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आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्ला खान के परिजनों को उस समय उत्तर प्रदेश पुलिस ने बुरी तरह से पीटा, जब उन्होंने जिला मेरठ के परीक्षितगढ़ थाने के पास दिल्ली विधानसभा के चुनावों में अपने रिश्तेदार विधायक अमानतुल्ला खान के  चुनाव में जीतने पर जीत का जश्न मानाने की कोशिश की तभी पुलिस ने उन्हें बुरी तरह से मारा.

AAP के सिटिंग विधायक अमानतुल्ला खान ने ओखला निर्वाचन क्षेत्र से दिल्ली राज्य के हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा के ब्रह्मा सिंह को 71, 827 मतों के रिकॉर्ड अंतर से हराया, इस सीट में शाहीन बाग और जामिया का क्षेत्र भी आते हैं, जो इन चुनावों से इतर बीजेपी यानि हालिया केंद्र सरकार का जम के CAA और NRC,NPR पर पहेले से विरोध कर रही है .

मंगलवार शाम को अमानतुल्ला खान की जीत की घोषणा के तुरंत बाद, उनके गांव अगवानपुर में उनके रिश्तेदारों ने जश्न शुरू किया। इस पर, पुलिस वहां पहुंची और AAP विधायक के रिश्तेदारों और ग्रामीणों पर उन्होंने उन्हें  खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया।

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यहा तक के पुरुष पुलिस ने कथित रूप से युवा लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने एक लड़की के बाल खींचे और उसे गांव की सड़कों पर घसीटा यह उत्तर प्रदेश पुलिस की भयावह तस्वीर है, कि कानून के नियमो को ताक़ पर रख कर उत्तर प्रदेश पुलिस काम कर रही है , अगर कुछ गलत हो भी रहा था तो महिला पुलिस को साथ क्यों नही लाया गया. ग्रामीणों के खिलाफ धारा 144 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है, जिसमें AAP विधायक के रिश्तेदार नूर उल्लाह का नाम प्रमुख रूप से दर्ज किया गया है,और इसके आलावा 13 नामजद और अन्य अज्ञात.

परीक्षितगढ़ पुलिस थाने के एसएचओ कैलाश चंद ने बताया कि उनके खिलाफ धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज किया गया है और उन्होंने पुलिस की ज्यादती से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “ग्रामीण एक जुलूस निकाल रहे थे और हमने उन्हें रोक दिया क्योंकि जिले में धारा 144 लागू थी।

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“तेजी से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, AAP विधायक अमानतुल्ला खान ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आता कि मेरे कुछ रिश्तेदारों द्वारा मेरी जीत पर मेरे पैतृक गांव में जश्न में क्या गलत था। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की घटनाएं भाजपा और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की नफरत की राजनीति का नतीजा हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे मंगलवार शाम को घोषित होने के बाद AAP विधायक अमानतुल्ला के रिश्तेदार एक-दूसरे को मिठाइयां बांट रहे थे। उन्होंने इस  जीत का जश्न मनाने के लिए “ढोलवाला” को भी बुलाया । अचानक पुलिस वहां पहुंची और उत्सव को रोकने का निर्देश दिया क्योंकि जिले में धारा 144 लागू है। कुछ ग्रामीणों ने पुलिस पर यह कहते हुए आपत्ति जताई कि वे वो सिर्फ़ जश्न मना रहे हैं जिसके बाद पुलिस ने उन्हें भगाने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लिया.

नूर उल्लाह की 17 वर्षीय बेटी नाज़मी ने अपने जुल्म की भयानक कहानी को याद करते हुए कहा कि उसे पुलिस ने धक्का दिया, घसीटा, गालियां दीं और उनमें से एक पुलिस वाले  ने उसका दुपट्टा भी खींच दिया जिससे उसकी गर्दन पर गहरा लाल ज़ख्म का निशान तक पड़ गया

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