“इंसान ही इंसान के काम आता है” यह कहावत सुनने में जितना सुकून देती है हक़ीक़त से उतनी ही पर है। ऐसी कहावते आज के दौर में सिर्फ किताबों में अच्छी लगती हैं। जिसमे इक्का दुक्का ही कोई शख्स मिलता है जो इन शब्दों पर खरा उतरता है और इंसानियत की मशाल जलाता है।

हम हमेशा मर्द, औरत और बच्चों के अधिकारों की बात करते हैं और सारा ध्यान इन्ही अधिकारों को प्राप्त करने में लगा देते हैं जबकि हम जानते हैं कि हमारे बीच एक तीसरा जेंडर भी मौजूद है जिसे हम “ट्रांसजेंडर” के नाम से जानते हैं। LGBTQ की कम्युनिटी के अधिकार भी उतने ही ज़रूरी हैं जितने एक आम मर्द या औरत के,लेकिन ज़मीनी स्तर पर क्या दशा हो रही है हम सब जानते हैं।

LGBTQ कम्युनिटी अछूत नही है यह कोई बीमारी नही है, बल्कि यह नेचुरल है जो कि क़ुदरत की तरफ से होता है।इसलिए इसमें नफरत करने जैसा कुछ नही होना चाहिए, मज़ाक उड़ाने जैसा कुछ नही होना चाहिए या गिरी हुई नज़रों से देखने जैसा कुछ नही होना चाहिए। हमें और आपको इंसानियत को आधार बनाकर एक बार शुरुआत से सोचने की ज़रूरत है कि ऐसा क्यों है कि इस कम्युनिटी का कोई भी शख्स कहीं किसी काम या नौकरी में दिखाई नही देता और न ही किसी तरह के बिज़नेस में आमतौर पर दिखाई देते हैं।

मैंने कई मार्किट, कई आफिस और कई फैक्ट्री विज़िट की लेकिन एक भी ट्रांसजेंडर को कभी काम करते नही पाया। यह सब देखकर दुख होता है कि हमनें क्यों इनसब को नकार दिया है और क्यों इनसब से मुह मोड़ लिया है ये कतई अच्छा नही है।

इमरान

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