(पिछली कहानी)
आमिर मनाली में रहता है, उसे ख्वाब में एक खूबसूरत लड़की दिखती है, सुबह जब वो सैर पर जाता है और एक अंजान लड़की को घर ले आता है लेकिन वो ये देख हैरान रह जाता है कि ये वही ख्वाब वाली लड़की थी,उसे देखकर आमिर बेहोश हो जाता है और रात के किसी वक़्त उसे रोते हुए चुप कराता है, जिससे उसकी आँखों का काजल आमिर के रुमाल पर आ जाता है ।बाद में यह सब एक ख्वाब निकलता है लेकिन रूमाल पर काजल के दाग़ सच में होते है इससे आमिर हैरानी में पड़ जाता है ।ये बात सुनकर टाइगर भी हैरान हो जाता है, जल्द ही आमिर की फैमली उसके पास रहने आ जाती है एक दिन एक फकीर उनके घर खाना मांगने आता है और अपनी बेटी को उनके घर मेड रखने की बात करता है ,अगले दिन आमिर और टाइगर को बाबा अपने घर ले जाते हैं जहां घर के दीवार पर वो लिखा देखते है “””””ख्वाबनगर””””।बाबा की बेटी आमिर के ख्वाबो की मलिका यानि ताबीर ही होती है।

बाबा ताबीर को उनके साथ उनके घर भेज देते है’ बात ही बात में ताबीर निगार को बताती है कि कोई है जो ताबीर से मोहब्बत करता है, इस बात का पता लगाने के लिए की वो लड़का कौन है जो उसे प्यार करता है,आमिर रात को ताबीर के कमरे में जाता है और ताबीर वहां उससे बताती है कि जिससे वो मोहब्बत करती ह वो कोई और नही बल्कि खुद आमिर है लेकिन वो आमिर को सिर्फ ख्वाब में मिल सकती है क्योंकि ताबीर कोई सचमुच की लड़की नही बल्कि एक ख्वाब है जो मोहब्बत की कशिश से इस दुनिया में आमिर के लिए भेजी गई है ये सुनकर आमिर चीखने लगता है
और अब आगे….

क्या हुआ आमिर?’ अम्मी ने घबरा कर पूछा….लेकिन बिना जवाब दिए आमिर घर से बाहर चला गया। ‘मै देखता हूं अम्मी आप फ़िक्र मत करें। ‘ टाइगर ने अम्मी से कहा और आमिर के पीछे भागा
‘मेरा पीछा मत कर’
आमिर उसकी आहट पर पलट कर बोला
‘क्यों दोस्त नही हूं तेरा? और बार बार ये सब ड्रामा करके साबित क्या करना चाहता है तूं? अम्मी,निगार किसी की परवाह नही तुझे?’
‘मैने किसी को कुछ तो नही कहा…..
‘हां तू कुछ कहता भी कब है और जीना हराम भी रखता है हमारा… आज टाइगर को झल्लाहट हो रही थी ,दिल चाहता था आमिर को दो चार रसीद कर दे
या उस …उस ताबीर की बच्ची को घर से भगा दे अभी ऐसा कुछ सोचा ही था कि खुद ताबीर ही वहां आ गई जिसे देखकर आमिर न चाहते हुए भी नॉर्मल हो गया
‘तुमने कुछ कहा इसे?’टाइगर ने आव देखा न ताव सीधे सवाल पूछने लगा।

‘कहा भी हो तो?’ ताबीर भी कम न थी
‘तो ये देवी जी कि हम सीधे साधे लोग हैं ये उलझने समझने के क़ाबिल नही हैं, आप इसको न सताए तो हम भी चैन की ज़िन्दगी जिएंगे और आप भी।’
‘ज़िंदगी ….मेरी तो कोई ज़िंदगी ही नही ।’ उसने मासूमियत से टाइगर को देखा और उसके इस जवाब पर एक बार फिर आमिर ने अपना सर पकड़ लिया इससे पहले वो आगे कुछ बोलती वो उसे हाथ से पकड़ कर अपने साथ ले जाने लगा ‘ तू….तू चल घर पर मै आता हूं, और ताबीर भी मेरे साथ ही आएगी।’
टाइगर उसे हक्का बक्का देख रहा था कितने हौसले बढ़ गएं थे उसके जो यूं टाइगर को खुद से अलग करके फैसले लेने लगा था वो,टाइगर उसे घूरता हुआ वहां से चला गया।
आमिर उसे नहर के पास ले आया था,यहाँ सकून था ,वो ताबीर से तसल्ली से बात कर सकता था।
ताबीर उससे हाथ छुड़ा कर एक पत्थर के पास खड़ी हो गई ,कुछ मिनट गुज़रे तो आमिर ने बोलना शुरू किया।

‘क्या तुम्हे पूरा ख्वाब याद है जो मैने रात को देखा ।’ और उसका डर सामने आ गया क्योंकि उसके सवाल पर ताबीर ने फ़ौरन हां में सर हिला दिया।
‘उफ़्फ़…. मै आखिर क्या समझूँ तुम्हे? तुम्हे पता है तुमने मुझे किस कशमकश में डाल दिया है’ उसने ताबीर को घूरने की नाकाम कोशिश की । फिर नहर में पत्थर फैंकने लगा ,खामोश फ़िज़ा में पानी का हल्का साज़ गूंजने लगा था।
‘मेरा इस दुनिया में कोई नही है तुम्हारे सिवा।’ ताबीर ने उसे देखे बिना कहा ,उसके लफ़्ज़ों पर आमिर ने बेक़रार होकर उसे देखा,वो खफा लग रही थी
‘मै साथ ……. हूं तुम्हारे’ आमिर ने हिचकिचा कर कहा
‘अगर तुम चाहो तो अपने बाबा के घर वापिस जा सकती हो,कोई तुम्हे नही रोकेगा।’
‘मै जाउंगी तो हमेशा के लिए फिर कभी आप मुझसे मिलेंगे ये सोचना भी मत।’ ताबीर के लहजे में सच्चाई साफ़ ज़ाहिर थी ।आमिर कुछ देर यूँ ही खामोश रहा ताबीर ने चुपके से हाथ में थोड़ा सा पानी भरा और आमिर के चेहरे पर फेंका उसने पलट कर देखा ये शरारत करते हुए वो कितनी दिलकश लग रही थी ‘सुनो…. फिर वो आमिर के पास आकर आहिस्ता से बोली ‘प्यार,मोहब्बत,इश्क़ ये सब डरने की चीज़ नही है ये तो ज़िन्दगी है
‘कैसे?’ आमिर ने पूछा
‘ ऐसे कि मेरे साथ गुज़ारे इन लम्हों से ज़्यादा तुम किसी लम्हे को कभी जी ही नही पाओगे , उसकी इस अदा पर आमिर ने माथे में बल डालते हुए तारीफी अंदाज़ में उसकी तरफ देखा
‘तुम्हारा मतलब है कि हम साथ ये लम्हे जिएं… उसकी बात पर ताबीर ने शोख निगाह से उसकी तरफ देखा

“फ़क़त निगाह से होता है फैसला दिल का
न हो निगाह में शोखी तो दिलबरी क्या है”

और उसकी इस शोख अंदाज़ पर आमिर सारा मायाजाल भूल गया और ताबीर की तरफ कंसन्ट्रेट हो गया ।ताबीर ने जवाब के रूप में एक बार फिर पानी की छींटे उसके ऊपर डालीं इस बार आमिर हंसे बिना नही रह सका
‘अब बस करो ,मै शुरू हो गया तो फिर मुश्किल हो जाएगी ‘उसने शर्ट पर गिरा पानी साफ करते हुए कहा,सर्द मौसम अचानक और सर्द हो गया था,काले बादल घिर कर आएं थे आमिर को इन बादलो की खूब ख़बर थी ये जब भी आते बारिश जम कर बरसती थी।

‘आमिर…..ताबीर ‘ टाइगर कुछ दूरी पर ऊँचाई से पुकार रहा था ‘घर आओ अम्मी ने बुलाया है ,मौसम खराब है देख रहे होना।,
‘हां हम आते हैं….. आमिर ने भी ज़ोर से जवाब दिया ‘ चलो’ उसने ताबीर से कहा जो अचानक वहां से ग़ायब हो गई थी उसने देखा टाइगर भी चला गया था इस खराब मौसम में ये ताबीर अचानक कहां चली गई थी अभी तो यहीं थी वो
‘ताबीर…..
‘ताबीर……
उसने ताबीर को आवाज़ देना शुरू की लेकिन कोई जवाब नही, उसने आगे जाकर देखना बेहतर समझा और नहर के किनारे किनारे आगे बढ़ने लगा, बादल पहले से ज़्यादा गहरे हो गएं थे ,ऐसे में वो कहां जा सकती थी ,नहर से आगे तो छोटी मोटी पहाड़िया शुरू हो जाती थी ,इस सुनसान मन्ज़र में तेज़ बारिश में रहना भी ठीक नही था उसको फ़िक्र होने लगी
आखिर ताबीर कहां गई होगी? वो लगातार ताबीर को पुकार रहा था छोटी छोटी बूंदों ने तेज़ बारिश की शक्ल ले ली थी बादलों की गूंज थी जो बहुत डरावनी थी सर्द तरीन मौसम में बुरी तरह भीगा हुआ वो ताबीर ताबीर पुकार रहा था तभी पीछे से किसी ने हाथ रखा ,उसने मुड़ कर देखा टाइगर का भी वो ही हाल था सर से पैर तक भीगता कांपता
‘कहां है वो?’ टाइगर ने पूछा
‘कुछ पता नही ,कुछ देर पहल तक मेरे साथ ही थी ,बिल्कुल मेरे पास थी लेकिन अचानक
‘ बात तो परेशानी की है, ये सर्द बारिश और ये जगह … तू यही देख मै उस तरफ जाता हूं , टाइगर को भी फ़िक्र हो गई थी वो पिछली तरफ गया जहां कुछ दूरी पर उनकी वर्कशॉप भी थी ,दोनों अलग अलग ताबीर को तलाश रहें रहे जबकि आमिर का फ़ोन लगातार बज रहा था ,अम्मी की काल थी लेकिन सिग्नल प्रॉब्लम की वजह से बात नही हो पाई थी उसने फ़ोन को जेब के बजाए शर्ट के अंदर डाला और जैकेट चैन को ऊपर तक बन्द करके आगे बढ़ गया ,यहाँ से छोटी मोटी पत्थर और पहाड़ियों का सफर शुरू होता था ये एक दूसरे से जुडी हुई थीं कुछ पहाड़ियों से बड़े बड़े दरख्त (tree) निकले थे जहां छुप कर बारिश से बचना काफी आसान था।हो सकता था कि ताबीर ऐसी किसी पहाड़ी की ओट में छुपी हो आमिर की ये उमीद सही निकली आमिर ने कड़कती बिजली की रोशनी में उसे देखा वो पास ही के दरख्तो के एक झुंड के क़रीब सहमी हुई खड़ी थी ,कुछ कपड़े भीगे थे कुछ महफूज़ थें ‘तुम यहां कैसे पहुंची?’ आमिर ने हैरत से उसे देखा,डांटा और दिल ही दिल में खुश हो गया वो बनावट से मुस्कुराई ताकि आमिर को टेक इट इजी फील करा सके लेकिन इतनी अच्छी आर्टिस्ट भी नही थी।

‘परीशान कर दिया तुमने?’ एकटक उसे देख रहा था और बोल रहा था ‘यहां पहुंची कैसे?’
ताबीर चुप रही कभी उसे देखती तो कभी नज़रे झुका लेती जैसे उसकी आँखें कह रही हो कि
“रूठना है ज़रूरी तो रूठो मगर
बाद में मान जाने का वादा करो”
उसकी ख़ामोशी ही उसकी ग़लती का एतराफ़ ( confess) थी आमिर चमकती गरजती बिजली की रौशनी में उसके जलते बुझते चेहरे को देखता रहा और खुद ब खुद उसके भोलेपन पर मुस्कुराने लगा
‘अच्छा चलो कोई बात नही ,आओ घर चलें , ताबीर ने इस पर भी कोई रिएक्शन नही किया ‘मै नाराज़ नही हूं आओ चलें ‘ ……..नो रिएक्शन अगेन…..झर झर बहता पानी ,चारो तरफ बिजली और बादल और संगमरमर की ये खामोश मूरत ,जो अब पता नही क्या चाहती थी ।

‘हम घर नही जाएंगे,हम बारिश में ही रहेंगे’
उसकी बात पर आमिर की हंसी छूट गई
‘तुम पागल तो नही हो?’
‘तुम मुझे प्यार करते हो ?’ उसने सवाल के बदले सवाल पूछा
‘इसका क्या मतलब,आओ घर चले’ आमिर ने इग्नोर किया।

‘करते हो?’ फिर वही सवाल
आमिर ने हां में गर्दन हिलाई।
कुछ अलग कुछ अजीब सी थी वो ,माथे पर पानी की कुछ साफ बूंदे ,आँखों में ख्वाबनगर का काजल …मोहब्बत भी कैसे कैसे दिन दिखाती है उसके कहने पर आमिर ने घर जाना कैन्सल कर दिया बिना ये सोचे की अम्मी कितनी परेशान होंगी और बेचारा टाइगर…….?? काफी सारा वक़्त यूं ही बीत गया, रात अपने शबाब पर थी,बारिश अब कमज़ोर पड़ गई थी ,दूर नहर में गिरती बूंदे मोतियो की लड़ियां लग रही थी ।

‘अच्छा बताओ तुम इस बारिश में इस सर्द मौसम में रुकी क्यों हो?’ दोनों ही थक कर नीचे बैठ गएं थें और आमिर ने बात शुरू की
‘मेने कभी असली बारिश को नही देखा,सिर्फ खवाबो की बारिश को देखा है वो हमें भिगोती है मगर फिर भीं नही भिगोती आज जब असली बारिश देखी तो इसे जीने का दिल चाहा ।उसकी बात पर आमिर ने उसका हाथ थामा और उसे लेकर खुले में आ गया जहाँ किसी पेड़ की पत्ती का आसरा नही था,नर्म, नाज़ुक बूंदे उन्हें भिगो रही थी।
‘अब बताओ,कैसी लगती है ये बारिश?’

अँधेरी रात में वो सिर्फ एक दूसरे को महसूस कर सकते थे और एक दूसरे की झलक के लिए उन्हें बिजली की झिलमिलाहट का इंतज़ार करना पड़ता था
‘बारिश बहुत खूबसूरत चीज़ है, ‘ताबीर ने कहा
‘ नही,बारिश सिर्फ खूबसूरत है , बहुत खूबसूरत तो तुम हो ‘ आमिर ने उसके साथ भीगते हुए जवाब दिया तभी फोन की बेल बजी शायद मौसम कुछ सही होने से सिग्नल आ गए होंगे उसने जैकेट खोली शर्ट में हाथ डाल कर मोबाइल निकाला और स्विच ऑफ़ कर दिया
‘ मै इस हसीं रात को खराब करना नही चाहता ,उसने ताबीर को देखा और इस बार फोन जीन्स की जेब में रख लिया।

दोनों बारिश में भीगे तो खूब थे लेकिन अब सर्दी ने अपना फ़र्ज़ निभाना शुरू कर दिया तो उनकी वापसी दोबारा उन्ही दरख्तो के नीचे हुई जहां सबसे पहले ताबीर छुपी हुई खड़ी थी , शायद ये जंगल की सबसे महफूज़ जगह थी और आज के बाद उनके लिए सबसे यादगार भी। सच है कि दिल में ख़ुशी हो तो काँटों के बिस्तर पर भी नींद आ जाती है ,इस वीरान सुनसान मट्टी पर उन्हें कब नींद आ गई पता ही नही चला ।जब आँख खुली तो ये मन्ज़र रात के मन्ज़र से कही ज़्यादा खौफनाक था जब उन्होंने पाया कि पूरी रात उन्हें तलाश करने की कशमकश के बाद टाइगर गुस्से में सुर्ख आँखे लिए उनके सामने खड़ा था

लेखिका -राहिल फातमा

Rahilfatma98@gmail.com

4 COMMENTS

  1. ख़्वाबनगर वाक़ई ज़हन को ख़्वाबों की रूमानी दुनियां में ले जाती है। एक शानदार अफ़साना,अफ़सानानिग़ार राहिल फ़ातिमा की कलम से।

  2. Khuwab nagar ki kalpana hi itni khoobsurat hain .. Jitna pdhti hu aur pdhne ko jee chahta hain… bhot hi khoobsurti si likhi hai aapne ye kahani … #rahil_fatma ji

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