बहुसांस्कृतिक भारत आज अपना 69वा गणतंत्र दिवस मना रहा है, वह दिन जिस दिन ने ये साबित कर दिया था कि इस देश मे किस तरह का प्रशासन रहेगा , किस तरह से देश को अखण्डता से बचाया जाएगा , किस तरह प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार दिया जायेगा, किस तरह सभी धर्मों को यहां समानता का अधिकार प्राप्त रहेगा,किस तरह यहां मौलिक अधिकारों का उपयोग किया जाएगा,अपराध के लिए क्या प्रावधान है,सामप्रदायिकता फैलाने को अग्रसर लोगो के लिए क्या प्रावधान है ,जो ये बताता है कि देश की शीर्ष न्यायालय के आगे कोई बड़ा नही है ।

देश को असल रूप से संगठित करने, एक धागे में पिरोने ,समृद्धि प्रदान करने,का दिन आज ही है ,क्योंकि आज हमारा गणतंत्र दिवस है । आज ही कि दिन भारतीय संविधान लागू हुआ और पूरे भारतवर्ष उसके आदर्शो पर चलने को तैयार हुआ ।
संविधान ये बताता है कि ये देश जनता द्वारा चलता है ,जनता के लिए चलता है । हर देश के लिए ये दिवस बड़ा मौका होता है एक पर्व होता है । परन्तु वास्तव में ये सब बातें केवल बाते नजर आ रही है ।

जिस तरह से लगातार देश मे धार्मिक विचारों को लेकर धर्मो को लेकर साम्प्रादायिक माहौल पैदा किया जा रहा है , आहतपूर्ण कटाक्ष किये जा रहे है , भावनाओ में भिन्नता पैदा की जा रहा है ये संविधान ,समाज पर बड़ा सवालिया निशान बना रही है । परंतु उस पर कोई कार्यवाही नही है ,कि इस तरह का साम्प्रदायिक माहौल बन रहा है क्यों शक की बिनाह पर अनेको बेगुनाहों को मौत कद घाट उतारा गया। क्यों?

लोकतंत्र के सबसे बड़े खम्बे न्यायालय ( संविधान का आयना, एक बड़ा और मजबूत पक्ष ) जिसके ऊपर देश मे कुछ नही है । मगर आज वर्तमान समय मे न्यायालय के आदेश आदेश नही लगते क्यों वो यू कि देश की सबसे बड़ी संस्था की अवहेलना खुले तौर पर की जाती है तो ये शर्मनाक है ,दुखद है , चूकि धार्मिक सम्बन्धी मसलो पर रीत के तौर पर इतिहास के तौर खुलेआम अवहेलना की जा रही है । जिस तरह आप देखते आये है ,और आज भी चुप्पी साधे देख रहे है ।

पद्मावत को बैन करने के खिलाफ आ चुके सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वर्तमान में खुले तौर पर अवहेलना हो रही है। खुद सुप्रीम कोर्ट को मध्यप्रदेश, राजस्थान सरकार के खिलाफ आदेश की अवहेलना के चलते याचिका दायर करनी पड़ी है । खुलेआम करणी सेना गुंडागर्दी कर रही है । जिस पर अब तक केंद्रीय गृह मंत्रालय का कोई भी आधिकारिक बयान नही आया ।

वक्त की निस्बत पर गौर करे तो मौका गणतंत्र दिवस का है ,जिसके लिए कई अंतरराष्ट्रीय मेहमान आये हुए है और आज ही प्रधान मंत्री ने आसियान देशो के साथ बैठक की है, देश की सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिकता के प्रदर्शन का मौका है पर इस सबके साथ हमारा देश कुछ और भी प्रदर्शित करेगा कि किस तरह हम गणतंत्र दिवस होने के बावजूद , खुलेआम संविधान की धज्जियां उड़ायांगे ओर न्यायालय की छवि ,आदेश को धूमिल करेंगे,ये भी सोचने का विषय है।

तमाम विदेशी नेताओं की नजरों में हम अपने देश की क्या छवि बनाएंगे, क्या बना रहे है,कैसे बना रहे है,ये सोचने की बात है,सोचने का वक़्त है।

अयूब अली
डॉ.भीम राव अम्बेडकर कॉलेज

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