18 अप्रैल 1900 को पटना ज़िला के नेउरा गांव में जन्मे सैयद जाफ़र इमाम पटना हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस रह चुके हैं। सैयद जाफ़र इमाम के वालिद का नाम सर अली इमाम था और उनके चाचा सैयद हसन ईमाम थे जो महान स्वातंत्रता सेनानी से साथ एक महान वकील थे।

अपने पिता और चाचा की तरह सैयद जाफ़र इमाम उच्च शिक्षा हासिल करने ब्रिटेन गए. शुरुआती पढ़ाई आक्सफ़ोर्ड में की, फिर ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज युनिवर्सटी में दाख़िला लिया जहां से 1921 में बी.ए. और 1922 में एल.एल.बी की डिग्री हासिल की। फिर 26 जनवरी 1922 को मिडिल टेंपल में शामिल हो गए।

1922 में वो बैरिस्टर बनकर बिहार लौटे और 22 साल की उमर में पटना हाईकोर्ट में वकालत की शुरुआत मार्च 1922 मे की, जहां वो क्रिमनल लॉयर के तौर पर मशहुर हुए। 32 साल के उमर में उन्हे सहायक सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होने 1932 से 1939 तक अपनी सेवाएं दी। 1942 में इन्हे बिहार एैडवोकेट जेनेरल बना दिया गया, 1943 तक इस पद पर रहे। 1943 में 43 साल की उम्र में पटना हाईकोर्ट के जस्टिस बने और 1953 तक वे इस पद रहे, इसी दौरान उन्होंने भारतीय संविधान सभा में प्रतिनिधित्व किया, और संविधान बनाने में अपना महत्वपुर्ण सुझाव दिया।

फिर 3 सितम्बर 1953 को उन्हें पटना हाईकोर्ट का चीफ़ जस्टिस बना दिया गया, जहां इस पद पर वो 9 जनवरी 1955 तक रहे। ज्ञात रहे के सैयद जाफ़र इमाम पटना हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस बनने वाले पहले भारतीय थे। 10 जनवरी 1955 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस बनाया गया जहां वो इस पद पर 31 जनवरी 1964 तक रहे। 1955 में मात्र 55 साल की उम्र में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बनने वाले वो पहले व्यक्ति थे। सुप्रीम कोर्ट के सबसे कम उम्र के जस्टिस के साथ वो उस समय हिन्दुस्तान के सबसे सिनीयर मुस्लिम जस्टिस थे। साथ ही वो 20वीं सदी में पैदा हुए पहले व्यक्ति थे जो सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बने।

1964 में रिटायर होने के बाद सैयद जाफ़र इमाम पटना लौट आए, जीवन भर बांकीपुर कलब पटना के सदस्य रहे और 30 नवम्बर 1965 को 65 साल की उम्र में इंतक़ाल कर गए।

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