मीडिया को लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ के रूप में जाना जाता है। किन्तु कई कारणों की वजह से ये स्तम्भ अपनी नींव पर अपनी पकड़ को रहा है। इसके बावजूद आम आदमी का भरोसा अब भी मीडिया और पत्रकारिता पर बरकरार है। जनता को उम्मीद है कि बेशक ये वक़्त ज़रा मुश्किल है पर प्रेस दोबारा वही काम करेगी जिसके लिए उसकी स्थापना हुई थी। मुश्किल वक़्त से गुज़र रही मीडिया के लिए आज खास दिन है। आज ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे’ है।

इस मौके पर यूनेस्को ने ट्वीट कर लिखा- पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। बिना सुरक्षित पत्रकारिता के सुरक्षित सूचना हो नहीं सकती। बिना सूचना के कोई आज़ादी नहीं होती। आज और रोज़ाना प्रेस की आज़ादी के लिए खड़े हों।

काँग्रेस ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम पर पत्रकारों को मज़बूत और निडर होने कि सलाह दी। उन्होने लिखा- आज भारतीय पत्रकारों के लिए कठिन समय है। ईमानदार और संतुलित आवाजों को झूठ से दबा दिया जाता है। यह बहुत जरूरी है कि हमारे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मज़बूत बनाया जाए और इसे और निडर बनाने के लिए योगदान दिया जाए।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी ट्वीट किया, “मुक्त और ईमानदार प्रेस लोकतंत्र के रीढ़ है। प्रेस हमेशा से दुनिया भर में सूचना, आलोचना और संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इसलिए प्रेस की स्वतंत्रता आवश्यक है।“

आइए आपको पत्रकारिता से जुड़े इस उत्सव के बारे में कुछ खास जानकारियाँ देते हैं।

•यूनेस्को की जनरल कॉन्फ्रेंस की सिफ़ारिश के बाद साल 1993 में आज ही के दिन यानि कि 3 मई को वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे मनाने की शुरुआत हुई थी।

•इस दिन को प्रेस के मूलभूत अधिकारों को मनाने के लिए मनाया जाता है।

•आज का दिन मीडिया पर हो रहे हमलों में उसका पक्ष रखने और उसकी रक्षा करने के लिए भी मनाया जाता है।

•आज के दिन उन जाँबाज पत्रकारों को श्रद्धांजली अर्पित की जाती है जिन्होने पत्रकारिता करते-करते अपनी जान गंवा दी।

•हर साल इस दिन को एक खास विषय के साथ मनाया जाता है। 2018 के उत्सव का विषय है प्रेस स्वतंत्रता के लिए एक सक्षम कानूनी वातावरण के महत्व पर प्रकाश डालना और प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकारों के खिलाफ अपराधों के अभियोजन पक्ष के लिए कानूनी गारंटी सुनिश्चित करना तथा एक स्वतंत्र न्यायपालिका की भूमिका पर विशेष ध्यान देना।

•यूनेस्को हर साल वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के तहत दुनिया भर के देशों में प्रेस की मज़बूती की एक सूची बनाता है। इस साल 180 मज़बूत देशों की सूची में भारत पिछली साल से तीन पायदान फिसलकर 136वें नंबर पर आ गया है।

•इस सूची में नॉर्वे पहले नंबर है और दक्षिण कोरिया सबसे नीचे पायदान पर जगह बना पाया है।

•बता दें कि इस वक़्त पूरी दुनिया में पत्रकारिता और उससे जुड़े मामलों की वजह से 193 पत्रकार जेल में हैं।

•जिन देशों में प्रेस कि स्थिति बहुत ज़्यादा खराब है वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में उन 21 देशों ओ काले रंग में दिखाया है। इसके साथ ही 51 देशों को खराब स्थिति वाली श्रेणी में रखा गया है।

•भारत में अगर प्रेस फ्रीडम कि बात की जाए तो स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। पिछले सात सालों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो अब तक 389 पत्रकार अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं अगर सिर्फ 2018 की बात करें तो साल की तिमाही खत्म होते-होते अब तक 14 पत्रकार अपनी जन से हाथ धो बैठे हैं।

•उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने फेक न्यूज़ चलाने वालो पत्रकारों के खिलाफ जेल और आजीवन प्रतिबंध का प्रावधान पारित किया था। किंतु प्रधानमंत्री मोदी ने उनके इस आदेश पर प्रतिबंध लगा दिया।

•दूसरी तरफ मीडिया के जानकारों ने भी ईरानी के इस कदम की निंदा की। उनका कहना था कि हर पत्रकार स्वतंत्र काम नही करता। कई बार वो अपने संस्थान और अपने संपादक के दिशा-निर्देशों का पालन करता है। कई परिस्थितियों में किसी खबर का सिर्फ इसलिए बहिष्कार कर दिया जाता है क्यूंकी वो किसी खास दल या मुद्दे को रेखांकित करती है। जिसके बाद लोग निजी स्वार्थ के चलते उस खबर का विरोध करते हैं। ऐसे में इस तरह की सज़ा प्रेस की स्वतन्त्रता पर हमला है।

महविश रज़वी

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