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भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को भारत के संविधान द्वारा प्रदान किया जाता है, जिसे वर्ष 1949 में 26 नवंबर को अपनाया गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी, 1950 को उपयोग में लाया गया ये ऐसे अधिकार हैं जो आपातकाल को छोड़कर किसी भी परिस्थिति में आपसे नहीं लिए जा सकते हैं, इसीलिए इन्हें जानना बहुत जरूरी हो जाता है.

समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
जिसमें कहा गया है कि कानून के सामने हर इंसान को बराबरी का हक़ है, वो चाहे किसी मज़हब, जाति, रंग, लिंग वगैरह का हो । अनुच्छेद 15 कहता है कि राज्य किसी भी नागरिक के खिलाफ केवल धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, या उनमें से किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा। लेकिन इस अधिकार के ज़रिये कुछ भी राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए कोई विशेष प्रावधान बनाने से नहीं रोकेगा। किसी भी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के नागरिकों की उन्नति के
लिए या अनुसूचित जाति के लिए राज्य को कानून द्वारा कोई विशेष प्रावधान बनाने से नहीं रोकेगा।(अनुच्छेद 19)
अनुच्छेद 16 (अनुच्छेद १ Ab): अस्पृश्यता का उन्मूलन अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है और किसी भी रूप में इसके अभ्यास को मना करता है। अस्पृश्यता एक सामाजिक प्रथा को संदर्भित करती है जो कुछ उत्पीड़ित वर्गों को पूरी तरह से उनके जन्म के आधार पर नीचे देखती है और इस आधार पर उनके खिलाफ कोई भी भेदभाव करती है।

इसी तरह से यह मौलिक अधिकार रोज़गार के मौकों में कोई नाइंसाफी या भेदभाव होने से रोकता है और पिछड़े तपके के लिए आरक्षण की सहूलियत देता है (अनुच्छेद 16)
इसी में (अनुच्छेद 17) के ज़रिये अछूतता को बैन किया गया है अनुच्छेद 18 राज्य को किसी भी नागरिक या गैर-नागरिक पर खिताब प्रदान करने के लिए प्रतिबंधित करता है। हालांकि, सैन्य और शैक्षणिक भेदों को निषेध से छूट दी गई है।

स्वतंत्रता का अधिकार:(अनुच्छेद 19)
स्वतंत्रता का अधिकार भारत के नागरिकों को छह मौलिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है:

1) भाषण और अभिव्यक्ति(expression) की स्वतंत्रता,

2) सभा की स्वतंत्रता,

3) संघों को बनाने की स्वतंत्रता,

4) आंदोलनकी स्वतंत्रता,

5) बसने की स्वतंत्रता और

6) पेशे, व्यवसाय, व्यापार या व्यवसाय की स्वतंत्रता।

अनुच्छेद 20 अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए मनमानी और अत्यधिक सजा से सुरक्षा प्रदान करता है। अनुच्छेद 21 कहता है कि कोई भी व्यक्ति कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार अपने जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं होगा।
सबसे पहले, अनुच्छेद 22 प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार की गारंटी देता है जिसे उसकी गिरफ्तारी के कारण के बारे में सूचित किया जाता है; दूसरी बात, अपनी पसंद के वकील द्वारा परामर्श करने और बचाव करने का उसका अधिकार। तीसरा, हिरासत में लिए गए और हिरासत में लिए गए प्रत्येक व्यक्ति को चौबीस घंटे की अवधि के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा और उसे केवल उसके अधिकार के साथ निरंतर हिरासत में रखा जाएगा।

शोषण के खिलाफ अधिकार (अनुच्छेद 23-24)

किसी भी इंसान से उसकी मर्ज़ी के खिलाफ कोई नौकरी या श्रम नहीं कराया जा सकता है। 12 साल से कम उम्र के बच्चों से कोई नौकरी कराना और 14 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐसी नौकरी जिसमे नुकसानदेह परिस्तिथि शम्मिल हो (जैसे केमिकल, धुआं, वगैरह) कराने पर बैन है।

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (लेख 25 और 26)
सभी धर्मों के लिए समान सम्मान। हर इंसान को अपना धर्म मानने और उसके हिसाब से अपनी ज़िन्दगी जीने का पूरा हक़ है. वो उस धर्म के नियमों और तहज़ीब को अपनाने के लिए आज़ाद है.

अल्पसंख्यकों के अधिकार (सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार) (अनुच्छेद 29-30)
अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा प्रदान करता है। एक अल्पसंख्यक समुदाय एक शैक्षिक संस्थान के माध्यम से और इसके माध्यम से अपनी भाषा या संस्कृति का संरक्षण कर सकता है।

संवैधानिक उपचार का अधिकार (अनुच्छेद 32-35)
यह अधिकार आपको आज़ादी देता है की अगर आपका कोई मौलिक अधिकार आपसे छीना जा रहा है या नहीं दिया जा रहा है तो आप इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट आपको आपके अधिकार देने के लिए न्याय पालिका को आर्डर दे सकती है

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