असम के 40 लाख मुसलमानो पर इस समय नागरिकता की तलवार लटक रही है। वो भारत के नागरिक है या नही ये बात उनको साबित करनी पड़ रही है। NRC के आफिस खोले गए है जहाँ उन्हें अपनी नागरिकता साबित करनी है। समस्या ये है इन आफिस के इंचार्ज भी संघियो को बना दिया है अगर दो डॉक्यूमेंट में नाम के स्पेलिंग की भी गड़बड़ी हुई तो नाम डाउटफुल लिस्ट में दल दिया जाता है।

बोगईगाँव की 7 लाख आबादी में 52% मुस्लिम आबादी है जिसमें 1 लाख लोग प्रभावित हैं। बारपेटा की 23 लाख आबादी में 60%मुस्लिम आबादी है जिसमे से 95% वेरिफिकेशन प्रोसेस से जूझ रहे है
धुबरी की आबादी 18 लाख है जिसकी 70% आबादी मुस्लिम है वहाँ भी 90% मुस्लिम आबादी को अपनी नागरिकता साबित करनी है। यही हाल कोकराझार और गोपालपडा का है।

धुबरी और बोगईगाँव मे रिकरनेशन कैम्प लगाये गए जिसमे इस से प्रभावित लोग रह रहे है एक मामले में एक स्वाधीनता संग्राम सेनानी की बेटी को पेपर पूरे न होने कारण कैम्प में डाल दिया वो इस समय गर्भवती थी वही बेटा हुआ 14 महीने बाद वो अदालत से फैसला आने पर कैम्प से बाहर निकली।

जो लोग सरकार के हिसाब से पेपर नही दे पाएंगे उनको भारत का नागरिक नही माना जायेगा कोई मूलभूत अधिकार नही रहेंगे उसके आगे क्या होगा ये सरकार नही बता रही है।
हालात इतने खराब हैं उसके बावजूद ये मुद्दा न मीडिया में जगह पा रहा है न सोशल मीडिया में। बहरहाल इरादा ये है कि ईद बाद असम में ही खपा जाएगा पूरे देश मे इस न इंसाफी और NRC मामले के विरुद्ध माहौल बनाया जाएगा।

नदीम खान

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here