शनिवार “28 अप्रैल 2018” को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक ऐतिहासिक दिन बताया . जी हाँ ,मोदी ने अपने एक ट्वीट में देशवासियों को जानकारी देते हुए लिखा ’28 अप्रैल 2018 को भारत के विकास के इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में याद किया जाएगा. कल हमने एक ऐसी वचनबद्धता पूरी की है जिससे तमाम भारतीयों का जीवन हमेशा के लिए बदल जाएगा. मैं इस बात से खुश हूं कि अब भारत के हर गांव में बिजली पहुंच चुकी है. अपने इस ट्वीट में पीएम ने खासतौर पर मणिपुर के उस लेइसांग गांव का उल्लेख किया जहां अब बिजली पहुंचाई जा चुकी है. उन्होने कहा मणिपुर के सेनापति जिले का लेइसांग गाँव राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से जुड़ने वाला अंतिम गाँव बना है . उन्होने इस अभियान को संभव बनाने वाले सभी लोगों को बधाई दी.
12 दिन रहते पूरा किया “दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना” का लक्ष्य
बिजली राज्य मंत्री “आर के सिंह”ने मीडिया से बातचीत में बताया ,यह एक बहुत कठिन कार्य था,लेकिन इस लक्ष्य को हमने शेष 12 दिन रहते पूरा कर लिया . संपूर्ण राष्ट्र के लिए यह एक हर्ष और गर्व का विषय है .
दरअसल ,साल 2014 में नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर अपनी सरकार बनाई थी . मई 2014 में जारी किये गए आंकड़ों के अनुसार उस समय देश में तकरीबन 18,452 गांव बिना बिजली के थे. इस दौरान भारत सरकार ने पूरे देश में बिजली पहुँचाने के लिए एक योजना शुरू की थी ,योजना का नाम था “दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना” जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा भारत के करीब छह लाख गांवों में बिजली पहुंचाने का काम शुरू किया गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1,236 गांव बिना आबादी वाले हैं और 35 चारागाह के तौर पर आरक्षित हैं।
प्रधानमंत्री के ट्वीट के ज़रिये केंद्र सरकार ने दावा किया है कि ,भारत के सभी गाँवों और कस्बों में बिजली पहुंच चुकी है . लेकिन जब इस दावे की पड़ताल की गयी तो इसकी ज़मीनी हकीकत कुछ और ही निकली . दरअसल केंद्र सरकार द्वारा जो आंकड़े इस दावे को सत्यापित करने के लिए दर्शाए गए है ,वह केवल कागजों पर है. लेकिन हकीक़त तो कोई और कहानी बयान कर रही है.
दरअसल जब इंडिया टुडे समेत कई मीडिया पोर्टल्स ने इस दावे का सर्वेक्षण किया ,तो असल आंकड़े सरकार द्वारा पेश की गयी रिपोर्ट के बिलकुल उलट निकले.

जब भारत के अलग राज्यों के ग्रामीण इलाको का सर्वेक्षण किया गया तो हमारे सामने क्या आया?
शुरू करते है झारखण्ड के सपरुम गाँव से.
जी हाँ , जमशेदपुर से करीब 90 किमी की दुरी पर स्थित ,खरसावा जिले का ये छोटा सा गाँव. जहाँ तकनीकी तौर पर अर्थात सरकार की फाइलों में पड़े दस्तावेजो के अनुसार बिजली पहुंच चुकी है. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह पता चलता है कि यहाँ बिजली नाम की कोई चीज़ ही नही है . आपको बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री “रघुबार दास ” कई साल पहले ही गाँव में बिजली के खम्भे लगाने का दावा कर चुके है. लेकिन उनको कौन समझाये की गाँव में बिजली के खम्भे लगने और असल में बिजली पहुंचने में फर्क होता है .
तो वहीँ दूसरी तरफ राजस्थान के “धौलपुर” जिले के तकरीबन आधे दर्जन से ज्यादा लोगो ने आज़ादी के 70 साल बाद भी बिजली की शक्ल नही देखी है . यहाँ के लोग तो यह भी नही जानते की चुभती गर्मी में पंखे के नीचे बैठ कर कैसा लगता है . जब पत्रकारों ने यहाँ के निवासियों से बात की तो उन्होने बताया कि ,इस बारे में हमने कई बार प्रशासन से संपर्क किया लेकिन अब तक उनके द्वारा कुछ भी नहीं किया गया . यहाँ के कुछ लोगो का तो यह भी कहना है कि ,यहाँ बिजली तो दूर की बात है हमारी पास तो साफ़ पीने का पानी भी उपलब्ध नही है.

शिवराज सिंह चौहान ने पीएम को बधाई देते हुए खुद की भी थपथपाई पीठ ,लेकिन राज्य में 50 से ज्यादा गाँव आज भी अँधेरे में

प्रधानमंत्री के ट्वीट के जवाब में उन्हे इस कामयाबी के लिए कई बधाई सन्देश मिले . मोदी को बधाई देने की सूचि में सबसे पहला नाम था मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का .उनके राज्य मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में जब जांच की गयी तो ,पता चला यहाँ तकरीबन 50 ऐसे गाँव है जहां अब तक बिजली नही पहुंची है . नर्मदा नदी के किनारे स्थित दलित बहुल पांच ऐसे गाँव है ,जहाँ बिजली तोह दूर की बात है बिजली की परछाई तक नही है .उनमें से एक गाँव है “अलीराजपुर”. बातचीत करने पर ये पता चला कि इन पांच गाँवों में से महज़ एक गाँव में बिजली का पोल पहुंचा है . यहाँ झंडाना ,अम्बा ,चमेली समेत ऐसे पांच गाँव है जहाँ अब तक उजाला सिर्फ लालटेन और मोमबत्तियों की रोशिनी से ही होता है.

कागजों पर आंकड़े कुछ और हकीक़त बयान कर रही है अलग ही कहानी
लगता है हमारी सरकार ऐसा मानती है कि अगर किसी गाँव के चंद घरों ,स्कूलों या सार्वजानिक स्थानों पर बिजली पहुंच गयी तो वह इलाका इलेक्ट्रिफाइड हो गया। आपको बता दें सरकार द्वारा जारी की गयी रिपोर्ट के अनुसार जिन गाँवों में हाल ही में बिजली पहुंची है ,उनमे से केवल 8 फीसदी इलाके ही ऐसे है जहां हर घर में बिजली कनेक्शन है. यानी की ,हमारे देश के ग्रामीण इलाको का एक बड़ा तबका इक्कीसवीं सदी में भी बिजली से अछूता है. आपको बता दें की देश के करीब 24 राज्‍यों में अभी भी कई ऐसे घर हैं जहां बिजली नहीं पहुंची है. इन घरों में सबसे ज्‍यादा संख्‍या उत्‍तर प्रदेश के घरों की है.

रौशनी से महरूम ग्रामीण तबको में रहने वाले लोग
सरकार ने बीते शनिवार को हिंदुस्तान के इतिहास का एक ऐतिहासिक दिन तो घोषित कर दिया ,लेकिन अफ़सोस बड़े दावों के बाद भी आज भी हमारे देश में कई ऐसे गाँव है जहाँ रोशिनी के पर्व दीवाली में भी पूरा गाँवअँधेरे में रहता है . यहाँ हम AC से लेस घरों में रहते है तो दूसरी तरफ इन लोगो को पंखे की हवा भी नसीब नहीं.

श्वेता पाठक, महविश रज़वी

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