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शाहीन बाग में तक़रीबन चल रहे 2 महीने से ज्यादा आन्दोलन को हो गए है और यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में मगर आन्दोलन कर रहे का लोगों का वही कहना कि सरकार इसे वापिस ले. सुप्रीम कोर्ट से आये वकीलों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, मगर कोई नतीजा नहीं निकला। दोनों सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने प्रदर्शनकारियों से साफ शब्दों में कहा, “हमें बातचीत से हल निकालना है, वरना सरकार कोई कड़ा कदम उठाएगी, जिससे ये चीज़ और समस्या में पड़ जाएगी।”

दूसरे दिन की बैठक में कोशिश की गई कि लोगों को समझाया जाए, लेकिन पहले दिन की तरह ही प्रदर्शनकारियों ने वातार्कारों से फिर यही कहा कि सरकार नया कानून वापस ले ले, वे तुरंत हट जाएंगे और यही उनकी मांग है, थी और रहेगी ।

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साधना रामचंद्रन जो की सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस बातचीत के लिए नियुक्त की गई है उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा, “सोच-समझ कर हमें कुछ ठोस बातें करनी हैं। आपने सीएए को लेकर कई मुद्दे उठाए थे, आपकी बातें हमने समझी है, लेकिन आपको भी समझना होगा कि सीएए और एनआरसी का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, आपके सारे सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने हैं। अभी हमें सुप्रीम कोर्ट ने आपसे बात करने को भेजा है, इस बंद सड़क को लेकर।”

उन्होंने फिर आगे कहा, “आंदोलन करने का आपका हक बरकरार है,और सविधान आपको इसकी इज़ाज़त देता है । हमें मिलजुल कर कोई हल निकालना है, अगर हमारी बातचीत सफल नहीं होती तो हम वापस सुप्रीम कोर्ट चले जाएंगे, फिर सरकार को जो करना होगा, वो करेगी आप लोग समझिये। हम नहीं मानते कि किसी समस्या का हल नहीं निकल सकता।”

महिलाओं दादियों और बाकी सभी आन्दोलन से जोड़े लोगो ने कहा, “हम अपने घर से दूर सड़क पर बैठने को मजबूर हो गए हैं। हम सिर्फ अपने हक के लिए यहां दो महीने से बैठे हैं। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं। लेकिन सरकार हमें हटाने की कोशिश कर रही है , जिसमे वो कामयाब नही हो पाएगी ।”

शाहीन बाग की महिलाओं और दादियो ने ये भी कहा कि ‘’सरकार तानाशाही जैसा बर्ताव क्र रही है , उन्होंने पुलिस द्वारा हमारे बच्चों को जामिया में लाठी से पिटवाया कई बच्चों के हाथ पैर तक तोड़ दिए , एक बच्चे की आँख की रौशनी तक चली गई,ये कहा इन्साफ है लडकियों तक को मारा ये तानाशाही नही तो क्या ये हमारा सवाल सरकार से है.

आखिर में उन्होंने यही कहा कि हमारा आन्दोलन जब ही खत्म होगा जब ये काला कानून वापस होगा. अभी कुछ दिन बाकी है देखना होगा सुप्रीम कोर्ट की वकील बातचीत से क्या हल निकल पाते है

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