा परन्तु ऐसा नही हुआ और ये रोज़-रोज़ 2-4 पैसे कर-कर के बढ़ते ही जा रहे है।

पहले मेट्रो के दाम बढ़े,और अब पेट्रोल भी 72.49 है कल को ये 100 भी हो जायगा तो भी हम चुप-चाप सरकार को देखते रहेंगे। क्योंकि हमारे लिए पदमावत बड़ा मुद्दा है। जिसके लिए हमे सड़को पर आना चाहिए उसके लिए हम सोच भी नही रहे। महँगाई रुकने का नाम नही ले रही है पर हम और हमारी सरकार से लेकर बाकी सभी लोग इस पर ध्यान न देकर पदमावत जैसे मुद्दों में हद से ज्यादा व्यस्त है। जब कि बेरोज़गारी, महँगाई जैसे बड़े मुद्दे इस वजह से पीछे छूट रहे है हमे इस सब से निकलकर अब अपने असली अधिकारो और असली मुद्दों के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।

सैफ अली

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