तस्वीर सोशल मीडिया से ली गयी है

ये मासूम असली गुड़िया सी बिटिया रानी ढाई साल की अनम है, जिसे इसकी मां शकीला ने समंदर में डुबो के कत्ल कर दिया है। शकीला के शौहर राशिद ने पिछले महीने उसे घर से निकाल दिया शकीला अपने घर पहुंची तो बाप ने भी घर से निकाल दिया शकीला ने बच्ची से जान छुड़ाने के लिए उसे समंदर में फेंक दिया, इतनी भारी लाश का बोझ समंदर भी नहीं उठा सका और अगली सुबह बच्ची की लाश रेत में मिली।

समुंदर किनारे अनम की लाश

बेटी तो यह राशिद की है मगर तकलीफ मुझे ऐसी हो रही है जैसे मेरे जिगर का टुकड़ा किसी ने काट लिया हो, जन्म तो इसे शकीला और राशिद ने दिया है मगर इस परी के मनमोहनी खूबसूरत सूरत पर हर दर्दमंद दिल माँ यूँ तड़पे जैसे ये उनकी कोख में रही हो।
खुदारा घरेलू झगड़ों का गुस्सा उन मासूमों पर गिराना बंद किया जाए खुदा की जन्नत के ये फूल तो हमारी जिंदगी में बहार लाने के लिए आसमान से आते हैं, हम किस क़दर बदबख़्त हैं, जो अपनी जिंदगी की इन रौनक़ों को, खुदा की भेजी गई रहमतों बरकतों को अपने हाथों से जमीन के नीचे पहुंचा देते हैं।
अरे तुम्हें इस नन्ही परी की क़द्र नहीं थी तो मुझे दे देते लाखों ऐसे जोड़े हैं जो औलाद के लिए तड़प रहे हैं, उन्हें दे देते अब्दुल सत्तार ईधी के झूले में डाल देती, किसी यतीम खाने में दे देती ऐसी भी क्या कयामत टूट पड़ी थी जो मौत के मुंह में फेंकने चली गई?

अनम का फाइल फोटो

इस तरह के वाक़्यात में हुकूमत का कोई कसूर नहीं, क़ानून की कोई ग़लती नहीं, पुलिस प्रशासन की भी कोई खता नहीं, ये हमारे समाज का मसला है, बेहिस मुआशरात का मसला है, फिर दौर-ए-जहालत में वापस ना जाएं जब बेटियों को ज़िंदा दफना दिया जाता था, उनको मार दिया जाता था, अपने खानदानी निज़ाम को मजबूत कीजिए खुदा ना ख्वास्ता अगर कोई ऐसा मसला हो तो अपने बड़ों को इन्वॉल्व कीजिए, गलतियों को दरगुज़र कीजिए, ज़हन को मुतमईन रखकर काम लीजिए, कोई इंतहाई शिद्दत पसंदी वाला क़दम उठाने से पहले उसके नतीजे पर बार बार गौर कीजिए।
क्योंकि आपकी इस जिहालत की नहूसत पूरे समाज पर फटकार की सूरत बरसने लगती है।

प्यारी गुड़िया “अनम” तुम वापस जन्नत की परी जाना, अच्छा हुआ जो तुम इस ग़लीज़ मुआशरे में जवान नहीं हुई।

खबर शाहनवाज़ अंसारी की फेसबुक वाल से ली गयी है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here