क्रिकेट विश्व के सबसे ज़्यादा पसंद करें जाने वाले  खेलों में से एक है,शायद फुटबॉल के बाद इस खेल ही को सबसे ज़्यादा पसंद किया जाता है,चाहे विश्व कप का रोमांच हो या चैम्पियंस ट्रॉफी की बात या फिर टी ट्वेंटी विश्व कप का खुमार क्रिकेट का एक  अलग ही मुकाम है,हाल ये है की क्रिकेट में सबसे बड़ा फॉर्मेट टेस्ट मैच की “ऐशेस” सीरीज़ जब खेली जाती है तो आज भी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के की दर्शकों की भीड़ से भरा स्टेडियम चियर्स करने वाले दर्शक होते है ,और आईपीएल और इस जैसी श्रृंखलाओं ने तो जैसे खेल का रंग ही बदल दिया है |1423543412_shahid-afridi-pakistan

अब तो हाल ये हो गया है है की जो ग्रुप एक साथ जमा होकर सचिन के शतक का इंतज़ार करता था या सहवाग के चौकों को छोड़ना नहीं चाहता था वो अब “हॉटस्टार” पर क्रिकेट देखने को तरजीह दे रहा है और जब ऐसी तस्वीर क्रिकेट प्रेमियों की है तो बदलाव तो क्रिकेट में भी हुए है और अच्छा  कहें या बुरा मगर कहते है न एक सिक्के के दो पहलु होतें है वही वजह है की आज लगातार और बहुत तेज़ी से बनने वाले रिकॉर्ड्स ने जैसे खेल को ज़्यादा ही तेज़ कर दिया है और ये तेज़ होना खेल के हिसाब से बेहतर नहीं है |

अभी हाल ही में आरोन फिंच ने टी ट्वंटी का सबसे ज़्यादा रन का व्यक्तिगत स्कोर बनाया है जसमे उन्होंने महज़ 72 गेंदों में 176 रन बनाकर अपना ही रिकॉर्ड तोडा है,सवाल ये है की लगभग हर सीरीज़ में ऐसे रिकॉर्ड बन रहें है इससे सब कुछ बहुत “आम” हो गया है,इससे पहले सबसे तेज़ वनडे के  श

तक का रिकॉर्ड शाहिद अफरीदी के नाम था जो उन्होंने अपने डेब्यू मैच में मारा था जो 37 में 102 का कारनामा उन्होंने कर दिखाया था उसे तोड़ने में 18 साल का अरसा लग या था,और जब भी अफरीदी ग्राऊंड पर उतरा करतें थे,उनके इस रिकॉर्ड को याद किया जाता था और उनके करियर के लिए ये मील का पत्थर था |

मगर अब टी ट्वंटी ने खेल ऐसा बदल दिया है की अब होड़ चल रही है और  इस होड़ में खेल प्रेमी उस चीज़ के कारण रिकॉर्ड्स को बस यूँ ही मानते है ,की ये तो यूँ ही हो जाना है और खेल के साथ खि

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लवाड़ यही है | इसी तरह की चीज़े और तब सामने आती है जब हमारे ही बीच के लोग आज के खिलाडियों की तुलना “डॉन ब्रेडमेन”,”कपिल देव” या “इमरान खान” से लेकर “द्रविड़ तक से कर देतें  है और उसकी वजह होती है सिर्फ एक पारी खेल देंना  या एक मैच जितवा देना

 और ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि आज की पीढ़ी ने 100 रन या 50 रन और अब तो 200 रनों ही को लगातार होते हुए देखा है

तो सवाल यही है की क्या हद से ज़्यादा तेज़ क्रिकेट आने वाले समय में क्रिकेट ही पर तो सवाल नहीं कर रहा है की क्या ‘क्रिकेट” के रिकॉर्ड्स बारी बारी कम अहम होतें जा रहें है और अब “वो” वाली बात नज़र नहीं आती है वो मायने नज़र नहीं आतें है क्रिकेट के मुद्दे के लिए ये सवाल है |

असद शैख़

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