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भारत देश के अन्दर UPSC की परीक्षा सब ऊपर मानी जाती है इतनी मुश्किल होने के बावजूद भी लड़कियां हमेशा अपनी जगह बनाये रखती है, इस देश में महिलाएं कंधे से कन्धा मिला कर चलने में विश्वास रखती हैं और चल भी रही हैं

भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। इस परीक्षा में बैठने वाले लोग वे होते हैं जिनका पूरा करियर सफलताओं से भरा होता है, सामान्य विद्यार्थियों के लिए इस परीक्षा में पास होना सपने से कम नहीं होता। लेकिन रुक्मणी रायर हैं जो एक तरफ तो अपनी छठवीं की परीक्षा में फेल होती हैं और दूसरी तरफ बिना किसी कोचिंग के भारत की सबसे कठिन परीक्षा पास करती हैं।

अविश्वनीय किन्तु सत्य है, रुक्मणी को बहुत साल पहले डलहौज़ी के एक बोर्डिंग स्कूल में डाला गया। अचानक हुए परिवर्तन से रुक्मणी स्कूल में एडजस्ट नहीं हो पा रही थीं। बोर्डिंग स्कूल के दबाव से उनकी पढ़ाई पर भी असर हो रहा था। लगातार उनकी पढ़ाई का स्तर नीचे जा रहा था और छठवीं की परीक्षा में रुक्मणी फेल तक हो गई।

रुक्मणी रिजल्ट के बहुत दिनों तक डिप्रेशन में रही। नन्हीं सी रुक्मणी के दिल और दिमाग पर बेहद गहरा प्रभाव पड़ा।  वह अपने दोस्तों से, अपने परिवार वालों से और यहाँ तक अपने माता-पिता से भी बात करने में शर्मिंदगी महसूस करने लगी। लेकिन इन सबसे वे बहुत मज़बूती से बाहर आईं और यह उनके लिए जिंदगी का एक बड़ा सबक था और इस सबक से उन्होंने बहुत कुछ सीखा।

रुक्मणी की जिंदगी फिर से चल पड़ी पूरे उत्साह के साथ। रुक्मणी ने अपनी इस असफलता से सीख हासिल की और इस तरह के दौर को वापस कभी अपनी जिंदगी में नहीं आने दिया। अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद रुक्मणी ने टाटा स्कूल ऑफ़ सोशल साइंस से सोशल इंटरप्रिन्योरशिप की डिग्री हासिल की। रुक्मणी ने अपने सारे सेमेस्टर में टॉप किया और असफलता ने उनको छुआ तक नहीं।

अपनी डिग्री पूरी करने के बाद रुक्मणी ने बहुत सारे एनजीओ के साथ काम किया और देश की बेहतरी के लिए समाज में उठाये गए क़दमों पर चली। समाज की स्थिति सुधारने के लिए रुक्मणी ने लोकसेवा के जरिये काम करने को सोचा। उन्होंने राजनीतिशास्त्र और सोशियोलॉजी को अपना विषय चुना और पूरी तरह से दृढ़ होकर बिना कोचिंग के पढ़ाई शुरू कर दी।

जब 2011 के यूपीएससी की परीक्षा का परिणाम आया तब रुक्मणी ने पुरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। मेहनत, योजना और हठ ही रुक्मणी का मूलमन्त्र है। रुक्मणी एक जीता-जागता उदाहरण है कि लोग अपनी असफलता से पार पाकर कैसे सफलता का स्वाद चख सकें।

 

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