तस्वीर गूगल से ली गयी है

विश्वविख़्यात कवि शैक्सपीयर (1564-1616) ने कहा था कि “जिसने सच्चा प्यार पा लिया उसने सारा ज़हान पा लिया और जिसने प्यार खो दिया उसने अपनी ज़िंदगी खो दी” प्यार की अहमियत इन्हीं दो पंक्तियों से ख़ुद ही स्पष्ट हो जाती है. प्यार एक ऐसा अहसास है जो आंखों से शुरु होकर दिलों-दिमाग तक उतरता है और वक़्त के साथ मजबूत होता है. खुशहाल और समृद्ध जीवन के लिए प्यार की अहमियत को मनोवैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं.

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मां-बाप, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, दोस्त-रिश्तेदार या हर वह चीज़ जो धरती पर है, किसी के प्रति भी हमारे मन में प्यार हो सकता है. प्यार की ज़रुरत इंसान से लेकर पशु-पक्षी तक, सभी को होती है. क्योंकि इसके अभाव में जीवन नीरस-सा हो जाता है. कुछ लोग वैलेंटाइन डे का विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि यह पश्चिमी संस्कृति का हिस्सा है. अगर ऐसा ही है तो प्रथम दृष्टि हमें उन सभी चीज़ों को छोड़ने की आवश्यकता है जिनका संबंध पश्चिमी देशों से है. देश के संविधान के प्रावधानों, चिकित्सा प्रणाली, कृषि व तकनीकी उपकरणों से लेकर जूते तक सभी का संबंध पश्चिमी देशों से हैं और इनका इस्तेमाल हम रोज़ाना कर रहे हैं. तो क्या हम इन्हें छोड़ सकते हैं? बिल्कुल नहीं..! हमें किसी देश की किसी भी चीज़ को छोड़ने और पकड़ने से पहले उसकी आवश्यकता और उसका सकारात्मक-नकारात्मक प्रभाव के बारे में सोचने समझने की आवश्यकता होती है. वैलेंटाइन-डे के संबंध में भी हमें समझने की ज़रुरत है.

प्यार किसी देश विशेष की संस्कृति का प्रतीक न होकर इंसानियत का प्रतीक है. वैलेंटाइन-डे सीमाओं के दायरे में रहकर हर कोई मना सकता है. मगर जो लोग सड़कों, बस स्टैण्डों या सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकतें करते हैं वे न केवल इस पवित्र रिश्ते को बदनाम करते हैं बल्कि अपने साथी व ख़ुद की भी तौहीन करते हैं. असली प्यार तो वह है जो मान-सम्मान और मर्यादा के साथ अपने साथी को जताया जाएं न कि जमाने को. आप अपने साथी को खूब प्यार करें, उनका पूरा सम्मान करें और हमेशा उनका ख़्याल रखें, कौन मना करता है?  मगर फुहड़पन को प्यार के नाम पर बढ़ावा न दें.

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प्यार एक व्यापक अहसास है जो किसी ऐज़-ग्रुप से नहीं जुड़ा है. इसलिए वैलेंटाइन-डे को सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका, पति-पत्नी, युवा ही नहीं बल्कि सैनिक, बुजुर्ग, माता-पिता, भाई-बहन सभी वर्ग के लोग सेलिब्रेट कर सकते हैं. प्यार के अहसास के बिना जीवन अधूरा है. बचपन में मां के प्यार के अहसास से बच्चा स्कूल जाता है तो परिवार को ढेर सारी खुशियां देने के लिए घर का मुखिया दिन-रात काम करता नज़र आता है. जीवन में यदि प्यार है तो बेहतर से बेहतर करने का जूनून बना रहता है. विशेष तथ्य यह है कि प्यार को जताने का मात्र एक ही दिन विशेष नहीं है बल्कि हमें अपने साथी के प्रति ईमानदारी, निष्ठा, प्रतिबद्धता, समानता के साथ अपने प्यार को जताना ही नहीं बल्कि हमेशा करते रहना चाहिए.

वैलेंटाइन-डे भी अन्य त्यौहारों की ही तरह है क्योंकि इस पर भी वैसा ही उत्साह रहता है. वेलैंटाइन-डे में ऐसा कुछ नहीं है जिसके कारण इसे सेलिब्रेट न किया जाए. बस ज़रुरत इस बात की है कि लोग सामाजिक मर्यादा का ख़्याल रखें. आज सम्पूर्ण भारत में युवा ही नहीं बुजुर्ग भी प्यार के इस त्यौहार को अपने-अपने तरीके से मना रहे हैं. फिर इस पर प्रश्न चिन्ह क्यों..?

लेखक इरशाद अली द्वारा लिखी गयी किताब

वैलेंटाइन-डे न सिर्फ प्रेमी-प्रमिका तथा पति-पत्नी के प्यार का दिन है बल्कि इसमें आप गरीब, बेसहारा, अनाथ और विक्लांग बच्चों को भी शामिल कर सकते हैं. उन्हें भी खुशियां, स्नेह और प्यार बांट सकते हैं. आप इस मौके पर उन्हें चॉकलेट, गुब्बारे या अपनी हैसियत के हिसाब से कोई गिफ्ट भी दे सकते हैं जिससे उन्हें अच्छा लगेगा और आपको मानसिक सुकून मिलेगा. इस प्रकार आप अपने तक ही सीमित न रहें बल्कि दूसरों का भी ख़्याल रखें. ऐसा कर आप वैलेंटाइन-डे को सार्थक और अर्थपूर्ण बना सकते हैं.

प्यार जीवन की अनमोल धरोहर है जिसे संभाल कर रखना चाहिए. आपके प्यार पर कोई सवाल न उठाए इसलिए आपको अश्लीलता, फुहड़पन, बदसलूकी, ओवर-एक्टिंग जैसी चीज़ों से बचना चाहिए क्योंकि इन सब से प्यार की पवित्रता को नुकसान पहुंचता है.

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समय बदल चुका है. अब लोगों को अपने पूर्वाग्रहों से आगे बढ़कर सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए. आधुनिक ज़माने में बेशक इज़हार-ए-मोहब्बत बदला है लेकिन मोहब्बत की तासीर आज भी वही है. कुछ गलत प्रवृति के लोग पवित्र चीज को भी नहीं बख़्शते, तो क्या हमें उनकी वजह से पूरी व्यवस्था को ही गलत मानकर तिरस्कार कर देना चाहिए?

अपने आप में प्यार ईश्वर-अल्लाह का इंसानों के लिए एक अनमोल उपहार है. पूरी पृथ्वी प्यार के ऊपर ही टिकी हुई है. अपने जीवन में किसी न किसी के प्रति हमें प्यार रहता है. इसलिए ही लोग आर्थिक क्रियाओं में लगे रहते हैं और उत्पादन करते हैं. परिणामस्वरुप विकास होता है. अगर दुनिया में प्यार न होता तो सब लोग आपस में लड़-भिड़कर मर-मिट जाते और मानव सभ्यता का अन्त हो जाता.

फिर भी कुछ लोग प्यार और प्यार करने वालों पर सवाल उठाते हैं. प्यार में कोई बुराई नहीं है. वैलेंटाइन-डे मनाने से भी किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि प्यार मानवता का प्रतीक है. बस लोगों को सामाजिक स्वास्थ, मर्यादा और गरिमा का ध्यान रखना चाहिए. हर चीज़ मर्यादा के दायरे में अच्छी लगती है. वैलेंटाइन-डे की शुभकामनाएं.

(लेखक इरशाद अली, प्यार और ज़िंदगी के बीच के अनेक पहलुओं पर ‘LOVE & LIFE’ नामक पुस्तक भी लिख चुके हैं. उनसे trustirshadali@gmail.com के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है.)

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