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एक तरफ जहाँ हमारे देश में एक से चौदह वर्ष तक के बच्चों को मुफ़्त एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है और साथ ही बाल शिक्षा  के लिए तरह-तरह उपाय किये जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर बाल मजदूरी संबंधी दृश्य इस तरह के नियमों पर ही गंभीरता से सवाल खड़े कर रहा है, आज वास्तव में स्थिति तो ये है कि 14 वर्ष की उम्र से कम उम्र के बच्चों को बाल श्रम जैसे कार्यों में बड़ी संख्या में लिप्त किया जा रहा है कि एक ओर जहाँ जिन मासूमों के हाथों में किताब-कापियाँ होनी चाहिए तो वहाँ उनके कोमल हाथों द्वारा आज ईंटे-बोरियाँ उठवाई जाती हैं, होटलों में बर्तन धुलवाए जाते हैं, शादी-ब्याह के अवसरों पर इन्ही बच्चों से जूठे बर्तन उठवाए और साफ कराये जाते हैं, शराब के ठेकों पर बोतलें और कैन्स बिनवाई जाती हैं, साफ- सफाई करवाई जाती हैं और तो और यही बच्चे कूड़ा बीनने व भीख माँगने को मजबूर किये जाते हैं इस सबका उदाहरण आप स्वयं कानपुर महानगर में देख सकते हैं ।

वास्तव में ये बच्चे ही देश के भविष्य हैं अगर इन्हें शिक्षा न प्रदान करते हुए इसी तरह से बाल मजदूरी कराई जाती रही तो वो दिन दूर नहीं कि जब हमारा देश पिछड़ता ही चला जायेगा इस ओर शासन प्रशासन को विशेष तौर पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

भारतीय संविधान के मुताबिक़ किसी उद्योग, कल – कारखाने या किसी कंपनी में मानसिक या शारीरिक श्रम करने वाले 5 – 14 वर्ष उम्र के बच्चों को बाल श्रमिक कहा जाता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक़ – 18 वर्ष से कम उम्र के श्रम करने वाले लोग बाल श्रमिक हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक़ – बाल श्रम की उम्र 15 साल तय की गई है।

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किन – किन रूपों में होता है बाल श्रम ?

  • बाल मज़दूर – वे बच्चे जो कारखानों, कार्यशालाओं, प्रतिष्ठानों, खानों और घरेलू श्रम जैसे सेवा क्षेत्र में मज़दूरी या बिना मज़दूरी में काम कर रहे हैं।
  • गली – मोहल्ले के बच्चे – कूड़ा बीनने वाले, अखबार और फेरी लगाने वाले और भीख मांगने वाले।
  • बंधुआ बच्चे – वे बच्चे जिन्हें या तो उनके माता-पिता ने पैसों की ख़ातिर गिरवी रखा है या जो कर्ज़ को चुकाने के चलने मज़बूरन काम कर रहे हैं
  • वर्किंग चिल्ड्रन – वे बच्चे जो कृषि में और घर-गृहस्थी के काम में पारिवारिक श्रम का हिस्सा हैं
  • यौन शोषण के लिए इस्तेमाल किए गए बच्चे – हजारों बालिक बच्चे और नाबालिक लड़कियां यौन शोषण की जद में हैं
  • घरेलू गतिविधियों में लगे बच्चे – घरेलू सहायता के रूप में काम। इसमें लड़कियों का शोषण सबसे ज़्यादा है – बच्चे छोटे भाई-बहनों की देखभाल, खाना पकाने, साफ-सफाई और ऐसी अन्य घरेलू गतिविधियों में लगे हुए हैं।

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इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन ILO क्या है?

इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन की स्थापना 1919 में हुई है। ये संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी के रूप में काम करती है। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। इसका मक़सद विश्व में श्रम मानकों को स्थापित करना और श्रमिकों की अवस्था और आवास में सुधार करना है।

 

United Nations Convention on the Rights of the Child

बाल अधिकारों पर “संयुक्त राष्ट्र समझौता”(UNCRC) 1989 में बना एक क़ानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय समझौता है। इस समझौते में जाति, धर्म को दरकिनार करते हुए हर बच्चे के नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की स्थापना की गई है। इस समझौते पर कुल 194 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के मुताबिक़ (UNCRC) पर दस्तख़त करने वाले सभी देशों का ये कर्तव्य है कि वे बच्चों को निःशुल्क और ज़रूरी प्राथमिक शिक्षा प्रदान करे.

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बाल श्रम से सम्बंधित कुछ आंकड़े

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया में कुल -152 मिलियन बच्चे बाल मज़दूरी करते हैं. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ILO मुताबिक़ – दुनिया भर में बाल श्रम में शामिल 152 मिलियन बच्चों में से 73 मिलियन बच्चे खतरनाक काम करते हैं. इन ख़तरनाक कामों में मैनुअल सफाई, निर्माण, कृषि, खदानों, कारखानों और फेरी वाला व घरेलू सहायक जैसे काम शामिल है।बीते कुल सालों में ख़तरनाक कामों में शुमार 5 से 11 वर्ष की उम्र के बच्चों की संख्या बढ़कर 19 मिलियन हो गई है. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में क़रीब 43 लाख से अधिक बच्चे बाल मज़दूरी करते हुए पाए गए. UNICEF के अनुसार दुनिया भर के कुल बाल मज़दूरों में 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी अकेले भारत की है। ग़ैरसरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में – क़रीब – 5 करोड़ बाल मज़दूर हैं.

 

बाल श्रम से उत्पन्न समस्या

बाल श्रम एक सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय समस्या है। इसके चलते –

  • बच्चे शिक्षा से दूर हो जाते हैं
  • स्वास्थ्य पर बुरा असर
  • बच्चों से दुर्व्यवहार
  • विस्थापन और असुरक्षित प्रवासन
  • यौन शोषण के लिए ग़ैर क़ानूनी ख़रीद – फ़रोख़्त (चाइल्ड पोर्नग्राफी)
  • भिक्षावृत्ति,
  • मानवअंगों का कारोबार
  • बाल अपराध
  • खेल कूद और मनोरंजन जैसे ज़रूरी गतिविधियां प्रभावित

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बाल श्रम के लिए संवैधानिक प्रावधान

  • संविधान ने बाल मज़दूरी पर लगाम लगाने के लिए कई क़ानून बनाए हैं।
  • अनुच्छेद 15 (3) – बच्चों के लिए अलग से क़ानून बनाने का अधिकार देता है
  • अनुच्छेद 21 – (6 -14) वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार
  • अनुच्छेद 23 – बच्चों की ख़रीद और बिक्री पर रोक लगाता है
  • अनुच्छेद 24 – 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ख़तरनाक कामों में प्रतिबन्ध
  • अनुच्छेद 39 – नीति निर्देशक सिद्धांत के अंतर्गत आने वाला ये अनुच्छेद में बच्चों के स्वास्थ्य और उनके शारीरिक विकास के लिए ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आदेश देता है।
  • अनुछेद 45 – नीति निर्देशक सिद्धांत के अंतर्गत आने वाला इस अनुच्छेद में भी 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की देखभाल और शिक्षा की ज़िम्मेदारी राज्यों की है।
  • अनुच्छेद 51 A – माता पिता पर बच्चों की शिक्षा के लिए अवसर प्रदान करने का एक मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है

 

बाल श्रम के लिए भारत में काम कर रहे गैर सरकारी संगठन व सरकारी संगठन-

  • बचपन बचाओं आंदोलन
  • कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन
  • CRY – Child Rights and You
  • Save the Childern
  • प्रथम संगठन
  • चाइल्ड फण्ड
  • तलाश एसोसिएशन
  • RIDE India

 

 

 

 

 

 

 

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