लोकतांत्रिक देशों की कतार में भारत सबसे बड़ा लोकतांत्रिक ,समृद्ध लोकव्यवस्था, धर्मनिर्पेक्षता, व बहुसांस्कृतिकता को समेटे हुए एक अकेला ही देश है ।
इसी लोकतंत्र को बनाये रखने के लिए चार मजबूत स्तम्भो को निर्मित किया गया ।
1. न्यायपालिका
2. कार्यपालिका
3. विधायका
4. मीडिया

इस चौथे खम्बे को बाकी 3 इकाइयों के काम पर काम निगाह रखने , जनहित की सूचनाये समय पर प्रसारित करने , लोकव्यवस्था निर्माण करने व समाज को एक सूत्र में बांधे रखने के आधार पर रख गया । परन्तु आज इस “कथित प्रगतिशील” समाज मे इसका नया स्वरूप बन चुका है जो आज हर एक व्यक्ति अपने विचार और ज्ञान के आधार पर बताने से नही चूकता है ।

इसकी वजह खुद मीडिया है , जिसने अपने आप को सूचना प्रदान के अलावा व्यवसाय निर्मित करने की आहुति में स्वतः झोंका है , खुद को ओर कार्यक्रमो को बेचने की परंपरा में ढाल लिया है जिसका नकारात्मक पहलू साफ नजर भी आते है ।
आप ये अंदाजा लगा सकते है कि
भारतवर्ष में केवल कथित हिन्दू मुस्लिम मसलो के अलावा भी एक समाज है , पूरा देश है मगर फिर भी आज उस एजेंडे के तहत घोर मानसिकता का लावा दिमाग मे लगातार पलटा जा रहा है । जिससे सम्पूर्ण भारत मे अलग धरोहर पनप गयी है एक दूसरे के धर्म के आधार पर उसका बहिष्कार करने ,उसको कट्टरता के बड़े चश्मे में ढाल कर देखना का मौका इसी मीडिया ने ही दिया है । समाज मे कट्टरता को घोलकर जनता को उसकी मूल आवश्यकताओं से परे रखा जा रहा है जिसका निर्देशन मौजूदा सरकार कर रही है।

मीडिया भी आज अलग विचार और एजेंडे को अपना चुकी है जिसका अपना अपना लक्षित समाज है । जिसमे उस की विचारात्मकता से जुड़ी खबरों का खूब बोलबाला है । खूब प्रमुखता है , ये वैचारिक भिन्नता हो सकती है परन्तु यही वैचारिकता का भाव समाज को खंडित करने की खाई को बड़ा कर रहा है ।
जिसमें बड़ा हाथ निष्पक्ष कही जाने वाली मीडिया का भी है ।
मीडिया निष्पक्ष नही हो सकती है केवल खबर निष्पक्ष हो सकती है परन्तु उस खबर को पढ़ रहे पाठक ,दर्शक को वह खबर निष्पक्ष है या नही यह वह खुद लगा लेते है अपने विचार और ज्ञान के आधार पर या वह विचार वह जनसंचार का माध्यम परोस देता है जिसको उसकी लक्षित जनता पाना चाहती है।

मीडिया की यह बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि सम्वेदनशील स्थितियों में समाज की अखंडता को बनाये रखने, बेबाक व तर्कहीन सूचना को समाज मे फैलाने से बचाने की जैसी बड़ी चीजो का ध्यान रखे ।

हाल ही में इसके उलट देखने को मिला जिसको हिन्दू मुस्लिम विचारधारा को लपेट दिया गया जिससे पूरा मसला बहुत संजीदगी में चल गया ,साथ ही देश मे कट्टरता का माहौल बनाया गया ।

इस तरह की वैचारिकता को यदि इस देश मे रहने दिया जाएगा तो इस देश का विकास मुमकिन नही है । क्योंकि खुद देश आंतरिक रूप से मजबूत नही होगा तो बाह्य विकास को देखना टेडी खीर लगता है ।

अय्यूब मालिक

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here