पिछले कुछ सालों में हमारे देश की लड़कियां पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ी उसका अंदाजा 2018 के 12वीं कक्षा के परिणाम को देखकर लगाया जा सकता है। मेघना श्रीवास्तव द्वारा 500 में से 499 अंक हासिल करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस बार लकड़ियों का पास प्रतिशत 88% रहा जबकि टॉप 3 में लड़कियां ही जगह बना पाने में सफल हो पाई। वहीं पूरे भारत मे टॉप 10 विद्यार्थियों में से 6 लड़कियां अपना नाम इस सूची में दर्ज करा पाने में सफल हुई है।

मेघना,अनुष्का और सुप्रिया का अच्छा प्रदर्शन पूरे भारत को एक बड़ा सन्देश देगा। यह इसी साल नही बल्कि पिछले कुछ सालो में 12वीं के परिणामो में लड़कियां ही बाजी मार ले गयी है। ये चीज स्पष्ट करती है जो समाज लकड़ियों को पढाने से पीछे हटता था, आज उसी समाज की लड़कियां अपने परिवार और स्कूल का नाम रौशन कर रही हैं। बात सिर्फ नंबरो की नही है अन्य खेलों में भी बढ़ती भागेदारी ने भारत को विकासशील से विकसित की ओर प्रेरित किया है। नोएडा के स्कूल से पढ़ी मेघना श्रीवास्तव बाकी लकड़ियों के लिए प्रेणा बनेगी क्योकि आज भी कई राज्य ऐसे है जहाँ लकड़ियों के टैलेंट को दबाया जा रहा है आखिर अब तो माता पिता और उस रूढ़िवादी समाज को यह बात समझ लेनी चाहिए कि लड़कियों के लिए एक बात बोली जाती है “आज की लकड़ियां लड़को से कम नही है” बल्कि अब इस वाक्य को बदलकर यह होना चाहिए “आज की बेटियां लड़को से कहीं आगे हैं।”

इस बार लकड़ियो के प्रदर्शन को देखकर कई बड़े-बड़े नाम और हस्ती भी उनकी तारीफ करते नही थक रहे। “बेटी बचाओ ओर बेटी पढ़ाओ”का नारा सिर्फ एक नारा या जुमला नही है बल्कि यह वह सच्चाई है जिसे अनदेखा नही किया जा सकता। एक शिक्षित महिला अपने बच्चो को खुद पढ़ाने के लिए उसकी आदर्श बनती है और वही आदर्श,लकड़ियो के लिए प्रेरणा बनकर मेघना श्रीवास्तव जैसी लडकियो के रिजल्ट का परिणाम बनता है। मेघना श्रीवास्तव द्वारा बिना कोई ट्यूशन लिए इतने अच्छे अंक प्राप्त करना यह सफलता स्प्ष्ट करती है कि विद्यार्थी में अगर खुद की लगन हो तो वह दुनिया की हर ताकत को पार कर सफलता हासिल कर सकता है केवल ट्यूशन लगाकर ही अच्छे अंक प्राप्त नही किये जा सकते।
खुद की कठिन मेहनत ही किसी आदमी को सफ़लता का मार्ग दिखाती है।

अखिल सिंघल

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