आज वो घर भी गूँज रहे होंगे,जो पूरे साल खामोश रहते है। मैं बात कर रहा हूँ उत्तराखंड की जो हमारे देश की देवभूमी मानी जाती है। मई और जून एक ऐसा महीन माना जाता है जो खुशियाँ लेकर आता है। इन महीनो में जो अपना घर छोड़कर दिल्ली व अन्य राज्यों में काम के वास्ते गए होते है वह इन दिनों अपने घर का आगमन करते है और अपने माँ-पिताजी के चहरे में तो में एक नई रोनक तो लाते ही है साथ-साथ में पुरे गांव में भी रोनक लाते हैं।

इन महीनो में वो द्वार भी खुल जाते है जिन पर अरसे के लिए ताला लगा होता है। इन महीनों को उत्तराखडं में एक नए रूप से जाना जाता है। लेकिन एक सवाल मुझे अंदर ही अंदर से परेशान कर रहा है। जब मैं यहां आया तो यहां की प्राकृतिक हवा,यहां की संस्कृति,यहां के लोक गीत,यहां का भोज, सब कुछ मुझे बहुत सुन्दर और सुहावना लगा। लेकिन फिर भी यहां के युवा पलायन कर रहे हैं ऐसा क्यों हो रहा है इसकी चर्चा हम आगे करते है।

उत्तराखंड आज पर्यटकों का एक प्रमुख स्थान बन गया है। यहां गर्मियों में हजारों की संख्या में देश-विदेश से सैलानी अपनी छुटियां बिताने आते है।
यहां की प्रकृति को हर कोई देखना चाहता है। यहां की संस्कृति बहुत ही उत्तम है तथा देश-विदेश में जानी भी जाती है।

उत्तराखंड अपने विकास के लिए सन 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग हुआ था। लेकिन विकास का सपना देखते हुए वह आज भी संघर्ष कर रहा है क्योंकि यहां के लोग व युवा यहां नहीं रहना चाहते पलायन करना चाहते हैं और कर भी रहे है। यहां जब मैंने निसनी गांव के निवासी राहुल से बात करी तो उन्होंने कहा यहां अगर एक-दो फैक्ट्री लग जाए तो कोई भी अपना घर नहीं छोड़ना चाहेगा। आज ऐसा क्यों हो रहा है इसका जवाब भी यहां की सरकार के पास नहीं है। यहां की सरकार हर साल नयी-नयी योजना बनाती है लेकिन जब यहां कोई है ही नहीं तो इसका क्या फ़ायदा?
आज उत्तराखंड के घरों में केवल बुजुर्ग ही मौजूद हैं। शायद उनके जाने के बाद यहां पूरा वीरान हो जाएगा क्योंकि घर पर युवा तो है नहीं। आज सरकार भी पलायन को रोकने में अक्षम है।
आज उत्तराखंड खाली होता जा रहा है। यहां की संस्कृति आज खतरे में है। यहां के जंगल धूं-धूं कर जलकर राख हो रहे हैं। यह इसीलिए भी हो रहा है क्यूंकि जब पहले लोग जंगल जाते थे तो वहां से खाने के पदार्थ लाते थे लेकिन अब कोई है नहीं तो इन सब चीजों को रोकने वाला कोई नहीं है और अब धीरे-धीरे ये सब ख़त्म होने की कगार पर है। आज उत्तराखंड की सबसे बड़ी परेशानी रोज़गार की है। अगर यहां रोज़गार उपलब्ध हो जाए तो यह समस्या हल हो जाएगी व पलायन रुक जाएगा। उत्तराखंड सरकार को आज मजबूत कदम उठाने की ज़रूरत है,साथ ही रोज़गार उपलब्ध कराने की ज़रूरत है। इसी के साथ ही यहां के युवाओं को आगे लाने की ज़रूरत है उनकी बात सुनने की ज़रूरत है। आज हम सबको अपने देश की देव भूमि को बचाना होगा अगर ऐसे ही लोग पलायन करते रहे तो वो दिन दूर नहीं है जब यहां हमेशा के लिए घरों में ताले लग जाये।

आशीष
राम लाल अनांद कॉलेज (डीयू)

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