मालवा की क्रांति के नायक

आज फिर 1 जुलाई है....यानी इतिहास के पन्नों में आज का दिन इंदौर, 1857 का मध्य भारत और आज के अखण्ड भारत के लिये...

सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति।

सरकारी विद्यालय यानी उन बच्चो के पढ़ने लिखने का संस्थान जो समाज में ग़रीब व छोटे परिवारों से होते हैं, जिन लोगों के पास...

आदमखोर भीड़ से कोई नहीं बचेगा।

बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक मानसिकरुप से कमजोर औरत को भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला सिर्फ इसलिए कि उन्हें ये लगा कि...

सामाजिक कार्यकर्ता “शबनम हाशमी” ने अपना अवार्ड वापस किया।

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता "शबनम हाशमी" ने आज मोदी सरकार का विरोध करते हुए नेशनल माइनॉरिटी राइट्स अवार्ड अल्पसंख्यक राष्ट्रीय आयोग को लौटा दिया...

शादी ना हो गई, जैसे नाटक मंडली का खेल हो गया!

शादी के नाम पर फरेब करना जैसे आजकल अनेक लड़के वालों के लिए एक आम बात हो गई है. जहां सुनो वहां शादी के...

देशभर मे “काली पट्टी” पहनकर ईद का त्यौहार मनाया गया।

लोकतंत्र जिसमे "विरोध' की बहुत बड़ी अहमियत होती है और ये विरोध कानून के हिसाब से शांतिपूर्ण ढंग से होता आया है,फिर चाहे दांडी...

भीड़ का लोकतन्त्र

क्या ऐसा समय आ गया है की अब खुलकर सत्ता मे बैठे लोगो को लाल क़िले से ऐलान कर देना चाहिए की मुसलमानों हाँ...

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