तिरंगे को हथियार (“भरसे ” कुल्हाड़ी जैसा बड़ा हथियार ) में बांध कर तिरंगा यात्रा निकालने का क्या मतलब है ? यात्रा आपने निकाली बहुत अच्छा है , आप देशभक्त है,बड़े देश भक्त है ,आप जैसा राष्ट्रवादी है ही नही यहां, सबको अपने देश से प्यार है और बेशक होना चहिये ।

लेकिन सवाल यह निकलता है कि इस तरह की यात्राएं इस संवेदनशील वक्त में ज्यादा निकालने से आप क्या साबित कर रहे है? आप राष्ट्र के लिए यात्रा निकाल रहे है? अपना राष्ट्रप्रेम जाहिर कर रहे है? क्या कर रहें है? उसमें धार्मिक नारो की जरूरत क्यों है?उस पर ज्यादा जोर की आवाज निकालने से आप क्या साबित कर रहे है? बता सकतें है आप?

दूसरी बात इस संवेदनशील वक्त में आपने हमें मोहरा बना रहे है ,धर्म के नाम पर पूरा समाज आंखों पर पट्टी बांध कर बस बहता जा रहा है, घोर विरोध हो रहा है , एक दूसरे को नजरो में भी नही ला रहे है ,धार्मिकता का खुमार इस तरह भरा जा रहा है आप एक जगह में भी ठीक से नही बैठ पाते है क्या ये भारतीयता है?

संयोग से ये घटनाये राजनीति का भद्दापन कहलाने में कोई कसर नही छोड़ पाई है,तीसरी बात ये राष्ट्रप्रेम ओर “भक्ति” कहा आयी है? समझ मे आता है पर समय विशेष पर इसकी महत्ता में वृद्धि खुद ब खुद कैसे होने लगती है ये बड़ा सवाल है ? आप इस तरह से ही भारत को निर्मित करना चाहते है ? तिरंगे की आड़ लेकर ही आप चुनाव में रहना चाहते है ? अगर हां तो ये भारतीय इतिहास की सबसे भद्दी राजनीति होगी,और इसकी मिसाल हम खुद बनेंगे।

इस सब से भारत आगे नही बढ़ेगा, उसके चौमुखी विदेशी सम्बन्धो से भी वो आगे नही बढ़ेगा,जब तक खुद भारत आंतरिक रूप से संगठित नही होगा ,तो कौन से विकास की संकल्पना आप कर रहें है? आंतरिक रूप से आपस मे लड़ मरने वालों लोगों को क्या आप “विश्वगुरु” देखते है? क्या इस हालात में मौजूद भारत के विकास के लिए आप तत्पर है?

इस तरह के विकास की आवश्यकता नही है, विकास करना है तो देश की अखण्डता को बचाइए,वैचारिक मतभेदों को कम करने की जरूरत है,किसानों को उनकी फसलो का असल दाम देकर उनका विकास कर उन्हें आत्मनिर्भरता बनाकर भारत को आगे बढ़ा सकते है । उनका कर्ज माफ कर अन्नदाताओ को समृद्धि की जा सकती है ,लाखो करोड़ो की संख्या में रोजगार की तलाश में भटक रहे युवा को रोजगार देकर भारत बनेगा और चमकेगा भी ।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार कर भारत में विकास होगा उन लाखो बेरोजगार युवाओ को रोजगार देने से भारत का विकास होगा जो उच्च स्तर की पढ़ाई प्राप्त करने के बावजूद अपने आप को उस तरह और उस जगह नही देख पा रहे है । विकास की असल जरूरत यहां है,ये नई सोच ,नई शक्ति, सेवा में आएगी तो विकास खुद दिखेगा,ये हवाई कथनों से आंकड़ो से कुछ नही होगा,देश देशवासियों की लगन और उनके विकास से आगे बढ़ेगा।

अय्यूब अली

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