मुठभेड़ के नाम पर पैर में गोली मारे गए लोगों का ईलाज न कराकर उनके पैर को काटने पर मजबूर कर रही सरकार

मोदी पर टिप्पड़ी के नाम पर बागी पर लगा 124ए, बलिया के ‘बागी’, बलिया के पहले राज्यद्रोह के आरोपी

नोटबंदी को लेकर मोदी पर टिप्पड़ी के नाम पर दर्ज मुकदमें में गिरफ्तार बृजेष बागी को तत्तकाल रिहा किया जाए

नेता कोई टिप्पड़ी करे तो राजनीति, जनता टिप्पड़ी करे तो देषद्रोह, क्या है देषद्रोह का मानक

थाने में बंद अजय यादव को किस पुलिस वाले ने दिया तमंचा जो उसने चलाई गोली

भारत बंद के नाम पर दर्ज मुकदमों को तत्काल वापस ले सरकार

भारत बंद के नाम पर पुलिसिया उत्पीड़न और फर्जी मुठभेड़ में गोली मारे गए पीड़ितों के परिजनों से रिहाई मंच ने की मुलाकात

लखनऊ 1 जून 2018। रिहाई मंच ने पूर्वी यूपी के आजमगढ़ में फर्जी एनकाउंटर, भारत बंद के नाम पर पुलिसिया दमन, सांप्रदायिक तनावों की घटनाओं के क्षेत्रों का दौरा किया। मंच ने बलिया में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय बृजेष कुमार बागी की गिरफ्तारी पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे योगी को चप्पल मारने की बात कह जाते हैं तो उन पर कोई मुकदमा नहीं। यहां सिर्फ एक युवा नोटबंदी की त्रासदी पर फेसबुक पोस्ट कर देता है तो उसको देषद्रोही करार देते हुए मुकदमा पंजीकृत कर दिया जाता है। यहीं नहीं पीएमओ से विषेष पत्र भेजकर कार्रवाई कराई जाती है। बलिया में पहली बार 124ए के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। रिहाई मंच ने कहा कि बेलगाम पुलिस लगातार फर्जी मुठभेड़ में युवाओं के पैर में गोली मारकर उनका जीवन बर्बाद कर रही है। आज आजमगढ़ के मेंहनगर के पिलखुआं गांव के समीप मेंहनगर रोड पर फिर फर्जी मुठभेड़ के नाम पर दो नौजवानों के पैर में गोली मारी गई और तीन को पुलिस द्वारा गायब कर देने की बात आ रही है।

सरायमीर आजमगढ़ के पास पवई लाडपुर गांव के रहने वाले अजय यादव जिन्हें पिछले दिनों फर्जी मुठभेड़ में पैर में गोली मारी गई थी के परिजनों से शरद जायसवाल और राजीव यादव ने मुलाकात की। अजय की मां ने बताया कि वह बंबई मे कमाता था। एक-डेढ़ साल पहले उसको गिरफ्तार किया गया था तो उस पर एक साथ 7 केस लाद दिए गए थे, 6 महीने के तकरीबन वो जेल में था। केसों के बारे में पूछने पर बताती हैं कि दसमी के मेले में लड़की के चक्कर में कोई मारपीट हुई थी। 10 मई की शाम खबर आई की उनके बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था पर बूढ़े पिता सतिराम यादव में इतनी हिम्मत न हुई की वो थाने जाएं। एक तो वह सेहत से भी लाचार दूसरे जेब से भी, ऐसे में वो कहते हैं कि क्या करता वहां इस हालत में जाकर। वहीं मां कहती हैं ‘अगर मालूम रहत कि हमरे बचवा के पैर में गोली मार दिहैं त जरुर जाइत।’ शाम 7 के करीब बेटे की थाने में गिरफ्तारी की सूचना उन्हें मिली। सतिराम यादव के दो और बेटे हैं एक अमित यादव जो वाराणसी में लकड़ी के सामान बनाते हैं तो दूसरा पंकज यादव जो ड्राइवर हैं। बहुत मुष्किल से घर चलता है। इतने दिनों में मां एक बार जेल गईं पिता वो भी नहीं जा पाए। कहते हैं कि हाथ खाली है। ऐसे में कैसे जाएं। वहां उसका का ईलाज कराना होगा। बाहर से दवाई लेनी होगी कहां से लाउंगा। वे कहते हैं कि उसको 25 हजार का ईनामी बताया जा रहा है जबकि हमें मालूम ही नहीं की कब उस पर ईनाम घोषित किया गया। इस मामले में खानपुर के एक लड़के विषाल और एक और व्यक्ति तो फरार बताया जा रहा है।

गौरतलब हैं कि इस मामले में पुलिस का दावा है कि अजय यादव को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वो अपने दो साथियों के साथ किसी घटना को अंजाम देने के लिए जा रहा था। मीडिया में आया है कि 25 हजार के ईनामी अजय यादव पर जब कागजी कार्रवाई की जा रही थी तो अजय ने अपने मोजे से तमंचा निकाला और थाने की दीवार फांद पुलिस पर फायंरिग करने लगा जिसमें पुलिस ने जवाबी गोली चलाई जो उसके पैर में लगी जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।

रिहाई मंच ने सवाल उठाया कि पुलिस का पैर में बोरा बांधकर पैर में गोली मारने की कार्रवाई से सब परिचित हैं। पर 25 हजार के ईनामी जिसे गिरफ्तार किया गया और घटना स्थल पर उससे कोई बरामदगी नहीं की गई। क्योंकि अगर की गई होती तो पुलिस जब किसी को गिरफ्तार करती है तो तलाषी लेती है तो वह तमंचा उसे मिल जाता। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पुलिस ने क्या उसे अपने पास रखे किसी तमंचे के साथ पैर में गोली मारकर गिरफ्तार करने का झूठा दावा किया। वहीं अगर पुलिस की थ्योरी को सही मान लिया जाए तो उसकी गैरपेषेवराना हरकत के लिए उस पूरी पुलिस पार्टी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्या जिला प्रषासन ने ऐसा किया।

भारत बंद के दौरान आजमगढ़ के अजमगतगढ़ और जीयनपुर क्षेत्रों में हुए पुलिसिया दमन पर स्थानीय अधिवक्ता चन्द्रपाल और तेजबहादुर समेत घटना के लिए बताए जा रहे मुख्य आरोपी अजमतगढ़ के चेयरमैन पारस सोनकर के परिजनों से मुलाकात की गई। 63 नामजद और 150 अज्ञात के नाम से दर्ज हुए मुकदमें में अब तक जिन 24 की गिरफ्तारी हुई थी उनको जमानत मिल चुकी है। एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किए जाने के खिलाफ भारत बंद में जिस तरह 307 तक के मुकदमें पंजीकृत किए गए वो साफ बताता है कि यह राजनीतिक द्वेष से लगाए गए हैं। मंच ने मांग की कि भारत बंद के नाम पर दर्ज मुकदमों को तत्तकाल वापस लिया जाए।

रिहाई मंच ने बलिया के बृजेश कुमार बागी की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि विगत दिनों बलिया के जजौली में दलित महिला रेशमी देवी को जिंदा जला देने के मामले में पीड़िता के पक्ष में वे आंदोलनरत थे। तब से ही वो पुलिस और स्थानीय विधायक के नजर में चढ़े हुए थे। विगत रविवार उनकी फेसबुक वाल पर मोदी विरुद्ध की गई टिप्पणी को आधार बनाकर उनपर आईपीसी की धारा 153ए, 153बी, 124ए (राज्यद्रोह) तथा 66 आईटी एक्ट में निरुद्ध किया गया। शासन के शह पर जमानत भी नहीं दी जा रही है तथा जेल के भीतर भी प्रताड़ित किया जा रहा है। मंच ने कहा कि 124ए का विरोध देश की आजादी के समय से ही होता आ रहा है। समय-समय पर सरकारें अपनी राजनैतिक विरोधियों पर इस धारा का दुरपयोग करके प्रताड़ित करती रही हैं। अब बलिया में बीजेपी सरकार अपने राजनैतिक विरोधियों का दमन करने के लिए इस तरह का षडयंत्र रच रही है।

द्वारा जारी प्रतिनिधिमंडल सदस्य
राजीव यादव

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