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पिछले लगभग 2 महीनों से एक कानून से परिचित हो गए हें और वही कानून सबकी ज़बान पर है सेक्शन 124a (sedition law)

2[124राजद्रोह–जो कोई बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा, या दृश्यरूपण द्वारा या अन्यथा 3।।। 4[भारत] 5।।। में विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घॄणा या अवमान पैदा करेगा, या पैदा करने का, प्रयत्न करेगा या अप्रीति प्रदीप्त करेगा, या प्रदीप्त करने का प्रयत्न करेगा, वह 6[आजीवन कारावास] से, जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा या तीन वर्ष तक के कारावास से, जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा या जुर्माने से दंडित किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण 1–“अप्रीति” पद के अंतर्गत अभक्ति और शत्रुता की समस्त भावनाएं आती हैं ।

स्पष्टीकरण 2–घॄणा, अवमान या अप्रीति को प्रदीप्त किए बिना या प्रदीप्त करने का प्रयत्न किए बिना, सरकार के कामों के प्रति विधिपूर्ण साधनों द्वारा उनको परिवर्तित कराने की दृष्टि से अननुमोदन प्रकट करने वाली टीका-टिप्पणियां इस धारा के अधीन अपराध नहीं हैं ।

स्पष्टीकरण 3–घॄणा, अवमान या अप्रीति को प्रदीप्त किए बिना या प्रदीप्त करने का प्रयत्न किए बिना, सरकार की प्रशासनिक या अन्य व्रिEया के प्रति अनुमोदन प्रकट करने वाली टीका-टिप्पणियां इस धारा के अधीन अपराध गठित नहीं करती ।]

उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्णाटक और देश के कई निवासियों पर राजद्रोह का कानून लगाया जा रहा है इसकी वजह केवल सर्कार के खिलाफ बोलना है जबकि संविधान के अन्दर सरकार के खिलाफ बोलना कोई अपराध नहीं है आप सरकार की आलोचना कर सकते हैं और सरकार के काम को सराह भी सकते हैं और यही लोकतंत्र की ख़ूबसूरती है.

CAA, NRC और NPR के खिलाफ हुए प्रदर्शन को लेकर भारतीय सरकार काफी नाराज़ नज़र आ रही है जिसके चलते सरकार और प्रशन ने कई लोगों पर राजद्रोह/sedition का मुकदमा दर्ज किया है अब सवाल यह उठता है की राजद्रोह जैसा कानून आखिर प्रशासन अपने ही देश के निर्दोष लोगों पर क्यों लगा रहा है.

ऐसे ही 9 फरवरी 2016 के बाद से जे.एन.यू मे हुए विवाद के कारण जे एन यू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत 9  छात्रो पर सेडिशन का चार्ज लगाया गया था पुलिस का कहना है की इन सभी ने देश को तोड़ने वाले नारे लगाए थे इन सबने नारे लगाए थे या नहीं यह विवाद दूसरा है यह लोग पहले नहीं हैं जिनपर सेडिशन का चार्ज लगाया गया है बल्कि इससे पहले भी कईयों पर ये चार्ज लग चुका है।

सेडिशन लॉं हिंदुस्तान के 1870 मे ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाया गया था इसके अंतर्गत जो भी व्यक्ति देश के खिलाफ जाता है या देश को तोड़ने की बात करता है उस पर यह कानून लगाया जाता है लेकिन भारतीय कानून विशेषज्ञों का कहना है की यह कानून ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भारतीय विद्रोह को दबाने के लिए लाया गया था इतिहासकार अर्जुन देव का कहना है की “ राजद्रोह राजनीतिक प्रशिक्षणों के अधिकांश का एक हिस्सा है”

अपने जीवन भर मे बाल गंगाधर तिलक को भी दो बार सेडिशन कानून के तहत जेल जाना पड़ा। पहली बार 1897 मे, फिर 1898 मे उनको छोड़ दिया गया उनके खिलाफ आरोप था की वह सरकार के खिलाफ लोगो को भड़काने का कार्य करते हैं और दूसरी बार 1906 मे उन्हे सेडिशन कानून के तहत ही 6 साल की जेल हो गयी।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी 6 साल की सज़ा सेडिशन कानून के तहत सुनाई गयी क्योकि वह एक साप्ताहिक अखबार के लिए लेख लिखा करते थे और ज़ाहिर है की वह लेख ब्रिटिश सरकार के खिलाफ ही होता था॥ गांधी जी का कहना था की लोगो को सरकार के प्रति अपनी असहमति ज़ाहिर करने की पूर्ण रूप से आज़ादी होनी चाहिए लेकिन उस असहमति मे किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होनी चाहिए।

आज़ादी के बाद सन 1951 मे देश के प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपनी पारलियामेंटरी स्पीच मे इस कानून की जमकर आलोचना की और इसे अत्यधिक आपत्तीजनक और घ्रणित बताया और जितनी जल्दी हो सके छुटकारा पाने की बात काही॥

इसके अलावा भी देश के कई नागरिकों पर भी सेडिशन का चार्ज लगाया गया। जिसको भी सरकार अपने खिलाफ समझती है उसपर सेडिशन का कानून लगा देती है चाहे वह असीम त्रिवेदी हो या बिनायक सेन, चाहे वह केदार नाथ सिंह हो या अरुंधति रॉय………

असीम त्रिवेदी पर यह आरोप है की उन्होने राष्ट्र प्रतीक (अशोक चिन्ह) के साथ छेड़ छाड़ की है जबकि केदार नाथ सिंह और बिनायक सेन समाज सेवा के लिए दोषी हैं ऐसी समाज सेवा जिसमे सरकार का काला चेहरा सामने आने का डर रहता है और अरुंधति रॉय पर आरोप “नर्मदा बचाओ आंदोलन” के दौरान लगाया गया था।

कइयों का कहना है की सेडिशन का कानून सही नहीं है और जो इस कानून के पक्ष मे हैं वो देश की एकता अखंडता  को बचाए रखने के लिए इसे ज़रूरी मानते हैं। इस कानून को सरकार कब तक अपने खिलाफ आवाज़ उठाने वालों पर लगाती रहेगी यह कोई नहीं जनता, यह कानून कब खत्म होगा इसके बारे मे भी कुछ नहीं कहा जा सकता।

 

 

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