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बात इतनी सी है की इस देश का संविधान हर किसी को सामान रूप से जीने का अधिकार देता है अब इस बात का ग्राउंड पर कितना अमल होता है यह बहस का एक अलग विषय हो सकता है लेकिन संविधान से सबको बराबर माना है. इस देश में अनेक धर्म हैं और इस देश का कोई धर्म नही है सिर्फ संविधान ही इस देश का अकेला इकलौता धर्म है जिसमे आर्टिकल 25 से 28 के अनुसार प्रत्येक शख्स अपने धर्म को मानने और प्रचार करने के लिए बिलकुल आज़ाद है लेकिन इस तरह से प्रचार की किसी दुसरे धर्म की भावना आहात न हो जाये..

खदीजा और उनकी बहनें नीता अम्बानी के साथ

आप नास्तिक हैं ये आपके लिए अच्छी बात हो सकती है आपको किसी भी तरह के धर्म में विश्वास नहीं है यह भी अच्छी बात है लेकिन इस बात की इजाज़त आपको कौन देता है की आप धार्मिक लोगो का गरियाने का काम मुसलसल करते रहें, हाँ अगर कोई आपको पसंद नही है तो तरीके से विरोध कीजिये उसकी आड़ में अपनी कुंठा मत निकालिए, जिस तरह से आपके नास्तिक होने को सबने अपनाया है उसी तरह से लोगो को अपने अपने धर्म को मानने और प्रैक्टिस करने की भी आपको इज्ज़त और अहतराम करना चाहिए…

जब बात चुनने की आजादी को लेकर होती है तो अक्सर लोग दोगले किरदार में दिखाई देते हैं कोई महिला मर्ज़ी से जो पहनना चाहे पहन सकती है तो फिर क्या वजह है की मर्ज़ी से बिकिनी पहनने वाली महिला मॉडर्न और मर्ज़ी से बुर्का या नकाब पहनने वाली महिला रूडिवादी या धार्मिक बोझ में दबी नज़र आती है, माफ़ कीजियेगा अगर कम कपडें पहनना ही आपके आधुनिकता के नापने का पैमाना है तो ऐसे में आप खुद को आधुनिकता से दूर कर लीजिये…

फ्रांस बीच पर बुरकिनी उतरवती वहां की पुलिस

हाल ही में जिस तरह से सिंगर ए.आर रहमान की बेटी खदीजा को लेकर टिप्पणियां शरू हुईं हैं वह देखने और समझने लायक हैं उसमें महिलावाद का झंडा उठाने वाली वह महिलाएं भी हैं जो फ्रीडम ऑफ़ स्पीच या फ्रीडम ऑफ़ चॉइस की बात करते नहीं थकती, अब यदि खदीजा अपनी मर्ज़ी से बुर्का या पर्दा पहन रही हैं तो आपको उस ही गर्म जोशी से उसको अपनाना चाहिए जितनी शिद्दत और गर्म जोशी से आप बिकिनी पहनी लड़कियों का स्वागत करते हैं और यदि आप ऐसा नहीं करते तो खुद को दोग्लों की फेहरिस्त में रखा कीजिये…

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