पीजीआईएमएस की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पा दहिया।


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 01 Apr 2021 12:51 PM IST

पीजीआईएमएस की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पा दहिया।
– फोटो : ANI

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हरियाणा में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना संक्रमित डॉक्टरों की बढ़ती संख्या का सबसे बड़ा असर पीजीआईएमएस के महिला रोग विभाग पर पड़ा है। विभाग के 19 पीजी डॉक्टर, दो सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर और एक सीनियर डॉक्टर संक्रमित पाए गए हैं। पीजीआईएमएस की चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि कि इनमें से 14 डॉक्टरों ने टीकाकरण करवाया था। वहीं बुधवार देर रात गायनी वार्ड में भर्ती तीन मरीज भी पॉजिटिव पाए गए। डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि जांच में सामने आया कि लेबर रूम ही कोरोना का हॉट स्पॉट बना हुआ है। विभाग के डॉक्टरों को आदेश दिया गया है कि इलेक्टिव सर्जरी की संख्या में कमी लाएं। 

ढिलाई : रैपिड जांच रोकी और नहीं करवाया टीकाकरण
महिला रोग विभाग ने कोरोना संक्रमण काल में ढिलाई बरती और परिणाम सामने आ गया है। सबसे पहले विभाग ने अपने यहां आने वाले मरीजों की रैपिड जांच रोकी, इससे कौन मरीज संक्रमित है या नहीं है पता ही नहीं चल पाया। इसके बाद खास बात यह भी सामने आ रही है कि कई डॉक्टरों ने कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण नहीं कराया है।

अब प्रशासन सवाल पूछ रहा है कि किस-किस ने टीकाकरण नहीं कराया था। निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव ने पहले ही पत्र जारी कर पूछा है कि किस डॉक्टर ने अभी तक टीकाकरण नहीं कराया है और उसकी वजह क्या है। गौरतलब है कि कई विभागों ने निदेशक के आदेशों की अवहेलना करते हुए अभी तक जवाब तक नहीं दिया है। जबकि इसमें कई महत्वपूर्ण विभाग भी शामिल हैं।  

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हरियाणा में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना संक्रमित डॉक्टरों की बढ़ती संख्या का सबसे बड़ा असर पीजीआईएमएस के महिला रोग विभाग पर पड़ा है। विभाग के 19 पीजी डॉक्टर, दो सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर और एक सीनियर डॉक्टर संक्रमित पाए गए हैं। पीजीआईएमएस की चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि कि इनमें से 14 डॉक्टरों ने टीकाकरण करवाया था। वहीं बुधवार देर रात गायनी वार्ड में भर्ती तीन मरीज भी पॉजिटिव पाए गए। डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि जांच में सामने आया कि लेबर रूम ही कोरोना का हॉट स्पॉट बना हुआ है। विभाग के डॉक्टरों को आदेश दिया गया है कि इलेक्टिव सर्जरी की संख्या में कमी लाएं। 

ढिलाई : रैपिड जांच रोकी और नहीं करवाया टीकाकरण

महिला रोग विभाग ने कोरोना संक्रमण काल में ढिलाई बरती और परिणाम सामने आ गया है। सबसे पहले विभाग ने अपने यहां आने वाले मरीजों की रैपिड जांच रोकी, इससे कौन मरीज संक्रमित है या नहीं है पता ही नहीं चल पाया। इसके बाद खास बात यह भी सामने आ रही है कि कई डॉक्टरों ने कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण नहीं कराया है।

अब प्रशासन सवाल पूछ रहा है कि किस-किस ने टीकाकरण नहीं कराया था। निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव ने पहले ही पत्र जारी कर पूछा है कि किस डॉक्टर ने अभी तक टीकाकरण नहीं कराया है और उसकी वजह क्या है। गौरतलब है कि कई विभागों ने निदेशक के आदेशों की अवहेलना करते हुए अभी तक जवाब तक नहीं दिया है। जबकि इसमें कई महत्वपूर्ण विभाग भी शामिल हैं।  





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