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निर्भया गैंगरेप-हत्या मामले में दोषियों को फांसी देने की नई तारीख का ऐलान हो गया है  ये तारीख है आने वाली 3 मार्च 2020 सुबह 6 बजे , मगर दोषियों के सजा पर अमल को लेकर अब भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। जिस तरह से पिछले दो बार से निर्भया के दोषियों की फांसी की सजा टाली गई है, उसने इस बार भी शक को और भी ज्यादा मजबूत कर दिया है। दरअसल, दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को निर्भया से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के चार दोषियों को तीन मार्च को फांसी दिए जाने का निर्देश दिया। हालांकि इस पर अमल को लेकर अब भी संशय बना हुआ है क्योंकि दोषियों में से एक के पास अब भी कानूनी विकल्प बचे हुए हैं। और उनके वकील एस पी के अनुसार वह इस विकल्प का इस्तेमाल करेंगे, और भी अन्य विकल्प मोजूद है.

चारों दोषियों में से एक पवन ही है जिसने अब तक सुधारात्मक याचिका दायर नहीं की है। उसने अब तक दया याचिका भी दायर नहीं की है। उच्चतम न्यायालय के 2014 के फैसले के मुताबिक दया याचिका खारिज होने की जानकारी दिए जाने के बाद मृत्युदंड दिए जाने से पहले किसी व्यक्ति को अनिवार्य रूप से 14 दिन का वक्त दिया जाना जरूरी होता है।

चारों दोषियों में से एक पवन ही है जिसने अब तक सुधारात्मक याचिका दायर नहीं की है। उसने अब तक दया याचिका भी दायर नहीं की है। उच्चतम न्यायालय के 2014 के फैसले के मुताबिक दया याचिका खारिज होने की जानकारी दिए जाने के बाद मृत्युदंड दिए जाने से पहले किसी व्यक्ति को अनिवार्य रूप से 14 दिन का वक्त दिया जाना जरूरी होता है।

अदालत ने कहा कि पवन को दिल्ली उच्च न्यायालय के पांच फरवरी के आदेश के बारे में सूचित किया गया था जिसमें उसे विधिक विकल्पों को अपनाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसने अपील नही की थी । बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 को दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की एक फिजियोथेरेपी प्रशिक्षु के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और उसपर नृशंस हमला किया गया था। बाद में पीड़ता ने सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था। और पूरे भारत में इसके खिलाफ विरोध आन्दोलन हुए थे .

  • बता दे इस केस में अब तक दो बार फांसी टली है
    अदालत ने इससे पहले दो बार डेथ वारंट जारी किए हैं। 22 जनवरी को जारी डेथ वारंट पर अभियुक्तों ने कानूनी विकल्पों का हवाला दिया, जिसके बाद दूसरी बार एक फरवरी के लिए डेथ वारंट जारी किया गया था।
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  • 17 जनवरी 2020 को अभियुक्त मुकेश के अलावा विनय, पवन व अक्षय के पास सुधारात्मक व दया याचिका का विकल्प होने का हवाला दिया गया। अदालत को बताया गया कि इन्होंने अभी अपने विकल्पों का इस्तेमाल नहीं किया है। जबकि अभियुक्त मुकेश की सुधारात्मक याचिका उच्चतम न्यायालय व दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद द्वारा खारिज कर दी गई है। इसके बाद अदालत ने तीनों अभियुक्तों को कानूनी विकल्पों के इस्तेमाल का समय देते हुए नई तारीख तय की।

 

  • एक फरवरी 2020 के लिए जारी दूसरा डेथ वारंट भी टला
    30 जनवरी 2020 को अदालत में एक बार फिर अभियुक्तों के कानूनी अधिकारों का हवाला देते हुए एक फरवरी को होने वाले डेथ वारंट को टालने की गुहार लगाई गई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ए पी सिंह ने अदालत को अभियुक्तों के विकल्प का ब्योरा देते हुए कहा कि विनय की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है,वहीं अक्षय व पवन के पास भी कई कानूनी विकल्प बाकी हैं। अदालत ने 31 जनवरी को अभियुक्तों के विकल्पों के आधार पर सजा पर तामील को टाल दिया था।

 

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