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इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सोमवार को पश्‍तून तहफूज मूवमेंट (पीटीएम) और अवामी वर्कर्स पार्टी  के गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ देशद्रोह के आरोपों लगाने  के लिए पाकिस्तान प्रशासन की कड़ी आलोचना की।

 

पीटीएम के प्रमुख मंज़ूर पश्तीन की गिरफ्तारी के विरोध में इस्लामाबाद पुलिस ने दो संगठनों के कम से कम 23 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। पाकिस्तानी समाचार पोर्टल डॉन डॉट कॉम की रिपोर्ट में उन सभी पर आतंकवाद विरोधी अधिनियम (एटीए) की धारा 124-ए और धारा 7 के तहत आरोप लगाए गए थे।  आज अदालत को सूचित किया गया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी आरोप हटा दिए गए हैं,  इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनल्लाह ने प्रदर्शनकारियों पर राष्ट्रद्रोह के आरोप में इस्लामाबाद प्रशासन की आलोचना की।

इसके साथ ही मिनल्ला ने  पाकिस्तान प्रशासन की बहुत ही कड़ी शब्दों में आलोचना की और सविधान के दायरे में रहा कर और उसपर अमल करते हुए काम करने की सलाह दी .इसके साथ ही उन्होंने इशारो – इशारों में भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि ”यह पाकिस्तान है भारत नहीं यह सविधान के दायरे में रहकर ही काम करना पड़ेगा”.

उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत के कुछ लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत CAA के विरोध प्रदर्शनों करने के आधार पर गिरफ्तार किया गया है,और जानकार इस बयान को इससे ही जोड़ कर देख रहे है.

पाकिस्तानी अखबार (Dawn) ने मुख्य न्यायाधीश की बात का हवाला देते हो   कहा कि ‘’हम उम्मीद नहीं करते हैं कि एक लोकतांत्रिक सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाएगी। मिनल्लाह ने कहा कि एक निर्वाचित सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगा सकती है और उसे आलोचना का डर नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान में सबके संवेधानिक अधिकारों की रक्षा करने की बात भी कही, चाहे वह लोग सरकार ने नाखुश हो उनकी आलोचना करे ये उनका अधिकार है और हम उन्हें ये अधिकार देंगे उन्होंने लोगों से अपील की अगर सरकार उन्हें आन्दोलन करने से रोकती है तो वह अदलात में आये हम उन्हें इज़ाज़त दिलवाएंगे

इस्लामाबाद पुलिस ने पिछले महीने नेशनल प्रेस क्लब के सामने अधिकार-आधारित गठबंधन PTM  के प्रमुख मंज़ूर पश्तीन की गिरफ़्तारी के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे लोगों 23 लोगों को गिरफ़्तार किया था, उन्होंने कथित रूप से कहा था कि 1973 का संविधान बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है।और वह लोग अपने नेता के पक्ष में सिर्फ़ आन्दोलन कर रहे थे, मगर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया .

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