भाजपा सरकार जबसे सत्ता में आयी है तबसे उसने स्वच्छ भारत अभियान पर काफी ज़ोर दिया है. अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया क़दम से सरकार की इस मुहिम को और मज़बूती मिलने कि उम्मीद है.

योगी सरकार ने आगामी 15 जुलाई से प्रदेश में प्लास्टिक पॉलिथिन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है. आदेश के मुताबिक 50 माइक्रॉन से पतली पॉलिथिन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है. बता दें कि पिछले दिनों सीएम की अध्यक्षता वाली एक बैठक में पॉलिथिन पर प्रतिबंध के साथ-साथ इस नियम का उल्लंघन करने वालो पर 50 हज़ार जुर्माना लगाने के आदेश को भी पारित किया गया था.

सरकार के इस साहसी क़दम के साथ ही उत्तर प्रदेश प्लास्टिक बैन करने वाला देश का 19वां राज्य बन गया है. बता दें कि यूपी कैबिनेट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी को पहले ही मंज़ूरी दे चुकी है.

आदेश की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट करके लिखा है कि “15 जुलाई से प्लास्टिक के कप, ग्लास और पॉलिथीन का इस्तेमाल किसी भी स्तर पर न हो. इसमें आप सभी की सहभागिता ज़रूरी होगी.”

सोमवार को लखनऊ के शहीद पथ स्थित स्थानीय निकाय निदेशालय के नए भवन के उद‌्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आदेश पर बात करते हुए शाहेह्री निकाय को तैयार रहने के लिए कहा था. मुख्यमंत्री ने कहा था कि ‘सभी शहरी निकाय इसकी कार्ययोजना तैयार कर लें. पॉलिथिन पर प्रतिबंध तो सभी जगह होना चाहिए. फिलहाल इसकी शुरुआत शहरी निकायों से होगी.’

बताते चलें कि इससे पहले अखिलेश सरकार ने भी दिसंबर 2015 में राज्य में पॉलिथिन के कैरीबैग्स पर प्रतिबंध लगाया था. इसके लिए सरकार ने एनवायरमेंट प्रटेक्शन ऐक्ट को भी मंजूरी दी थी. इस एक्ट के तहत बताया गया था कि अगर कोई प्रतिबंधित पॉलिथिन का इस्तेमाल करता पाया जाएगा तो उसे छह महीने की सज़ा और पांच लाख रुपये तक जुर्माना भुगतना पड़ सकता था.

इस अधिनियम को पर्यावरण विभाग ने बनाया था और इसे लागू करने की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से नगर निगम, जिला प्रशासन, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को दी गई थी. हालांकि ऐक्ट में प्रतिबंधित पॉलिथिन की मोटाई 20 माइक्रॉन या उससे कम रखी गई थी, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रतिबंधित पॉलिथिन की मोटाई 50 माइक्रॉन या उससे कम तय की है. बाद में इस ही विरोधाभास और एक्ट के क्रियान्वयन के लिए एक एजेंसी न होने की वजह से इस एक्ट को लागू नहीं किया जा सका था.

हिंदी गैजेट टीम

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