तस्वीर गूगल से ली गयी है

न्यूज चैनलों के तमाम तरह के व्यावसायिक पैटर्न के साथ एक पैटर्न यह भी रहा है कि वो जब-तब सिनेमाई चरित्रों जैसे बंटी-बबली से लेकर नेताओं से एंकरिंग करवाते हैं. इससे उनकी व्यूअरशिप बढ़ती है और इधर नेताओं का भी शौक पूरा हो जाता है.

फिलहाल न्यूज चैनलों पर जिस तरह की भाषा एंकर इस्तेमाल कर रहे हैं और कांग्रेस की प्रियंका गांधी जिस सहज, प्रभावशाली और गरिमापूर्ण ढंग से हिन्दी में लोगों को संबोधित कर रहीं हैं, किसी समझदार चैनल को तुरंत उनसे अनुरोध करना चाहिए कि आप एक शो में एंकरिंग कर दें.

यकीं मानिए. वो शो उन दर्जनों न्यूज एंकरों के लिए अपने भीतर झांकने का जरिया होगा जो दिमागी तौर पर पूरी तरह करप्ट हो चुके हैं और भाषा की हत्या तो बहुत पहले ही कर चुके हैं. उनके भीतर हिन्दी को लेकर रत्तीभर भी लगाव बचा होगा तो सुनकर आकलन कर सकेंगे कि उन्होंने एक बेहद सुंदर भाषा को कैसे बेलौस बना दिया है.

मुझे पता है कि प्रियंका गांधी के ऐसा करते ही बाकी लोगों में भी होड़ मत जाएगी लेकिन लोगों को थोड़ी देर के लिए ही सही, महसूस तो होगा कि जिन एंकरों ने दुनिया बेहतर करने का जिम्मा अपने उपर लिया हुआ है, जिनके भीतर राष्ट्रभक्ति उफान पर होती है, उन्होंने भाषा के किस हालत में पहुंचा दिया.

इन सबके बीच जिस शालीनता से प्रियंका गांधी अपनी बात सहज और आत्मीय भाषा के साथ रख रही हैं, वो अपनी राजनीति के साथ-साथ हिन्दी बरतने वाली, हिन्दी की बेटी के रूप में जानी जाएंगी.

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