ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुसलमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए सात सवाल पूछे।

1. प्रधानमंत्री बोलते हैं कि मुसलमानों के हाथ में कुरान और कंप्यूटर देखना चाहते हैं आखिर क्या वजह है कि 2013-2018 तक बजट में कोई वृद्धि नहीं हुई ?

2. प्रधानमंत्री के15 पॉइंट प्रोग्राम का यह नियम है कि तीन महीने में एक दफा कैबिनेट सेक्रेटरी बैठक लेगा, लेकिन चार साल में कोई बैठक क्यों नहीं हुई? इसी प्रोग्राम में 10वां बिंदु है जिसमें अकलियत को रेलवे, पैरामिलिट्री में रोजगार दिया जाएगा, लेकिन एक प्रतिशत रोजगार नहीं दिया गया।

3. प्रधानमंत्री ने 1400 करोड़ रूपए दौरे में खर्च किए लेकिन क्या वजह है कि नेपाल, श्रीलंका और मालदीव चीन की गोद में बैठा है?

4. प्रधानमंत्री दलितों से मुहब्बत करने का जिक्र करते हैं लेकिन जिस जज ने एसएसी-एसटी एक्ट के खिलाफ फैसला दिया क्या वजह है कि उन्हे एनजीटी का चेयरमैन बना दिया गया?

5. कश्मीर को लेकर क्या पॉलिसी है जितने आतंकवादी मारे जाते हैं उतनी ही संख्या में हमारे जवान भी मारे जाते हैं।

6. जिस तरह से देश में दलितों और मुसलमानों का दमन हुआ है. क्या प्रधानमंत्री कांग्रेस मुक्त भारत चाहते हैं या दलित-मुसलमान मुक्त मुल्क चाहते हैं?

7. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा सबसे बड़ी लिंचिंग 1984 मे हुई। मैं कहना चाहता हूं कि लिंचिंग न सिर्फ 1984 में हुई बल्कि बाबरी की शहादत में और 2002 के गुजरात दंगों मे भी हुई थी।

मगर हमारे मान्नीय प्रधानमंत्री जी ने ओवैसी साहब के एक भी सवाल के जवाब नही दिए।
इसी क्रम में ओवैसी ने कहा, फिक्स डिपॉजिट छह परसेंट हैं, महंगाई दर छह फीसदी है, आप की क्या नीति है? उन्होंने कहा, ‘मेरा सरकार से सवाल है आप कांग्रेस मुक्त भारत चाहते हैं या दलित-मुस्लिम मुक्त भारत चाहते हैं। सरकार की नीति ने देश में भय का माहौल पैदा कर दिया।
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए ओवैसी साहब ने मशहूर शायर हबीब जालिब की नज्म़ को पढ़ते हुए कहा,
फूल शाख़ों पे खिलने लगे तुम कहो, जाम रिंदों को मिलने लगे तुम कहो,,
चाक सीनों के सिलने लगे तुम कहो, इस खुले झूठ को ज़ेहन की लूट को,,
मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता,तुम ने लूटा है सदियों हमारा सुकूँ,,
अब न हम पर चलेगा तुम्हारा फ़ुसूँ, चारागर दर्दमंदों के बनते हो क्यूँ,,
तुम नहीं चारागर कोई माने मगर, मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता…

सयैद हुजैफा रहमान

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