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कश्मीर पुलिस अब (UAPA Act) गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम कानून के तहत सोशल मीडिया साइटों तक पहुंचने वाले वीपीएन उपयोगकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रही है.

कश्मीर पुलिस ने सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को कड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत सोशल मीडिया सेवाओं का उपयोग करने के लिए सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के खिलाफ भी (एफआईआर) दर्ज करने की बात कही  है। यहा पर 25 जनवरी को इंटरनेट पहुंच बहाल करने के कुछ सप्ताह बाद यह कदम उठाया गया था, लेकिन केवल उनमे कुछ वेबसाइटों को शामिल किया गया था जिनमें किसी भी सोशल मीडिया वेबसाइट की सेवाओं को शामिल नहीं किया गया था.

बुधवार को कश्मीर पुलिस द्वारा अपनी वेबसाइट पर साझा की गई एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विभाग का दावा है कि “उपद्रवियों द्वारा सोशल मीडिया साइटों के दुरुपयोग की लगातार खबरें मिली हैं ताकि अलगाववादी विचारधारा का प्रचार किया जा सके और गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके।” हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया कि वीपीएन सर्वर का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का पुलिस का फैसला सोशल मीडिया पर बीमार हुर्रियत नेता सैयद अली गिलानी के एक वीडियो के अपलोड होने के एक दिन बाद आया, जिसमें बताया गया कि गिलानी का वीडियो इसकी एक वजह हो सकता है। मामले में पुलिस ने अचानक कार्रवाई की।

पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर) विजय कुमार ने भी ‘’आम जनता से वीपीएन के माध्यम से सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करने की अपील की है।‘’

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कश्मीर पुलिस ने ये भी कहा कि “विभिन्न वीपीएन के उपयोग से उपद्रवियों द्वारा सोशल मीडिया पोस्टों का संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की गई है, जो कश्मीर घाटी के वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य के संबंध में अफवाहों का प्रचार कर रहे हैं, अलगाववादी विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं और आतंकी इसका फायदा उठा रहे है। पुलिस ने एक बयान में कहा, इस संबंध में बहुत सारी सामग्री जब्त की गई है।

केंद्र ने पिछले साल अगस्त में संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने से पहले क्षेत्र में सभी इंटरनेट का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। जबकि 3 जी और 4 जी सेवाओं का प्रतिबंध अभी भी जारी है, 2 जी सेवाओं को पिछले महीने बहाल किया गया था लेकिन शुरुआत में केवल 301 वेबसाइटों को इस्तेमाल वाली  सूची में रखा गया था, बाद में यह संख्या 1400 से अधिक वेबसाइटों तक बढ़ा दी गई थी।

तो आगे देखना होगा की इस कानून के तहत क्या हालत होते है और कश्मीर में सोशल मीडिया साइट्स और बाकी इन्टरनेट की सेवाए कब शुरू होती है, लोग कब तक इन परेशानियों का सामना करते है.

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