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 आज देश ही नहीं पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय कैंसर दिवस मनाया जा रहा है। कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। शोध से पता चला है, कि पिछले कुछ वर्षों में सबसे ज्यादा लोगों की मौत इसी बीमारी से हुई है। अब यह बीमारी पूरी दुनिया में गंभीर रूप लेती जा रही है। इसकी वजह आधुनिक जीवनशैली से लेकर खान-पान और पर्यावरण में आ रहे नकारात्मक बदलाव हैं। इसकी भयावहता तो देखते हुए इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 2005 से 4 फरवरी के दिन को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरुआत हुई। हर साल यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (UICC) 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस का आयोजन करता है।

 World Cancer Day 2020: दुनिया भर में आज यानी की 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे के रूप में मनाया जा रहा है. इस बार विश्व कैंसर दिवस 2020 की थीम (World Cancer Day 2020 Theme) आई एम एंड आई विल (I Am and I Will) रखी गई है. विश्व स्तर पर कैंसर से जूझ रहे लोगों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, हर साल 21 लाख महिलाएं स्तन (ब्रेस्ट) कैंसर की चपेट में आती है. भारत के आंकड़ों पर नजर डालें तो डब्लूएचओ के मुताबिक, हर 28वीं महिला को किसी ने किसी रूप में ब्रेस्ट कैंसर होता है. डब्लूएचओ का कहना है कि भारत में महिलाओं को कैंसर के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है.

हर 8 मौतों में से 1 कैंसर की वजह से

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation- WHO) के अनुसार, दुनिया में हर साल होने वाली 6 मौतों में 1 की वजह कैंसर है। ब्रेस्ट, सर्वाइकल, प्रोस्टेट, मुंह और बड़ी आंत के कैंसर के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ा है। वहीं, पुरुषों में सबसे ज्यादा तादाद फैफड़े के कैंसर के मरीजों की है, जो कि 10.6 फीसदी है। वहीं, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संख्या 27.5 फीसदी है। इंडियन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, भारत में अगले 10 सालों में लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को कैंसर होने की आशंका है। कहा जा रहा है कि इसमें 50 फीसदी कैंसर लाइलाज होगा।

12 प्रकार का होता है ब्रेस्ट कैंसर
डब्लूएचओ के मुताबिक, केवल ब्रेस्ट कैंसर ही 12 प्रकार का होता है. दुर्भाग्यवश इसको लेकर ज्यादातर महिलाओं में जागरुकता का अभाव है. इसलिए विश्व कैंसर दिवस के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण क्या हो सकते हैं और यह कैसे शरीर बनते हैं. साथ ही ब्रेस्ट कैंसर के उपाय क्या हैं. डॉक्टरों के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर में कैंसर सेल्स ब्रेस्ट के टिश्यूज में बनते हैं. ब्रेस्ट के बाद ये टिश्यूज पूरे शरीर में फैल जाते हैं. कुछ मामलों में ब्रेस्ट कैंसर वायु प्रदूषण से हो सकता है.

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण को पहचानें

  • चेहरे और शरीर की स्किन में सूजन, लालिमा का होना
  • ब्रेस्ट के साइज में बदलाव होना
  • निप्पल और ब्रेस्ट में दर्द रहना या सूजन
  • निप्पल में खून का आना
  • आर्मपिट में लंप का देखना
  • ब्रेस्ट और आसपास के हिस्सों में खुजली रहना या लगातार सूजन का बना रहना
  • स्तनों को दबाने पर तेज दर्द महसूस होना

 किसी भी महिला को ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई भी समझ आता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें.

ब्रेस्ट कैंसर का कारण क्या है?

  •  एक उम्र तक गर्भधारण न करना
  • ज्यादा उम्र के बाद गर्भवती होना
  • शिशु को स्तनपान न करवाना
  • वजन का अचानक तेजी से बढ़ना
  • अनियंत्रित लाइफस्टाइल
  • ज्यादा मात्रा में शराब का सेवन करना

कैसे करें ब्रेस्ट कैंसर से बचाव

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए सबसे जरूरी है नियंत्रित खानपान होना
  • ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए सबसे जरूरी है हेल्दी लाइट डाइट को फॉलो करना
  • अगर, आपको कैंसर के लक्षणों में से कोई भी नजर आता है तो शराब का सेवन करना बंद कर दे
  • ब्रेस्ट कैंसर से निजात सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरिपी या फिर हार्मोन थेरेपी को अपनाया जाता है

 विश्व कैंसर दिवस पर जानें इन बॉलीवुड हस्तियों ने कैसे जीती कैंसर से जंग

सोनाली बेंद्रे
सोनाली बेंद्रे (Sonali Bendre) मेटास्टेटिक कैंसर (Metastatic Cancer) से जंग लड़ चुकी हैं. सोनाली बेंद्र ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी थी. सोनाली बेंद्रे ने न्यूयॉर्क में इलाज करवाया था.  सोनाली ने 1994 में रिलीज हुई फिल्म ‘आग’ से फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री की थी. इसके बाद सोनाली ने ‘सरफरोश’, ‘हम साथ साथ हैं’ जैसी फिल्मों में अपने शानदार एक्टिंग से काफी छा गईं. उन्होंने शाहरुख खान की फिल्म ‘कल हो ना हो’ में एक्टिंग की है. सोनाली कई टीवी शोज जैसे ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’, ‘इंडियन आइडल 4’ जैसे शो में जज की भूमिका में नजर आ चुकी हैं.

मनीषा कोइराला 
मनीषा कोइराला (Manisha Koirala) ने बॉलीवुड फिल्म ‘सौदागर’ से डेब्यू किया था और उनका सॉन्ग ‘ईलू ईलू’ खूब लोकप्रिय भी हुआ था. सलमान के साथ उनकी फिल्म ‘खामोशी’ को भी खूब पसंद किया गया था. मनीषा कोइराला को 42 साल की उम्र में, उन्हें ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) का पता चला था जिसके लिए उन्होंने न्यूयॉर्क में इलाज कराया. कई सर्जरी और कीमोथेरेपी के बाद, उन्हें 2015 में कैंसर-मुक्त घोषित किया गया था.

लीसा रे
2009 में, भारतीय मूल की अभिनेत्री को Multiple Myeloma (एक अन्य प्रकार का ब्लड कैंसर) का पता चला था. लीसा रे एक साल से अधिक समय तक कैंसर से लड़ीं और 2010 में कैंसर मुक्त हुईं. एक्ट्रेस लीसा रे को सबसे ज्यादा पॉपुलेरिटी नुसरत फतेह अली खान के गाने आफरीन आफरीन से मिली थी. लीसा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 2001 में आई फिल्म ‘कसूर’ (Kasoor) से की थी. हाल ही में लीसा रे का पहला संस्मरण ‘इन क्लोज टू द बोन’ (In Close To The Bone) रिलीज हुआ है. इस किताब में एक्ट्रेस ने कैंसर को हराने की कहानी लिखी है.

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