अभी सुप्रीम कोर्ट में ताजमहल की अधिकारिकता का मुद्दा सुलझा भी नही है कि लाल किले के बिकने की खबर ने सबको सकते में डाल दिया। भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ऐतिहासिक धरोहर को किसी निजी कंपनी को सौंप दिया गया है। सीमेंट बनाने वाली डालमिया भारत ग्रुप कंपनी ने 25 करोड़ की केमात अदा करके ताजमहल को अगले पांच साल के लिए ‘गोद’ ले लिया है।

मुग़ल साम्राज्य के पांचवें बादशाह शाहजहाँ ने अपनी राजाधानी को आगरा से दिल्ली बदलने के बाद लाल किला बनवाया था। ये धरोहर देश की संप्रभुता और एकता का प्रतीक है। स्वंत्रता दिवस के मौके हर साल 15 अगस्त को भारतीय प्रधानमंत्री इसी इमारत की छत से सारे देश को संबोधित करते हैं।
अब ये इमारत सरकार की नहीं रही बल्कि डालमिया ग्रुप की संपत्ति हो गयी है। 9 अप्रैल को डालमिया भारत ग्रुप ने पर्यटन मंत्रालय, संस्‍कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के साथ इस समझौते पर मुहर लगायी थी। नीलामी की प्रक्रिया पूरे होने के बाद डालमिया ग्रुप ने साफ कर दिया है कि वो यहाँ आने वाले हर टूरिस्ट को कस्टमर की तरह ट्रीट करेंगे। डालमिया भारत ग्रुप ने इंडिगो एयरलाइंस और जीएमआर ग्रुप जैसी दिग्‍गज कंपनियों को पछाड़ कर ये सौदा हथियाया है।

मोदी सरकार की ‘अडॉप्‍ट ए हेरिटेज’ नीति के तहत अब ये इमारत अगले पांच साल तक डालमिया ग्रुप की देखरेख में रहेगी। कंपनी का काम होगा कि वो लाल किला को आम जन के बीच और भी लोकप्रिय बनाए। इसके अलावा कंपनी इसकी देख-रेख और साज सज्जा पर भी काम करेगी।
पहले चरण में लाल किले के सामने के हिस्से की लाइटिंग और साफ़-सफाई पर काम किया जाएगा, जोकि आगामी जुलाई महीने तक पूरा करना है। दूसरे चरण में पूरे लाल-किला परिसर के रेनोवेशन और साज-सज्जा पर काम किया जाएगा जिसके लिए दो साल तक का वक्त मिलेगा। अगर कंपनी अच्छा काम करती है तो पांच साल के बाद इस कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ाया भी जा सकता है। बता दें कि स्‍वतंत्रता दिवस को देखते हुए लाल किला को जुलाई में सुरक्षा एजेंसियों के हवाले करना होगा, ताकि प्रधानमंत्री द्वारा किए जाने वाले झंडारोहण के लिए ज़रूरी सुरक्षा इंतजाम किए जा सकें। पीएम नरेंद्र मोदी इस साल मौजूदा कार्यकाल में आखिरी बार लाल किला से देश को संबोधित करेंगे।

डाल‍मिया भारत ग्रुप के सीईओ महेंद्र सिंघी ने इस समझौते की जानकारी देते हुए बताया कि लाल किला में 30 दिनों के अंदर काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्‍होंने कहा, ‘लाल किला हमें शुरुआत में पांच वर्षों के लिए मिला है। कांट्रैक्‍ट को बाद में बढ़ाया भी जा सकता है। हर पर्यटक हमारे लिए एक कस्‍टमर होगा और इसे उसी तर्ज़ पर विकसित किया जाएगा। हमारी कोशिश होगी कि पर्यटक यहां सिर्फ एक बार आकर ही न रुक जाएं, बल्कि बार-बार आएं। यूरोप के कुछ किले लाल किला के मुकाबले बहुत ही छोटे हैं, लेकिन उन्‍हें बहुत ही बेहतरीन तरीके से विकसित किया गया है। हमलोग भी लाल किला को उसी तर्ज़ पर विकसित करेंगे और यह दुनिया के सबसे बेहतरीन स्‍मारकों में से एक होगा।’ उन्होंने कहा हम यहाँ विभिन्न म्यूजिकल कॉन्सर्ट और संस्कृत कार्यक्रमों का आयोजन भी करेंगे।

पर्यटन और संस्‍कृति मंत्रालय से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद डालमिया भारत ग्रुप पर्यटकों से शुल्‍क भी वसूलना शुरू करेगी। कंपनी ने बताया कि लाल किला के अंदर होने वाली गतिविधियों से इकट्ठा राजस्‍व का ऐति‍हासिक इमारत के रखरखाव और उसके विकास पर ही खर्च करने की योजना है। लाल किले से मिले राजस्व के लिए कंपनी को एक अलग बैंक अकाउंट बनाना होगा। कंपनी की हर गतिविधि पर नज़र रखने के लिए तीन अलग-अलग कमिटी भी बनायी जाएंगी।

बता दें कि केंद्र सरकार ने सितम्बर 2017 में अडॉप्ट अ हेरिटेज स्कीम का उद्घाटन किया था, जिसके तहत देश की 100 ऐतिहासिक इमारतों को गोद लेने के लिए चुना गया है। इन इमारतों में उत्तर प्रदेश में ताजमहल, हिमाचल प्रदेश का काँगड़ा किला, मुंबई बौद्धिक कनेरी गुफाएं आदि शामिल हैं।
कहा ये भी जा रहा है डालमिया ग्रुप ने लाल किला के साथ आंध्र प्रदेश के गंदिकोटा किला और कोणार्क के सूर्य मंदिर को गोद लेने की प्रक्रिया भी लगभग पूरी कर ली है। वहीं ताजमहल को गोद लेने के लिए जीएमआर स्पोर्ट्स और आईटीसी के बीच कांटे की टक्कर है।

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