रिटायर्ड आईपीएस अफसर और मलियाना कांड के समय गाजियाबाद के एसपी रहे विभूति नारायण राय ने आज एक अखबार में जेल में पनप रहे अपराधतंत्र पर एक लेख लिखा है। वी एन राय अपने एक मित्र के अनुभव के आधार पर इसमें एक खुलासा करते है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक जिले की जेल की मासिक कमाई एक करोड़ से ज्यादा है। वीएन राय ने उस जेल का नाम नही लिखा है मगर जानकर मानते है कि वो डासना जेल की बात कर रहे हैं।

ग़ाज़ियाबाद जनपद के मसूरी और डासना गांव के बीच 21 फ़ीट ऊंचाई और हाई प्रोफाइल अस्तित्व वाली इस जेल की गूंज अक्सर खबरो में रहती है।1704 कैदियों की क्षमता वाली इस जेल में अब 4200 से ज्यादा कैदी हैं। यूपी के सबसे रसूखदार कैदी इसी जेल में पाए जाते हैं। बहुचर्चित तलवार दंपत्ति,निठारी कांड के दोषी पंढेर व बड़े राजनेता और ऊंचे रसूख वाले अफसर इसी सुधारगृह में लाये जाते हैं। जेल में खर्च होने वाला यह पैसा कथित तौर पर इन्ही बड़े लोगो से सुविधा के नाम पर वसूला जाता है।

डासना जेल सूत्रों के मुताबिक यहां एक व्यक्ति के लिए घर का खाना,मिनरल वाटर, अच्छा बिस्तर और सेवक और एलसीडी जैसी सुविधाओं के लिए एक लाख रुपए प्रतिमाह खर्च होते हैं। इसलिए इसे सोने का अंडा देने वाली जेल कहा जाता है। यह जेल हाईसिक्योरिटी में आती है और यूपी के अपर पुलिस महानिदेशक कारागार चन्द्रप्रकाश इसकी सुरक्षा बेहतर बताते हैं मगर इस सबके बीच कविता चौधरी हत्याकांड के एक आरोपी रविन्द्र प्रधान (30 मई 2008, पिलखुवा के बम ब्लास्ट के कथित आरोपी शकील(19जून 2009) और नजारत घोटाले के सूत्रधार आशुतोष अस्थाना (17 ऑक्टोबर 2009) की यहां संदिग्ध हत्या हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश की जेलों में अपराधीतंत्र के प्रभावी होने पर सवाल खड़ा हो गया है। इस बार यह सवाल बागपत जेल के अंदर हुई गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद खड़ा हो रहा है। लोग कह रहे हैं कि यूपी की जेल आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने का अड्डा बन चुकी है और यहां बेहद शातिर अपराधी बिना रोक टोक के अपना तंत्र मजबूत कर रहे है! इसमें स्थानीय जेल प्रशासन की मिलीभगत है!

दादरी के वरिष्ठ पत्रकार महरुदीन खान(75)2010 में मुजफ्फरनगर जेल में एक घरेलू मामले में कुछ माह गुजार कर आये थे। इसके बाद उन्होंने अपने जेल के अनुभवों पर एक किताब भी लिखी वो बताते हैं”जेल बेगुनाहों के लिए जहन्नम और गुनाहगारो के लिए जन्नत बन चुकी है। स्थानीय जेल प्रशासन बड़े पेशेवर अपराधियों से मिला हुआ होता है जेल के अंदर ही अपराधी अमीर कैदियों को डरा धमकाकर वसूली करते हैं। वो मोबाइल इस्तेमाल करते हैं, इसके उलट दूसरे कैदियों को डर दिखाकर सुविधा देने के एवज़ में अच्छी रकम वसूल ली जाती है जेल में पैसे से लगभग हर सुविधा मिलती है यूपी का जेल प्रशासन पूरी तरह से भृष्ट हो चुका है”।

उत्तर प्रदेश की कई जेलों से आपराधिक गतिविधियों के संचालित होने की खबरे उड़ती रहती है इनमे बागपत और मुजफ्फरनगर जेल सबसे ज्यादा बदनाम है चूंकि मुजफ्फरनगर गहरी चर्चा में रहता है इसलिए पिछले कुछ सालों में वहां थोड़ा ध्यान दिया गया है। अब बागपत जेल पिछ्ले कुछ समय से कुछ खास जाति के अपराधियों की पसंदीदा पनाहगाह बन गयी तो यहां तैनाती पर भी बदनाम अधिकारी आने लगे।
जैसे बागपत जेल से निलबिंत किये गए जेलर उदय प्रताप सिंह अपने विवादास्पद आचरण के चलते तीसरी बार संस्पेंड हुए हैं। बागपत की जेल सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ सालों से सुनील राठी की इस जेल पर हुकूमत चल रही थी उससे मिलने आने जाने वालों को कोई रिकॉर्ड नही होता था उसका खाना रोज घर से आता था और उसकी बैरक एक होटल के कमरे जैसी थी। अब वहां से बढ़िया गद्दा और एलसीडी हटा ली गई है। सुभानपुर जंगल के बीच एकदम सुनसान इलाके में इस जेल में सुनील राठी का भौकाल अब और भी बढ़ जाएगा।

यूपी के जेल राज्यमंत्री जयकुमार जैकी ने पिछले दिनों अपने बयान में कहा था कि बाहुबली अपने आप को कहीं सुरक्षित न समझें। अब खबर है कि मुख्तार अंसारी ने लखनऊ जेल में अनशन शुरू कर दिया है। बाहुबली विधायक मुख्तार का कहना है कि जब तक जेल उनकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी नही की जाएगी वो कुछ नही खाएंगे।

दरअसल प्रदेश के ज्यादातर अपराधी जेलों से आज भी अपना साम्राज्य चला रहे है इनकी सियासी हलकों में भी मजबूत पकड़ है। इस सबके बीच जेल मंत्रालय की ताक़त में बहुत दम होता है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2012 में अखिलेश यादव सरकार आने के बाद पूर्व में 26 महीने जेल में रहने वाले राजा भैया को नई सरकार में कारागार मंत्री बनाया गया। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि यह विभाग उनकी खुद की चाहत थी।
जेल में दखल हमेशा से ताकतवरों का शगल रहा है और बागपत जैसी कमजोर पृष्ठभूमि वाली जेल उनके लिए आरामगाह बन जाती है। यूपी का जेल प्रशासन किस प्रकार काम करता है इसका अंदाजा इस बात से लगा लीजिये की सूबे की 47 जेल अब भी सीसीटीवी कैमरे से महरूम हैं। जिन जेलो में जैमर लगाए गए थे वो फेल हो चुके हैं। बागपत जेल में भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जेल से इंटरनेट कॉल हो रही है जिसको पुलिस ट्रेक नही कर पाती और 4G नेटवर्क को जैमर नही पकड़ पाता। यही कारण है कि जेल के अंदर से फेसबुक पर सेल्फी अपलोड हो जाती है। यह अलग बात है कि यह सुविधाये कुछ ‘खास ‘के लिए है।

आस मोहम्मद

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