सरकार मुस्लिम विरोधी है इस बात को लिखते हुए मुझे कोई शक नही है मुस्लिम के साथ साथ दुश्मन औरों की भी है लेकिन जिस तरह से मुस्लिमों का राजनीतिकरण हो रहा है उसके हिसाब से मुस्लिमों से पूरा पोलिटिकल फायदा लेने की फ़िराक़ में हैं.

महिलाओं की असुरक्षा, भुखमरी, और बेरोज़गारी में भारत नंबर एक स्थान प्राप्त कर चुका है और सरकार इस बात में व्यस्त है कि यूपी के मुख्यमंत्री टोपी पहनेंगे या नही, मदरसों में सीसीटीवी होना चाहिए, मदरसों को मॉडर्न होना चाहिए और अब एक नया शिगूफा छोड़ा गया है कि मदरसों का ड्रेस कोड बदल देना चाहिए। युवा बेरोज़गारी पर सवाल न करें, महिलाएं सुरक्षा और शिक्षा पर बात न करें इसलिए नए और फालतू मुद्दों को हवा दी जा रही है।

मुल्क़ में अफवाहों का बाज़ार इतना गर्म है कि गौ तस्करी और बच्चा चोरी की अफवाह में भीड़ जान से मार दे रही है और पुलिस उन गरीबों को इंसाफ दिलवाने में असफल हो रही है। रेप जैसे जुर्म जस्टिफाई हो रहे हैं और लोग जुर्मों में भी पक्ष विपक्ष ढूंढ रहे हैं। इससे जान लीजिए कि जनता का बौद्धिक स्तर किस कदर गिरा दिया गया है। जनता हिंदू-मुस्लिम और मर्द-औरत के आगे सोचने को राज़ी नही है खून की प्यासी होती जा रही है।

सत्ता में बैठे मंत्री बचकाने बयान दे रहे हैं। राजनीतिक मतभेदों के स्तर को इतना घटिया और कमज़ोर कर दिया है कि अब राजनीति में किस का कब चरित्र हनन हो जाये कहा नही जा सकता, पिछले दिनों सुष्मा स्वराज पर हुए हमलों को हम उदाहरण के तौर पर देख सकते हैं।

बाकी ऐसे मौके पर एक ही बात याद आती यही “जब रोम जल रहा था तो नीरो बाँसुरी बजा रहा था”

इमरान

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