तस्वीर गूगल से ली गयी है.

हम जब पूछते हैं की आप क्या परोस रहे हैं तो जवाब आता है की जो जनता पढना चाहती है हम वही लिखते हैं और जब जनता से पूछो की आप ये सब क्यों पढ़ते हैं तो जवाब आता है की जो लिखेंगे वही तो पढेंगे, अगर साइट्स ऐसा लिखेंगे नहीं तो हम पढेंगे भी नहीं..

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अब यह ज़िम्मेदारी कौन तय करेगा की कौन अपनी जगह सही है और कौन अपनी जगह गलत क्योंकि दोनों पक्ष ने अपनी अपनी दलीलें पेश कर दी हैं और दोनों ही खुद को सही मानते है. इस देश में हर तरह का कंटेंट साइट्स पर लिखा जाता है और कुछ साइट्स तो ऐसी है जो हमेशा से ही बहुत उम्दा लेखन कर रही हैं लेकिन तादात में साइट्स ऐसी हैं तो कंटेंट के नाम पर सेमी पोर्न कंटेंट परोस रही हैं या फिर किसी न किसी तरह से सेक्स एंगल घुसा ही देती हैं…

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अब एक दूसरी तरह की साइट्स भी हैं जो नफ़रत भरा कंटेंट लिखती है जो किसी एक ख़ास कम्युनिटी या किसी धर्म के खिलाफ लिखकर अपना पाठक वर्ग बनाए हुए हैं ऐसी साइट्स सिर्फ समाज में ज़हर भरने का ही काम करती है.. अब सवाल यह पैदा होता है की इन दोनियो साइट्स में से ज्यादा खतरनाक कौन सा कंटेंट है और क्यों?

अगर हम सेमी पोर्न साइट्स के कंटेंट की बात करें तो उसका कंटेंट किसी व्यक्तिगत को असर करता है लेकिन यदि हम दूसरी तरह की साइट्स का ज़िक्र करें तो उसका कंटेंट सामाजिक स्तर पर हानि करता है. इससे हम और आप अंदाज़ा लगा लें की कौन सा कंटेंट ज्यादा खतरनाक है, अब जबकि दूसरी साइट्स का कंटेंट ज्यादा खतरनाक है तो हम पहली साइट्स की पक्ष में भी नहीं खड़े हो सकते, यहाँ हालात ऐसे हैं की हमें दो खराब में से किसी एक का चुनाव करना है, दो चोर में से किसी एक चोर को निकलना है…

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खैर अब यह पढने वालों को तय करना चाहिए की उनको क्या पढना है और क्या नहीं, अपना वक़्त और साधन किसी अच्छे कंटेंट को पढने में लगाने चाहिए और खुद को बेहतर तरीके से समझाना चाहिए…

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