22 फरवरी को जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी जी नें बयान दिया कि जल्द ही भारत अपनी नदियों- रावि, बीस् (ब्यास) और सतलुज का पानी नहरों और बांधों के जरिये यमुना नदी मे जोड देगा जिससे वो पानी पाकिस्तान नहीं जाएगा। यह बयान को इस वजह से कारगर माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान के जमीनों की सिंचाई के लिए यह नदियाँ बहुत जरूरी है। यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पूरे देश में फुलवामा धमाकों को ले कर पाकिस्तान के लिए आक्रोश है। ऐसे बयान यह भी इशारा करते हैं कि भारत और पाकिस्तान एक और शीत युद्ध के तरफ बढ़ रहे हैं।

दरसल बंटवारे के बाद नदियाँ ऐसी थी जो दोनो देशों में बहती थी। इनमे इंडस (सिंधु), चिनाब, झेलम, रावि, बिस् (ब्यास) और सतलुज शामिल हैं। इसके मालिकाना हक के लिए 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था। इसको करवाने वाला खुद संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक था। इस समझौते के अंतर्गत तीन नदियों- सिंधु, झेलम और चेनाब का मालिकाना हक पाकिस्तान को मिला था और तीन नदियों- रावि, बीस् और सतलुज का मालिकाना हक भारत का तय हुआ। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सबसे सफल समझौतों माना जाता है।

2016 में पठानकोट में हुए धमाकों के बाद से ही भारत अपनी नदियों को पाकिस्तान से मोड़ने की तैयारी में जुटा हुआ है। लेकिन ऐसा करने में भारत के सामने काफी अड़चनें हैं।  सबसे पहली अड़चन है बांधों और नहरों को बनाने की। भारत की ये नदियाँ पूर्वी भारत मे बहती हैं, खासकर कश्मीर में। पहाड़ी और पथरीली जगह होने की वजह से यहाँ पर बांधे और नहरें बनाने में खासी परेशानी आएगी और वक्त भी लगेगा। अगर इंजीनियरों की मानें तो इतनी बड़ी और तेज़ धारा वाली नदी को पूरी तरह मोड़ने और रोकने के लायक बांध और नहर बनाने में  साल लगेंगे। अगर यह काम “जल्द ही” किया गया तो कश्मीर घाटी को भारी बाढ़ से गुज़रना पड़ेगा। ऐसे में जान-माल का भारी नुकसान होगा। ऐसे में मंत्री जी का बयान या तो कश्मीर के डूबने के खतरे को ताक पर रख कर बोला गया है या बड़बोलेपन में।इसके अलावा भारत अभी संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता पाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में एक ऐसे मसले को कुरेदना जिसे संयुक्त राष्ट्र ने करवाया हो, भारत की स्थायी सदस्यता को खतरे में डाल सकता है।

इस प्रकार कानूनी तौर पर तो इन नदियों का पानी मोड़ने मे कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन सही तारीके से इस कदम के लिए भारत खुद अभी तैयार नहीं है।

फिलहाल मंत्री जी के मंत्रालय के लोगों ने ट्वीट कर के यह कहा है कि यह फैसला कोई नया नहीं है और इसपर कई सालों से काम चल रहा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यह फैसला माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा लिया गया है।

बदले में पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्री ख्वाजा सुहैल ने कहा है कि उन्हे इस फैसले के न तो कोइ चिंता है न कोई आपत्ति। भारत का हक जिन नदियों पर है उसका वो कुछ भी कर सकता है।

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