किताबे जो हमे बदलती हैं…

किताबे,पुस्तक और बुक्स इन तीनो ही शब्दों के मायने एक है लेकिन एक है "किताब" जो क़ुरान है,जो गीता है और गुरु ग्रन्थ साहिब...

क्यों जाएँ पुस्तक मेला..

पुस्तक मेला छ:ह जनवरी को शुरू हो चुका है ,यह मेला हर छह महिने बाद प्रगती मैदान में लगता है | इस पुस्तक मेले...

ख़्वाबनगर…

"" आमिर की आदत थी वो रोज़ सवेरे मनाली की इस खूबसूरती को निहारने घूमने जाता था।कभी दोस्तों के साथ तो कभी अकेले ही सही।आज...

एक दिन उर्दू भी खो जाएगी…

कुछ दिनों पहले एक 80 साल के बुजुर्ग के पास बैठना हुआ जो कि हिन्दू धर्म से ताल्लुक रखते थे और उर्दू के ऐसे...

बचाने से मर जाती है भाषा…

कुछ लोग भोजपुरी को बचाने का ठेका ले लिए हैं | ठेकेदारों की संख्या भी लगातार बढती जा रही है | सब एक दूसरे...

कुछ अहसास दोस्ती के…

जब कभी मेरे दिमाग में दोस्ती या दोस्त नाम का शब्द आता है तो मुझे एक ऐसा एहसास होता है जिसे मैं शब्दों में...

भीड़- अशोक कुमार पाण्डेय.

भीड़ • अशोक कुमार पाण्डेय (एक) टिड्डियों की तरह उभर आये हैं कितने ही चेहरे अचानक कितना शोर कैसी भाग दौड़ जैसे भूकम्प के बाद की सड़क आवाज़ें गड्डमगड्ड...

“मोहब्बत नही की थी”

अरमानों भर के लिए मोहब्बत नहीं की थी। उस रोज भी मैंने कोई शिकायत नहीं की थी।।   तेरे ज़ख्मों को भरने की एक कोशिश थी बस। दोस्त...

  पार्टीशन

  "पार्टीशन" "इंडिया डन डिस" ये कहते हुए ओम ने अपने असाइनमेंट के लिए ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के स्टाफ रूम में कहा,जिसे कहने के बाद पूरे...

बस स्टॉप

आज बस स्टॉप पर खड़ा राहुल कुछ परेशान सा दिख रहा था। बार बार अपनी नजरे इधर उधर दौड़ा रहा था बार बार अपनी...

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