तस्वीर गूगल से ली गयी है

सल्तनत उस्मानिया के आखरी खलीफा अब्दुल हमीद सानी ने 1876 ई में 31 अगस्त को हुकूमत संभाली और उसके साथ ही एक नए दौर का शानदार आगाज हुआ जिसके इख़्तेताम के साथ ही उस्मानी सल्तनत के असर और रसूख का भी खात्मा हुआ
सुल्तान अब्दुल हमीद के दौर का सबसे बड़ा कारनामा इस्तंबूल से मदीना मुनव्वरा तक रेल की पटरी का बिछाना था जिसे “हिजाज रेलवे ” का नाम दिया गया था इससे दारूस्सल्तनत और दीगर शहरों से हज बैतुल्लाह के लिए सफर करने में जबरदस्त आसानियां पैदा हुई

यहूदियों की उस बदनाम जमाना पेशकश को ठुकराने वाले भी सुल्तान अब्दुल हमीद ही थे कि अगर फलस्तीन यहूदियों को दे दिया जाए तो वह सल्तनत उस्मानिया का तमाम कर्जा उतार देंगे

इस मौके पर सुल्तान की तरफ से बोले गए शब्द आज भी तारीख में सुनहरे अक्षरों में लिखे हैं
मैं सर जमीन फलस्तीन का एक भी इंच यहूदियों को नहीं दूंगा क्योंकि फलस्तीन मेरा नहीं बल्कि उम्मत का है और उम्मत ने इस सरजमीन की हिफाजत के लिए अपना खून बहाया है
1909 ई में इस हकूमत का खात्मा कर दिया और इसी तरह उस्मानी सल्तनत का असर व रसूख हमेशा के लिए खत्म हो गया यहां तक कि 1924 ई ख़िलाफ़त का भी खात्मा हो गया

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