अब्दुल वाहिद शेख

शहीद आज़मी किसी भी तरह से परिचय के मोहताज नहीं हैं लाखों पढने वालों और हक पसंद लोगों को प्रेरणा शाहिद आज़मी से मिलती रही है अपनी ज़िन्दगी में शाहिद ने जितना लोगो के हित में काम किया उससे ज्यादा उनके शहीद होने के बाद वह लोगो के काम आ रहे हैं 1992 में टाडा के तहत 7 साल दिल्ली के तिहाड़ जेल में रहे हैं गिरफ्तारी के समय उनकी उम्र महज़ 15 साल थी

तस्वीर गूगल से ली गयी है

भाई अब्दुल वाहिद शेख भी जो मुम्बई ट्रैन धमाके के मामले में 9 साल जेल में रहने के बाद बाइज़्ज़त बरी कर दिए गए थे अब वकील बन चुके है, वाहिद भाई को जब गिरफ्तार किया गया था तब वाहिद भाई ने MA किया था और जेल जाने से पहले पीएचडी करने की सोच रहे थे, वाहिद जब जेल में ही थे तब उनके वकील शाहिद आज़मी को गोली मार दी गयी तब उन्होंने वकील बनने का इरादा किया और आगे पढ़ाई करने की परमिशन मांगी,
बरहाल अब अब वकालत पूरी हो गयी है और वाहिद भाई आतंकवाद के मामलो में फंसे लोगों के मुकदमे खुद लड़ेंगे
जेल से निकलने के बाद वो innocence netwrok का हिस्सा थे जो पीड़ित परिवारों के लोगो ने बनाया था और अपने साथ पकड़े गए बेकुसूर लोगो की रिहाई के लिए प्रयासरत थे.

असल सवाल तो सिस्टम और उन अधिकारीयों से किया जाना चाहिए जो बिना किसी बुनियादी सबूत के नौजवानों को उठाते हैं और उनकी पूरी जवानी जेल में कटवा देते हैं. सवाल यह भी उठता है की आखिर कब तक हमारे देश में शाहिद आज़मी लोग बनते रहेंगे और कब तक यह सिस्टम उनसे इन्साफ करेगा… 

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